ज़िंदगी मेरी?-2 #AtulChaturvediKeKisse #BharatBhartiMemories
ज़िंदगी मेरी?-2 #AtulChaturvediKeKisse #BharatBhartiMemories हॉस्टल में पहुँचना मेरे लिए मानो एक नयी दुनिया में पहुँच जाना था।मेरा ऐडमिशन कक्षा 6 में हुआ था। स्कूल के गेट से अंदर घुसते ही लंबा ईंटों के खरंजे का पाथ वे और दाहिने हाथ पर एक बड़ा सा वृक्ष जिसका फल जंगल जलेबी कहलाता था जो मुझको बाद में मालूम पड़ा।रास्ते से आगे बढ़ते हुए ही दाहिने हाथ पर दो फील्ड दिखते थे जिनके बीच में क्लासरूम्स भी बने थे।आगे एक नींबू के पेड़ का इतना बड़ा झाड़ था कि उसके अंदर या नीचे 5-7 लोग बैठ जाएँ और ठीक उसके ऊपर एक बहुत लंबे खंबे पर रात के लिए बड़ी लाइट थी। पाथ वे बाउंड्री के सहारे चलता हुआ एक शानदार बिल्डिंग के पोर्टिको में ले जाता था जो कि दरअसल इलाहाबाद के पुराने शानदार बंगलों में से एक थी। पोर्टिको में हमारा तांगा रुका और वहाँ से दो सीढ़ी चढ़ कर मुख्य बिल्डिंग के सामने के हिस्से में एक बरामदा था जिसमे अंदर के हिस्से के दरवाजे खुलते थे।बड़ी मौसी, मौसाजी मुझको वहाँ छोड़ कर जा चुके थे और मैं कुमारी कांता भार्गव जी के साथ अंदर पहुँचा तो देखा कि सामने एक बहुत बड़ा हॉल...