हॉस्टल में
हॉस्टल में वैसे तो जीवन सतत परिवर्तनशील है किन्तु सन 2020 के बाद जीवन में काफी परिवर्तन आए।पहले कोविड के कारण काफी समय सभी लोग घर पर ही बिताने को मजबूर थे,उसके बाद कुच पारिवारिक घटनाक्रम तथा अब फिर दिसंबर 2025 से काफी समय घर पर ही बीत रहा है। इस समय का एक सदुपयोग यह हुआ कि मुझको पढ़ने और लिखने के लिए काफी समय मिला साथ ही मैंने सोशल मीडिया के साधनों जैसे कि फ़ेसबुक,यूट्यूब, ट्विटर(अब ऐक्स) आदि का भी काफी उपयोग किया। इसी बीच मेरी एक किताब “सियाहट मेरी स्याही से” जो कि एक यात्रा वृतांत और ऐक्सपोर्ट व्यापार से संबंधित संस्मरण है वह भी लोकभारती प्रकाशन से प्रकाशित हो गई और जैसा कि मुझको लोकभारती इलाहाबाद के आदरणीय श्री रमेश ग्रोवर अंकल ने बताया कि उसके पहले संस्करण की सभी पुस्तकें बिक गईं और दूसरे संस्करण की तैयारी है तो यह भी एक उत्साहवर्धक खबर रही। इस बीच मेरी लिखी दो अन्य पुस्तकें भी प्रकाशकों के विचाराधीन हैं।इस समय का सदुपयोग मैंने अपनी यादों,संस्मरणों आदि को लिपिबद्ध करने में भी किया जिसमें मेरी छात्र जीवन कि यादें, व्यापारिक यादें, राजनैतिक संस्मरण आदि भी हैं और अब प्रका...