मकर संक्रान्ति 2025
14 जनवरी को जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि पर जाते हैं तो मकर संक्रान्ति का पर्व सारे देश में लोहड़ी,पोंगल,खिचड़ी आदि नामों से मनाया जाता है।इस दिन से सूर्य उत्तरायण में हो जाते हैं जिससे भीष्म पितामह की कथा जुड़ी हुई है।महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपनी देह त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन को ही चुना था, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन ही गंगाजी भगीरथ के पीछे-पीछे चलकर कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में जा मिली थीं। संक्रांति मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। आज मैंने सुबह से मकर संक्रांति से सम्बंधित अनेकों पोस्ट देखीं जिसमें एक पोस्ट आदरणीय श्री शम्भूनाथ शुक्ल जी की थी जिसमें संक्रान्ति के दिन खिचड़ी के दान और खाने की चर्चा है।एक और पोस्ट थी भाई मनीष स्वरूप चतुर्वेदी, इटावा की जिसमें मकर संक्रांति के दिन श्री माथुर चतुर्वेदी लोगों के यहाँ के खाने मूंग,भात, झोर का जिक्र है। मैंने अपने बाबा की डायरी देखीं तो उनकी पुरानी डायरी में भी इस खाने का जिक्र है।मैं उसकी फोटो भी शेयर कर रहा हूँ। जब मैं इलाहाबाद में पढ़ता था तो वहाँ मकर संक्रान्ति को माघ मेले की शुरुआत...