ज़िंदगी मेरी?-5 फांसी वाली इमली,सिविल-लाइंस और संगम
ज़िंदगी मेरी?-5 फांसी वाली इमली,सिविल-लाइंस और संगम #AtulChaturvediKeKisse #BharatBharatiTales #HostelDiaries जब तक समझ में आया तब तक तो दशहरा दिवाली कि छुट्टियाँ खत्म हो चली थीं और नंबर आ गया था हॉस्टल जाने का। घर पर बहुत अच्छा समय बिताना ही था, हॉस्टल के किस्से सबके लिए ही रोचक थे और सुनाते वक्त खुद को भी ऐसा लगता था कि हमने भी कोई बहुत बड़ा काम किया है। बाबा बहुत खुश थे और प्रेरणास्पद बातें,किस्से,घर का इतिहास बताते थे और कहते थे कि खूब पढ़ लिख कर जीवन में सफल बनो। बहरहाल जैसे-जैसे हॉस्टल वापिस जाने का समय पास आया मन मलिन पड़ने लगा और दिल में धुकधुकी भी बढ़ने लगी थी। खैर,हम लोग इलाहाबाद पहुँच गए और फिर इलाहाबाद में मम्मी पापा सबके साथ एक-दो दिन छुट्टी के और बिताए। हम लोग हॉस्टल में जहाँ भी रहे जब पापा और मम्मी आते थे तो दो चीजें पक्की थीं एक तो कम से कम एक फिल्म देखना और दूसरा किसी अच्छे रेस्टोरेंट में लंच या डिनर पर सभी लोगों का जाना।एक बार हम लोग इलाहाबाद में थे (सन याद नहीं है लेकिन बात बहुत पुरानी है ) बात हुयी कि निरंजन सिनेमा में फिल्...