ज़िंदगी मेरी?-23
ज़िंदगी मेरी?-23 #AtulChaturvediKeKisse हम लोग अब स्कूल और हॉस्टल के रोजमर्रा के रूटीन में थे, लेकिन हॉस्टल का जीवन कुछ ऐसा होता है कि रोज कुछ न कुछ नयी घटना होती रहती थी। इसी बीच उस भारत दर्शन यात्रा की एक पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फोटो भी मिल गयी है, जो कन्याकुमारी में विवेकानंद रॉक मेमोरियल के सामने खींची गयी थी। उस फोटो में मेरे साथ बहन जी भी हैं और शायद शीला द्विवेदी भी हैं, जिनके भाई अशोक द्विवेदी भी हमारे साथ ही पढ़ते थे। इतने वर्षों बाद वह फोटो मिली तो उस यात्रा की यादें एक बार फिर ताजा हो गयीं। सोचा, इस कड़ी के साथ वह फोटो भी आप सबके साथ शेयर कर दूँ। मुझको बचपन से कहानियाँ, उपन्यास आदि पढ़ने का बहुत शौक था। घर पर चन्दामामा, पराग, चंपक आदि मैगजीन नियमित रूप से आती थीं और हम सब पढ़ते थे। इनके अलावा इंद्रजाल कॉमिक्स में वेताल, मैन्ड्रेक और अमर चित्र कथा आदि भी पढ़ा करते थे। आप पाठकों में से जिन्होंने भी ये सब अपने बचपन में पढ़ा होगा, वो इनके आनंद से पूरी तरह वाकिफ होंगे। इनके अलावा उस समय बाल पॉकेट बुक्स का नया प्रचलन शुरू हुआ था और बाल भारती बाल पॉकेट बुक्स के नाम से छोटी कि...