ज़िंदगी मेरी?-4 हॉस्टल का दूध घोटाला और पाँच रुपये सुभाष मामा के
ज़िंदगी मेरी?-4 हॉस्टल का दूध घोटाला और पाँच रुपये सुभाष मामा के #atulchaturvedikekisse #BharatBharatiTales इलाहाबाद और भारत भारती में रहते अब कुछ समय हो चला था और मैं वहाँ के माहौल में रमने भी लगा था। एक दिन स्काउतींग में छोटे बच्चों को “शेर बच्चे” कहते थे उसकी प्रतियोगिता के लिए हम लोग नैनी के किसी स्कूल गए और वहाँ हमने प्रतियोगिता जीती भी। वहाँ अन्य कई स्कूलों के बच्चों से भी मिलना हुआ। यह अपने आप में एक अलग किस्म का अनुभव था। यहाँ जब हम और स्कूलों के बच्चों के साथ एक बड़े कमरे से में थे तो मैं एक कोने में खड़ा हुआ था और अकेले कुछ सोच रहा था कि अचानक मैंने देखा कि कुछ बच्चे मेरे घुटनों कि तरफ इशारा करके हँस रहे हैं तब मेरी समझ में आया कि मैं खड़े -खड़े घुटने ऊपर-नीचे चला रहा था जिसमें दरअसल हँसने की कोई बात नहीं थी किन्तु जब बच्चों ने हँसना शुरू किया तो मैं उसके प्रति कौन्शस हो गया और बच्चों के हँसने से खिसिया कर मैंने अपने घुटने ऊपर ही चढ़ाए रखे कि अब नीचे करूंगा तो बहुत हँसी फिर से बनेगी लेकिन आखिर ऐसा कितनी देर किए रहता क्योंकि ऐसा किए हुए बहुत दर्द भी हो...