Sindbad Travels-23 France-2 Paris 1st day

Sindbad Travels-23

France-2

Paris 1st day-
Champ Elysees etc.

सिंदबाद ट्रैवल्स-23

फ्रांस-2

पेरिस दिन-1
Champ Elysees etc.

जब पेरिस की उस गली में जहाँ ट्रॉली टूट जाने के कारण मुझको अपना सामान सर पर लाद कर चलना पड़ा था और पीछे से किसी ने आवाज़ दी तो मैं वाकई चौंक गया।क्षणमात्र को तो मैंने सोचा कि यहाँ फ्रांस में मुझको कौन जानता है जो पुकारेगा,निश्चित ही ये मेरा  भ्रम होगा लेकिन जैसे ही सर पर सामान लादे लादे ही मैंने थोड़ा मुड़ कर देखा तो ये वही लड़की थी जो मुझको अभी कुछ देर पहले ही यूथ हॉस्टल के बुकिंग ऑफिस में मिली थी और जिसने मेरी भाषा की समस्या हल की थी।मैंने थोड़ा झेंपते हुए,मुस्कुराने का प्रयास करते हुए बताया कि कैसे मैं उल्टी दिशा में चला गया था और कैसे ये ट्रॉली टूट गयी और फिर an Exporter had to become a Porter.यह सब सुन कर वो हँसने लगी और बोली कि अरे ये तो बहुत दिक्कत हो गयी फिर मेरे मना करते करते भी उसने मेरी एक अटैची और बैग अपने हाथ में ले लिया और हम लोग मुख्य सड़क की तरफ बढ़ चले।उस से बातचीत में ज्ञात हुआ कि वो जिधर जा रही थी उस रास्ते में ही मेरा ठहरने वाला यूथ हॉस्टल भी था तो मैंने उस से कहा कि अगर वो चाहे तो मैं टैक्सी से जाऊँगा ही वो भी साथ चली चले और इस प्रकार हम दोनों एक टैक्सी कर के यूथ हॉस्टल की तरफ बढ़ चले।
इस लड़की का नाम हिरान (Hiran) था।हिरान कि उम्र लगभग 20-21 साल की रही होगी और वो अल्जीरिया मूल की थी।अल्जीरिया ईस्वी सन 1962 तक फ्रांस का उपनिवेश था और स्वतंत्रता के बाद भी इस उत्तर अफ्रीकी देश में फ्रांस का बहुत ज्यादा प्रभाव है और दोनों देशों में गहरा रिश्ता है।फ्रांस/पेरिस में अल्जीरिया के बहुत लोग रहते हैं।हिरान भी पेरिस में रहती थी और पेरिस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही थी।हिरान ने बताया कि अल्जीरिया फ्रांस की कॉलोनी था और 1960 के दशक में अल्जीरिया के स्वतंत्र होने के बाद वहाँ का माहौल अस्थिर होने के कारण बहुत से लोग फ्रांस migrate कर गए थे।20वीं शताब्दी आते आते फ्रांस विश्व की दूसरी सबसे बड़ी औपनिवेशिक शक्ति बन गया था।हिरान बता रही थी कि फ्रांस में विश्व के किसी भी देश से अधिक पर्यटक हर वर्ष आते हैं।हम लोग बातें कर रहे थे कि यूरोप के पुनर्जागरण (Renaissance) में कैसे फ्रांस की भी बड़ी भूमिका रही थी।ये पुनर्जागरण का ही काल था जब फ्रेंच भाषा न सिर्फ फ्रांस की आधिकारिक भाषा बनी अपितु सम्पूर्ण यूरोप के आभिजात्य वर्ग (aristocracy) की भी भाषा बन गयी थी।ये बिल्कुल वैसी ही घटना थी जैसे प्राचीन काल में भारत में संस्कृत भाषा का स्थान था और फिर मध्यकाल में भारत में फारसी ने ये स्थान लिया और 20वीं सदी और कुछ हद तक 21वीं सदी में भी भारत में अंग्रेज़ी इस स्थान की प्रबल दावेदार प्रतीत होती है।17वीं शताब्दी में लुई 13वें के समय में कैसे कार्डिनल रिशलू ने राज्य की सत्ता के केंद्रीकरण को बढ़ावा दिया और कैसे लुई 14वें ने अमेरिका के स्वतंत्रता संग्राम का समर्थन किया जिसका एक प्रमुख कारण यह भी था कि अमेरिकी लोग यह लड़ाई इंग्लैंड की सत्ता के खिलाफ लड़ रहे थे।इस पर मैंने हिरान को यह भी बताया कि कैसे अंग्रेजों के विरुद्ध फ्रांस के नेपोलियन और भारत के टीपू सुल्तान में सम्पर्क हुआ था और पत्राचार भी हुआ था जिसमें टीपू सुल्तान को ‘टीपू साहब’ कह कर भी सम्बोधित किया गया था। नेपोलियन के इजिप्ट अभियान के बाद अंग्रेजों के विरुद्ध एक संयुक्त मोर्चा खोलने की भी टीपू सुल्तान से चर्चा हुयी थी किन्तु ऐसा हो नहीं सका।

मैं हिरान को बता रहा था कि 17वीं सदी में फ्रांसीसी चिकित्सक और यात्री फ्रांकोइ बर्नियर (François Vernier 1625-1688) भारत आया था और लगभग 12 वर्षों तक मुगल सम्राट औरंगज़ेब का व्यक्तिगत चिकित्सक रहा था। हिरान की इस विषय में रुचि देख कर मैंने उसको ये भी बताया कि 1794 में फ्रांसीसी रिपब्लिकन अधिकारी की मदद से टीपू सुल्तान ने “जैकोबिन क्लब ऑफ मैसूर” की स्थापना करवाई जिस से गणतंत्र के अनुरूप कानून बनाये जा सकें ,टीपू ने एक “स्वतंत्रता के वृक्ष” का भी रोपण किया और वो इतना प्रभावित था कि टीपू ने स्वयं को “नागरिक टीपू”(Citizen Tipu) भी घोषित किया।

हम लोगों की बातें चल रही थीं और हमारी टैक्सी पेरिस की खूबसूरत सड़कों से गुजर रही थी।हमारे दाहिने हाथ पर सीन नदी थी जिसको “le seine” भी कहते हैं।पेरिस की सुंदर सड़कें उनपर दोनों तरफ बेहद करीने से लगे हुए पेड़ एक अद्भुत नजारा प्रस्तुत कर रहे थे।पेरिस न सिर्फ कला,साइंस,संस्कृति,फैशन के केंद्र के रूप में प्रसिद्ध है,न सिर्फ अपनी विश्व प्रसिद्ध इमारतों जैसे कि आइफल टॉवर,आर्क दे ट्रायम्फ,12वीं सदी के नोट्रे-डॉम कैथेड्रल आदि के लिए प्रसिद्ध है,न सिर्फ अपने विश्व प्रसिद्ध लूव म्यूज़ियम के लिए प्रसिद्ध है,न सिर्फ अपनी मॉस्को के बाद यूरोप की सबसे व्यस्त सन 1900 से चालू मेट्रो के लिए प्रसिद्ध है,न सिर्फ अपने रेलवे स्टेशन गारे डु नौर्ड (Gare du Nord) के लिए प्रसिद्ध है जो विश्व के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में प्रमुख है अपितु पेरिस शहर अपनी अद्वितीय सुंदरता और अद्भुत रोशनी Lighting के लिए भी प्रसिद्ध है।पेरिस को अक्सर City of Light भी कहा जाता है और इसकी दो वजहें हैं।पहली तो यह कि प्रबुद्धता और पुनर्जागरण के काल में पेरिस की एक बहुत ही प्रमुख भूमिका रही थी और अनेकों कलाकार,साहित्यकार,दार्शनिक आदि पेरिस की सुंदरता अपनी उपस्थिति से सदैव बढाते रहे यहाँ तक कि 20वीं सदी के प्रारंभ में विश्व भर के प्रसिद्ध प्रबुद्ध जन काफी संख्या में पेरिस में ही उपस्थित थे जैसे पिकासो,मोदीजिलियानी,मैटिसे आदि और हाँ बाद में चलकर तमाम एशिया और अफ्रीका के छात्रों ने पेरिस को अपना अड्डा बनाया जो बाद में अपने देशों के नायक बने जैसे कि हो ची मिन्ह (वियतनाम के सर्वोच्च नेता),चाऊ एन लाई(चीन के प्रधान मंत्री रहे और बहुत बड़े नेता),लियोपोल्ड सेडर सेंघोर(सेनेगल के प्रथम राष्ट्रपति)आदि।ऐसे प्रमुख और प्रबुद्ध लोग जिन्होंने अपने अपने क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा से विश्व को आलोकित किया उनके पेरिस में रहने अथवा सम्बन्ध होने के कारण भी पेरिस को प्रबुद्ध जनों की रोशनी वाला शहर यानी City of Light कहा जाता है।

इस कारण के अतिरिक्त पेरिस को City of Light कहने का एक दूसरा भौतिक कारण भी रहा है।पेरिस यूरोप के उन पहले शहरों में और अग्रणी था जिन्होंने अपनी स्ट्रीट लाइटें जलाने में गैस का उपयोग किया।ईस्वी सन 1860 के दशक में पेरिस के boulevards यानी कि मुख्य मार्ग और सड़कें 56000 गैस लैम्पों से आलोकित होती थीं,जरा सोचिए कैसा खूबसूरत और अलौकिक नजारा लगता होगा उस समय पेरिस का।पेरिस के विषय में आगे भी बात करूंगा लेकिन यहाँ बस इतना कहना चाहूंगा कि पेरिस एक ऐसी जगह है जो शुरू में कुछ अजीब सी भी लगी क्योंकि भाषा की समस्या आड़े आती रही किन्तु मुझको अपनी हर यात्रा में पेरिस पहले से अधिक सुंदर लगती गयी और जैसा मुझसे और लोगों ने भी कहा कि घुमक्कड़ लोगों को पेरिस की लत लग जाती है।

इस प्रकार से पेरिस की ख़ूबसूरती निहारते हुए और अल्जीरिया की हिरान से बातें करते हुए हमारी टैक्सी मेरे गंतव्य अर्थात यूथ हॉस्टल पहुँच गयी।वहाँ पर उतर कर हिरान मेरे साथ रिसेप्शन तक गयी और उसने फ्रेंच भाषा में बात करके मेरी बुकिंग दिलवा दी।ये यूथ हॉस्टल एक बड़ी सी और पुरानी सी इमारत में था जिसमें मेरा रुकने का हॉल पहली मंजिल पर था।रिसेप्शन के आगे लॉबी नुमा हॉल से बहुत चौड़े जीने ऊपर को गए थे और सीढ़ियों पर शानदार गुदगुदा लाल कालीन बिछा हुआ था।मैं सारा सामान एक बार में ऊपर लेकर नहीं जा सकता था इसलिए मैंने अपनी एक अटैची और वीडियो कैमरा नीचे हिरान के पास छोड़ा और इस प्रकार सामान दो बार में ऊपर की मंजिल पर अपने ठहरने वाले हॉल में पहुँचाया।सामान ऊपर रख कर मैं तुरंत नीचे आया हिरान को विदा करने।जैसा मैं पहके बता चुका हूँ कि हिरान एक अल्जीरियन मूल की लड़की थी और पेरिस यूनिवर्सिटी में  पढ़ाई कर रही थी।मैंने हिरान से कहा कि मैं तीन दिन को पेरिस में हूँ और यहाँ व्यापार करने आया हूँ,चूँकि यहाँ पर भाषा की एक मुख्य समस्या है दूसरे मैं पेरिस शहर को बिल्कुल भी जानता भी नहीं हूँ तो वो मेरी कुछ मदद कर दे तो मैं उसका आभारी रहूँगा और यदि कुछ ऑर्डर मिलता है तो उस पर उसको कमीशन भी दूँगा।हिरान इस पर राजी हो गयी।उसने कहा कि उस दिन तो वो मेरा साथ पूरे तौर पर दे सकती है किंतु अगले दिन वो लगभग 4 बजे ही मिल पाएगी क्योंकि उसके पहले उसकी क्लास होगी,मुझको तो, खैर,इस पर सहमत होने में कोई दिक्कत नहीं ही होनी थी।

अब अपने सैम्पिल एक बैग में भरकर मैं और हिरान चल दिये पेरिस में व्यापार की तलाश में।पास में ही मेट्रो स्टेशन था जहाँ से हमने मेट्रो पकड़ी अपने गंतव्य के लिए।हिरान ने बताया कि उसको व्यापार की कोई भी और कैसी भी जानकारी नहीं है लेकिन वो मुझको कुछ दुकानों पर अवश्य ले चलेगी बाकी प्रयास मुझको करना था।मैं भी इसके लिए राजी ही था क्योंकि और मैं करता भी क्या।दरअसल मुझको ये बात बहुत समय बाद और अपनी इस पहली विदेश यात्रा के बाद ही मालूम हुई कि विदेश में माल बेचने का यह तरीका,दुकान दुकान जाकर प्रयास करने का,सही नहीं था और दुकानदार जो छोटे retailers यानी कि खुदरा व्यापारी होते हैं वे स्वयं आयात नहीं करते हैं।माल आयात करने वाले importers,थोक के व्यापारी यानी कि wholesalers एवं खुदरा व्यापारी यानी कि retailers अमूमन ये सब अलग अलग  व्यापारी होते हैं और निर्यातक यानी कि Exporter के काम का व्यापारी मुख्यतः आयातक यानी कि Importer ही होता है,कई बार Importer एवं Wholesaler एक ही होते हैं लेकिन ये सब ज्ञान तो समय और अनुभव के साथ ही मिलना था तो अभी तो मैं चल पड़ा था पेरिस की दुकानों पर व्यापार तलाशने अलजीरियन लड़की हिरान के साथ।

हम लोग सेंट पॉल मेट्रो स्टेशन पर उतरे और पेरिस की अत्यधिक प्रसिद्ध सड़कों में से एक rue de Rivoli पर पहुँच गए।यह एक अत्यंत लंबी चकाचौंध और भीड़ से भरी सड़क थी जिस पर खूब दुकानें थीं।रिवोली रोड या रू दे रिवोली पर चलते हुए महसूस हो रहा था कि पेरिस कितना जीवंत शहर है।न जाने कितने लोग फुटपाथ पर इधर से उधर जा रहे हैं,कुछ के साथ छोटे बच्चे हैं,तो कोई साइकिल पर जा रहा है तो किसी कोने में नौजवान प्रेमी-प्रेमिका दुनिया को भूल कर हाथ में हाथ डाले इश्क फरमा रहे थे।फुटपाथ पर सड़क की सीमा बताते हुए से बैरीकेड अथवा जगह जगह पार्टीशन से लगे थे।हम लोग एक दुकान में घुसे जिस पर आर्टीफीशियल ज्वेलरी बिक रही थी।हिरान ने पहले काउंटर पर फ्रेंच भाषा में अपने आने का मकसद बताया तो उन्होंने अंदर की तरफ दूसरे काउंटर पर भेज दिया।वहाँ जो महिला बैठी थीं उन्होंने कुछ सैम्पिल देखे जो मुझको लगा कि उनको पसंद भी आये।बातचीत में उन्होंने बताया कि वो लोग इम्पोर्ट नहीं करते हैं हाँलांकि हमारे उत्पाद उनको अच्छे लगे थे किंतु काम नहीं बना।हम लोगों ने इसके बाद तीन चार दुकानों पर और प्रयास किया किन्तु बात कहीं भी नहीं बनी।

rue de Rivoli पर घूमते हुए मैंने देखा कि सड़क पर चौड़े फुटपाथ हैं,कई स्थानों पर फुटपाथ पर ही कैफे खुले हुए थे और लोग वहाँ बैठ कर कॉफी आदि का आनंद ले रहे थे।कुछ इलाकों में दिल्ली की कनॉट प्लेस के जैसे गलियारे भी थे जिनमें दुकानों के बाहर भी सामान बिक रहा था।एक दिन जब मैं शाम को rue de Rivoli पर आया तो बेहद शानदार नज़ारा था।खूब रोशनी,रंग बिरंगी लाइटें आदि बहुत ही मनमोहक थीं।चूँकि मेरी पहली यात्रा 1991 की थी और तब का भारत आज 2018 के भारत से काफी भिन्न था तो इस प्रकार की चकाचौंध प्रभावित भी अधिक करती थी और फिर वैसे भी पेरिस की शामें तो हमेशा से मशहूर रही हैं।

Rue de Rivoli से हम लोग Champ-Elysees पहुँचे।ये इलाका पेरिस के विश्व प्रसिद्ध इलाकों में से एक है।ग्रीक पौराणिक कथाओं के अनुसार इस नाम का एक अर्थ मृतक नायकों के स्वर्ग से भी है।Champ-Elysees  एक लगभग 2 किलोमीटर लंबी और लगभग 70 मीटर लंबी अत्यन्त वैभवशाली सड़क है।इसके एक तरफ शानदार 'Place de la Concorde’ है तो दूसरी ओर ‘Place Charles de Gaulle’  है जहाँ विश्व प्रसिद्ध इमारत Arc de Triumphe स्थित है।इसी सड़क के दूसरी तरफ पास में ही फ्रांस के राष्ट्रपति का आधिकारिक निवास स्थान Elysée Palace है। Champs Elysees अपने कैफे,विलासितापूर्ण वैभवशाली दुकानों,बड़े बड़े ब्रांडों के शो रूम्स और थियेटरों के लिए बहुत मशहूर है।यहाँ पर विश्व प्रसिद्ध ब्रांड्स जैसे कि Cartier, Louis voitton, Boss, Christian Door आदि के शो रूम्स अपना अपना जलवा बिखेर रहे हैं तो एक से एक शानदार कैफे भी हैं जैसे ‘Fouquet’s’ और हाँ विश्व के इस सबसे महँगे स्थानों में से एक पर किसी भी दुकान में किसी सस्ती चीज़ को खोजने की इच्छा भी मत रखियेगा।इस बाज़ार में अपने सैम्पिल कहीं दिखाना संभव ही नहीं लगा तो फिर व्यापारिक प्रयास को आगे के लिए टाल दिया और सोचा कि अब इस इलाके को घूम लिया जाए।

Avenue de Champs Elysees की ख़ूबसूरती बस देखते ही बनती है।चौड़े चौड़े फुटपाथ,बहुत ही करीने से कटे और नीचे से छंटे हुए पेड़,उनकी हरियाली,दुकानों की रौनक,घूमने फिरने वालों की चहल पहल,शाम को रोशनी की चकाचौंध,पेरिस की करीने से एक दूसरे को काटती सड़कें,एक खास तरह के क्रीमी-ग्रे रंग के ‘पेरिस स्टोन’ से सुसज्जित इमारतें और उनकी एकसार बनी ऊपरी मंजिलों की अति सुंदर बालकनी, ये सब मानो कहते हैं कि हाँ यही विश्व प्रसिद्ध सुंदर नगरी पेरिस है,इसी पेरिस की an evening in Paris प्रसिद्ध है,आओ पेरिस को देखो,इस से इश्क करो,ये शहर है ही ऐसा।

ये इलाका इतना सुंदर था कि मैंने हिरान से कहा कि लगता है कि ये पेरिस का सबसे खूबसूरत इलाका है तो उसका जवाब था कि पेरिस को जितना देखोगे ये उतना खूब सूरत लगेगा।

Avenue de Champ Elysees  में आगे बढ़ते ही एक भव्य और शानदार इमारत दिखती है जिसका नाम है Arc de Triomphe.इस इमारत से नेपोलियन,हिटलर और अमेरिका के राष्ट्रपति रहे जॉन एफ केनेडी के किस्से भी जुड़े हुए हैं।अब हम लोग Arc de Triomphe की तरफ बढ़ लिए थे।

Comments

  1. आपकी वर्णन शैली ने पेरिस कहि खूबसूरती मैं चार चाँद लगा डाले हैं।इतना जीवंत और सजीव वर्णन के लिए आपकी जितनी प्रशंसा की जाए वो कम ही होगी।हर बार कुछ न कुछ ऐसा पढ़ने को मिला है जिससे आगे पढ़ने की लालसा बढ़ती ही जाती है।आगे के अंकों का बेसब्री से इंतज़ार है।

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  2. वाह भाई ! लिखने की क्या रवानगी पाई है कि सारे शब्द सीधे दिमाग ओ दर पर पैंठ गए,मन मस्त हो गया, छोटी छोटी बातों को भी अपने वर्णन में समेट लेना एक प्रबुद्ध लेखक की निशानी है, इसकी आपको बधाई हो आशा है "खिलते रहे इस कलाम से गुलाब और भी ज्यादा" !!
    तुम्हारा आनंद.

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