राजीव गांधी व्यक्ति और व्यक्तित्व; विनम्र श्रद्धांजलि
राजीव गांधी-व्यक्ति और व्यक्तित्व;विनम्र श्रद्धांजलि 22 मई 1991 की अल सुबह की बात है मैं इटावा में अपनी ननसार में सो रहा था।गत रात्रि यानी 21 मई को मैं इलाहाबाद से लौटता हुआ इटावा पहुँचा था।मेरे सहपाठी,रूम पार्टनर रहे और घनिष्ट मित्र धीरेंद्र पांडे जी ने ज्ञानपुर-गोपीगंज/भदोही से विधान सभा का चुनाव लड़ा था उनके चुनाव में कुछ दिन रहकर फिर कन्नौज से मेरे मौसाजी स्व0 प्रो0 रामस्वरूप चतुर्वेदी जी के अति घनिष्ट स्व0 टी0ऐन0चतुर्वेदी जी चुनाव लड़ रहे थे तो उनके क्षेत्र से होते हुए मैं और मेरे सुभाष मामा आदि लोग इटावा आये थे।उस दिन देर शाम को जब हम इटावा पहुँचे तो ऐसी भयंकर आंधी और तूफान आया जो उस से पहले कभी देखा-सुना नहीं था… तो 22 मई को अल सुबह हमारे नाना जी के घर के पास ही हिंदी के विद्वान राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त स्व0 शिव दत्त चतुर्वेदी जी का घर था उनके सबसे बड़े पुत्र श्री अशोक नारायण चतुर्वेदी जी ने नीचे सड़क से जोर आवाज में लगभग चिल्लाते हुए बताया कि राजीव गांधी की गत देर शाम हत्या हो गयी है और यह समाचार सुनते ही हम सब लोगों को मानो सांप सूंघ गया था….कुछ क्षण किसी के मुँह से बोल नही...