ज़िंदगी मेरी?-8 पूरब पश्चिम तथा हॉस्टल की तेल की शीशी वाला किस्सा
ज़िंदगी मेरी?-8 पूरब पश्चिम तथा हॉस्टल की तेल की शीशी वाला किस्सा #AtulChaturvediKeKisse #ZindagiMeri #BharatBharatiTales #HostelDiaries भारत भारती में हम लोगों को समय कब कट जाता है पता ही नहीं चलता था क्योंकि पूरे दिन की दिनचर्या नियमित और काफी कसी हुयी थी। हेस्टिन्गस रोड पर चौराहे पर ही ठीक भारत भारती के गेट के सामने एक नया मकान बन रहा था जो हम लोगों के देखते-देखते बना लेकिन उसने हमारा ध्यान आकर्षित किया जब वो पूरा बन गया और उसकी वजह थी उसका नाम। तब समझ में आया कि लोग मकानों के भी नाम रखते हैं और बाद में ध्यान भी गया कि इलाहाबाद में बैंक रोड पर मौसाजी के मकान का नाम था “पुरषोत्तम निवास” और उनके सामने प्रोफेसर जे. एस. माथुर साहब रहते थे, उनके मकान का नाम था “मातृ अञ्चल”। तो भारत भारती के सामने जो भव्य मकान बना उसका नाम उस पर सामने शायद पहली मंजिल के बॉर्डर पर बहुत बड़ा, जो दूर से पढ़ने में आता था, लिखा था, “पूरब पश्चिम”। सन 1970 में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज कुमार की एक फिल्म आयी थी “पूरब पश्चिम” जो बहुत हिट फिल्म थी और मनोज कुमार अपनी ज्यादातर फिल्में देश प्रेम, राष्ट...