आज 20 अगस्त स्व0 राजीव गांधी जी के जन्मदिन के अवसर पर उनसे जुड़े मेरे कुछ संस्मरण
आज 20 अगस्त को स्व0 राजीव गांधी जी के जन्मदिन के अवसर पर उनसे जुड़े मेरे कुछ संस्मरण
भारत के प्रधान मंत्री रहे स्व0 राजीव गांधी जी एक बहुत ही सहज,सरल और सौम्य व्यक्तित्व के स्वामी थे.सन 1988 अथवा 1989 की बात रही होगी, राजीव जी प्रधान मंत्री थे और उनकी सरकार में स्व0 कल्पनाथ राय जी राज्य मंत्री थे और ये किस्सा स्व0 राय साहब की पुत्री की शादी के समय का है.उस समय मैं स्वयं राजनीतिक रूप से बहुत सक्रिय नहीं था किंतु कांग्रेसी परिवार होने के कारण कांग्रेस के अनेकों वरिष्ठ नेताओं से हम लोगों के पारिवारिक संपर्क और आना जाना तो था ही.उस समय मेरे पिता जी श्री अशोक चतुर्वेदी जी नगरपालिका फ़िरोज़ाबाद के अध्यक्ष थे.
कल्पनाथ रायबसाहब का मुझ पर बहुत स्नेह था और उनके घर मेरा आना जाना था.
स्व0 कल्पनाथ राय साहब की लड़की की शादी 36-औरंगज़ेब रोड(वर्तमान ऐ0पी0जे0 अब्दुल कलाम मार्ग) स्थित उनके सरकारी बंगले से हो रही थी.मैं भी वहाँ मौजूद था ही.उस शादी में उत्तर प्रदेश ही नहीं देश भर के न जाने कितने महत्वपूर्ण लोगों का आना हो रहा था और राय साहब के साथ साथ मुझको भी उन लोगों के स्वागत करने का अवसर मिल रहा था.उस बंगले में अंदर घुसने पर बाएं हाथ को जो लॉन था उसमें एक स्टेज बनी थी जिस पर वर-वधू थे और मेहमान आ जा रहे थे जबकि बंगले में घुसने पर थोड़ा पीछे दाहिने तरफ के भाग में खाने की व्यवस्था थी.सारा इंतज़ाम अत्यंत सुव्यवस्थित लेकिन सादगी पूर्ण था.कुछ ही समय में कुछ सुगबुगाहट सी हुई कि पी एम आ रहे हैं,थोड़ी सुरक्षा बढ़ती दिखी हाँलाँकि किसी मेहमान को कोई भी असुविधा नहीं हुई और थोड़ी देर में ही बादामी रंग के बंद गले के सूट में सामने अपनी चिरपरिचित सौम्य मुस्कुराहट के साथ राजीव जी आते दिखे.राजीव जी वहाँ उपस्थित लोगों से नमस्ते करते,हाथ मिलाते स्टेज की तरफ बढ़ रहे थे और मैं उनके व्यक्तित्व और छवि से इतना प्रभावित था कि मन्त्र मुग्ध सा उनको देख रहा था कि तभी मुझे कल्पनाथ राय जी की आवाज सुनाई दी,मैं स्टेज के बिल्कुल नीचे सामने खड़ा था और राय साहब ने मुझको आवाज देकर हाथ के इशारे से स्टेज के ऊपर आने को कहा.मेरी प्रसन्नता के क्या कहने थे!! मैं तुरंत स्टेज पर जहाँ राजीव जी,कल्पनाथ राय साहब और अन्य कुछ मेहमान खड़े थे वहीं पहुँच गया और रायसाहब ने राजीव जी से मेरा परिचय कराया कि ये फ़िरोज़ाबाद के चेयरमैन श्री अशोक चतुर्वेदी जी के बेटे अतुल चतुर्वेदी हैं.राजीव जी ने अपना हाथ आगे बढ़ा कर मुझसे हाथ मिलाया और मेरा हाथ अपने हाथ में पकड़े पकड़े अपनी चिरपरिचित करिश्माई मुस्कान के साथ मुझसे पूछा,”और चेयरमैन साहब के क्या हाल है?”उनका वो स्नेह भरा हाथ का स्पर्श और मुस्कुराते हुए यह पूछना मेरे जीवन के अविस्मरणीय पलों में से है.उनका वह हाथ मिलाना और उनकी वो मुस्कुराहट मैं कभी भूल नहीं सकता.उसके बाद मैं स्टेज से उतर आया क्योंकि भारत के उस अद्भुत नेता से मिलने वाले लोगों की बहुत भीड़ थी वहाँ. कुछ समय बाद जब मैं भोजन स्थल की तरफ था तो राजीव जी वहाँ आये और उन्होंने खाने की प्लेट उठा कर उसमें सलाद रखा और मुझको भी इशारा किया कि मैं भी प्लेट उठाऊँ और सलाद लूँ.उनके पीछे पीछे खाने की प्लेट मैंने भी उठा ली और यह पल भी मेरे जीवन के अविस्मरणीय पलों में अंकित हो गया.
इसके बाद एक बार जब राजीव जी विपक्ष में आ गए थे और 10 जनपथ पर रहने लगे थे तब का वाकया है.संभवतः 1990 की बात है,मौका था राजीव जी के जन्मदिन का. कल्पनाथ राय जी और कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहे स्व0 आर0 गुंडूराव के साथ मैं एक मारुति वैन में बैठ कर राजीव जी को उनकी जन्म दिन की बधाई देने गए.10 जनपथ के बाहर लोगों का भारी जमावड़ा था,वहाँ मेरी मुलाकात कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से हुई.
10 जनपथ में अंदर जाने पर थोड़ी देर में वहीं लॉन में राजीव जी आये और सभी लोगों से मुस्कुराते हुए मिलने लगे,लोगों में उनसे मिलने और उनको जन्मदिन की बधाई/शुभकामनाएं देने का गजब का उत्साह था.थोड़ी देर में जिधर कल्पनाथ राय साहब और गुंडूराव जी के साथ मैं खड़ा था राजीव जी उधर आये और उन्होंने पहले तो अपनी चिरपरिचित मुस्कान के साथ हम लोगों से बधाई स्वीकार की और फिर कल्पनाथ राय साहब के पेट की ओर इशारा करते हुए मुस्कुराते हुए बोले इसको कम करो अब फील्ड में आने को फिट और तैयार हो जाओ,बहुत मेहनत करनी है.कल्पनाथ राय साहब ने मेरा परिचय कराने को जैसे ही कहा कि ये अतुल चतुर्वेदी हैं फ़िरोज़ाबाद से तो राजीव जी तुरन्त बोले,”चेयरमैन साहब कैसे हैं?कहाँ हैं?बहुत समय से दिखे नहीं?”कहने का मतलब यह कि मेरा नाम और शहर जैसे ही राय साहब ने बताया तो उनको कहीं पुराना ध्यान रहा होगा वो याद आ गया और उन्होंने पापा के विषय में पूछ कर जता भी दिया कि उनको ध्यान है और उन्होंने मुझको पहचान लिया है.ऐसे थे राजीव जी,ये थी उनकी सादगी और उनकी महानता.आज 20 अगस्त 2018 को उनके जन्मदिन के अवसर पर उनसे जुड़ी ये सारी यादें फिर ताजा हो उठीं और ऐसा लग रहा है कि जैसे आँखों के सामने उनका वही मुस्कुराता चेहरा,वही बादामी रंग का बन्द गले का जोधपुरी सूट पहने उनका करिश्माई व्यक्तित्व है जो अभी कल की जैसी बात की भांति सामने सहसा सजीव सा हो उठता है.आज उनके जन्म दिवस के अवसर पर उनको भावपूर्ण नमन!!
बोहोत ही शानदार लेख।
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteक्या अभी भी आप राजनीति में सक्रिय है ः क्रपया बताएं
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