So you are on the wrong side of the barricades
"So You Are on the Wrong Side of the Barricades"
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान कई देशों के राजदूतों और राजनयिकों से मुलाक़ात का अवसर मिला। इसी दौरान यूरोप के एक देश के राजदूत से बातचीत हुई। जब मैंने उनसे कहा कि मैं काँच के व्यापार से तो जुड़ा हूँ ही और साथ ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक कार्यकर्ता भी हूँ, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए टिप्पणी की—
"So you are on the wrong side of the barricades."
यह सुनकर क्षणभर को मैं थोड़ा चौंका। एक राजनयिक से ऐसी टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि उनसे सामान्यतः तटस्थता की अपेक्षा की जाती है। फिर भी, मैंने अत्यंत विनम्रता और शालीनता से उत्तर दिया—
"No, Your Excellency, it’s not so. I am not on the wrong side—rather, I am also on the Right side."
हमारे देश में लोकतंत्र है, और हर सशक्त लोकतंत्र में विभिन्न विचारधाराएँ होती हैं—सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों मिलकर ही लोकतंत्र का संतुलन बनाते हैं। मैं विपक्ष के साथ हूँ, और यह कोई असामान्य बात नहीं, बल्कि लोकतंत्र की सेहत का प्रमाण है।
इसके बाद मैंने मुस्कराते हुए जोड़ा—
"Though I am not Right (in ideology), I am still on the Right side."
"हाँ, मैं भले ही 'Right' विचारधारा में नहीं हूँ, लेकिन मेरा पक्ष भी लोकतंत्र के लिए Right—अर्थात् आवश्यक और सही—है।"
मेरे इस उत्तर पर वे कुछ क्षणों के लिए थोड़े असहज से लगे, फिर सहज होकर मुस्कुरा उठे।
लेकिन मेरे मन में यह विचार अवश्य उठा कि जब विश्व के सबसे विकसित और अनुभवी देशों के प्रतिनिधि भी लोकतंत्र की गहराई और विपक्ष की गरिमा को लेकर ऐसी सोच रखते हैं, तो यह वास्तव में चिंतन का विषय है।
क्योंकि लोकतंत्र केवल बहुमत की सत्ता नहीं है, वह असहमति की आवाज़ को सम्मान देने की भावना भी है।
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