काँच का इतिहास:विश्व,भारत और फ़िरोज़ाबाद
फ़िरोज़ाबाद और यहाँ के काँच के काम का इतिहास फ़िरोज़ाबाद और काँच उद्योग-1 भारत में काँच का इतिहास अत्यंत प्राचीन, समृद्ध और बहुआयामी रहा है। देश के विभिन्न भागों में जैसे-जैसे पुरातात्त्विक उत्खनन बढ़ते गए, वैसे-वैसे यह बात अधिक स्पष्ट होती गई कि प्राचीन भारत में काँच-निर्माण कोई सीमित या केवल आयातित गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह एक व्यापक, स्वदेशी और तकनीकी रूप से विकसित परंपरा थी। उत्तर प्रदेश के कोपिया, उत्तर-पश्चिम के तक्षशिला/टैक्सिला, सातवाहन कालीन स्थलों और अन्य अनेक पुरास्थलों से काँच के मनके, चूड़ियाँ, कटोरे, स्लैग, छोटे पात्र, टाइलें और काँच की शीशियाँ बड़ी मात्रा में प्राप्त हुई हैं। इन वस्तुओं की संख्या और विविधता यह संकेत करती है कि इन्हें केवल विदेशी आयात मानकर नहीं समझा जा सकता। इसी संदर्भ में यह भी उल्लेख मिलता है कि जितने अधिक उत्खनन हुए, उतना ही यह सिद्ध होता गया कि प्राचीन भारत में काँच-कार्य व्यापक था, और उपलब्ध वस्तुओं का बड़ा भाग स्थानीय उत्पादन पर आधारित रहा होगा। काँच की उत्पत्ति को लेकर विद्वानों में लंबे समय तक चर्चा रही है और यह विषय आज भी पूरी तरह “...