नौजवान की कौन सोचेगा? सरकार ध्यान दे
देश की नयी बनने वाली सरकार के लिए सबसे बड़े मुद्दे होने चाहिए सामाजिक सद्भाव और नौजवानों के लिए रोजगार जिसका जवाब सरकारी नौकरियों में नहीं स्किल डिवेलपमेंट से है।इस समस्या के हल हेतु बड़ी कम्पनियों, बड़े शिक्षण संस्थानों और राज्य सरकारों को भी साथ आना होगा। इसके लिए देश और प्रदेशों के नीति निर्धारकों को खुले दिल और दिमाग से सोचना होगा। अभी हकीकत ये है कि युवाओं की जिंदगी का एक बड़ा भाग रोजगार/ नौकरियों की तलाश में ही निकल जाता है और जिन लोगों की नौकरी आखिर तक नहीं लगती (और ऐसे लोग ही सबसे ज्यादा होते हैं) वो तब तक अधेड़ावस्था की तरफ बढ़ने लगे होते हैं। यदि अब नए रास्ते, नए रोजगार नहीं खोजे गए तो युवा देश का युवा अधेड़ होने लगेगा;मतलब देश भी अधेड़ होने लगेगा और वो तो समय के साथ होना ही है। बिना रोजगार के न सिर्फ व्यक्तियों, परिवारों का अपितु असलियत में उनके के साथ ही साथ देश का भी नुकसान होगा और जिस देश के लोग ताउम्र बिना काम के होंगे वो 2047 क्या 2147 तक भी अपेक्षित सफलता हासिल कर सकेगा इसमें संशय ही है..... इस हेतु सरकारी योजनाएं कुछ भी चीखें किंतु सरकारी नीतियों में बड़ी कमी ...