Sindbad Travels-15

Sindbad Travels-15

England-3, London day 2
Tower Bridge,Tower of London & Crown Jewels

सिंदबाद ट्रैवल्स-15

इंग्लैंण्ड-3,लंदन दूसरा दिन
टॉवर ब्रिज, टॉवर ऑफ लंदन और क्राउन ज्वेल्स

यूथ हॉस्टल में मेरी नींद जल्दी खुल गयी और Common toilet & bathroom का उपयोग करके जल्दी ही तैयार हो गया।मैंने घर से लाये शकरपाड़े और मठरी का नाश्ता किया और अपने सैम्पिलों का पिटारा उठा कर निकल पड़ा उस दिन के appointment के लिए।जिनसे मैं मिलने जा रहा था उनका नाम और पते के अतिरिक्त मुझको उनके विषय में कुछ नहीं मालूम था।यूथ हॉस्टल से निकल कर मैंने सबसे पहले PCO से घर बात की और फिर underground tube पकड़ने चल दिया।लंदन सबसे पहली जगह थी जहाँ मैंने tube देखी थी।स्टेशनों पर स्वचालित सीढियाँ,टिकट डालने पर अपने आप खुल जाने वाले बैरियर और फिर टिकट भी यदि आगे का हो तो निकल आता था ये सब मेरे लिए उस समय एक चमत्कार से कम नहीं था।Escalators भी पचासों फिट जमीन के  नीचे सीधे चलते चले जाते देखना और उन पर खुद चलना एक विचित्र सी अनुभूति ही देते थे।खैर मैंने ट्यूब पकड़ी और थोड़ी देर में ही मैं अपने गंतव्य पर पहुँच गया था।

मैंने घंटी बजाई और दरवाजा लगभग 40-45 वर्ष के एक अच्छे व्यक्तित्व के स्वामी ने खोला।वही मिस्टर जेम्स सलीम (काल्पनिक नाम) थे जिनसे मुझे मिलना था।ये एक एशियाई व्यक्ति थे लेकिन बाल कुछ घुंघराले से थे और गाल कुछ भरे हुए,रंग गेंहुआ लालामी लिए हुए।उन्होंने बहुत गंभीर स्वर में मेरा स्वागत किया और अंदर ऑफिस में बैठाया।उनका ऑफिस अच्छा,सुंदर था,कोलोनियल किस्म के फर्नीचर से सजा हुआ।वो टेबिल के दूसरी तरफ बैठे थे लेकिन उनकी कुर्सी लकड़ी की एक सुंदर, मजबूत कुर्सी थी ना कि आधुनिक ऑफिसों जैसी घूमने वाली revolving chair.मिस्टर जेम्स सलीम को मैंने अपना परिचय देते हुए ब्रोशर दिया,विज़िटिंग कार्ड तो मिलते ही दे दिया था।ब्रोशर पढ़ने के बाद वो बोले कि आप जिन वस्तुओं को बेचते हैं उनमें तो हमारा इंटरेस्ट है ही लेकिन हम हिंदुस्तान से गेहूँ, चावल आदि चीज़ें भी लेना चाहते हैं और आपसे भी ले लेंगे यदि आप दे सकते हैं और दाम मुनासिब हों।मैंने उनसे कहा कि मैं तो चावल आदि में डील करता नहीं हूँ तो वो बोले उसकी आप चिंता मत करिए बस आप सप्लाई की व्यवस्था करिये और जितना आप सप्लाई कर सकें वो सारे का सारा हम खरीद लेंगे।मैंने अपने सामानों के विषय में बात करने की भरसक कोशिश की लेकिन उनका कहना था कि पहले ये चावल आदि दीजिए उसके बाद वो सब भी लेंगे।वो बोले कि पेमेंट की आप चिंता मत करो वो एडवांस भी दे देंगे और port of destination ऑर्डर फाइनल होते समय बताएंगे।करीब एक घंटे तक उनसे बात करके मैंने उनसे कहा कि ठीक है मैं इस विषय में आपको एक दो दिन मैं सोच कर बताता हूँ।वो बोले ठीक है मैं आपके जवाब का इंतज़ार करूंगा।उनसे विदा लेकर मैं यूथ हॉस्टल वापिस आया और वहाँ सैम्पिल आदि रख कर फिर निकल पड़ा लंदन घूमने।आज का कार्यक्रम लंदन ब्रिज,टॉवर ब्रिज,टॉवर ऑफ लंदन और टॉवर ऑफ लंदन में क्राउन ज्वेल्स देखने का था।

Underground Tube यानी कि लंदन की मेट्रो से Earl's Court station से मैं London Bridge station लगभग आधे घंटे में पहुंच गया।सबसे पहले मैं स्टेशन से निकल कर लंदन ब्रिज पर पहुंचा।लंदन शहर में टेम्स नदी को पार करने को कई पुल बनते रहे और समय समय पर लगभग सभी को लंदन ब्रिज कहा जाता था।ये लंदन ब्रिज एक सुंदर आधुनिक किस्म का पुल था जो 1973 में चालू  हुआ बताया।अब चूंकि इसका इतना नाम था तो मैंने उस पर थोड़ी चहल कदमी की और उसके ऊपर से टेम्स नदी को निहारा लेकिन सच कहूँ तो इस लंदन ब्रिज में मुझको इतना कुछ खास नहीं लगा हाँ बस उस पर खड़े खड़े मुझको

London Bridge is falling down,

falling down,falling down,

my fair lady

कविता जरूर याद आ रही थी।खैर अब मैं पैदल ही चल दिया Tower bridge की ओर।

लंदन ब्रिज से टावर ब्रिज की दूरी लगभग 1 से डेढ़ किलोमीटर रही होगी जो कि टेम्स नदी के किनारे चलते हुए मैंने लगभग 25-30 मिनट में तय की होगी।बड़ा मनोरम दृश्य था,अनगिनत सैलानी भी थे वहाँ और टेम्स नदी बड़ी सुंदर प्रतीत हो रही थी।मैंने एक कोका कोला का टिन लिया था और मजे से  उसका आनंद उठाते हुए टॉवर ब्रिज की तरफ बढ़ रहा था।टॉवर ब्रिज पहुँचने के पहले मेरा कोका कोला खत्म हो गया तो अपने बाँएं हाथ पर एक बड़े से पत्थर पर मैंने कोक का खाली टिन रख दिया।मैं खाली टिन रख कर शायद दो कदम भी नहीं बढ़ पाया था कि सामने से दूसरे हाथ पर आ रही एक वृद्ध अंग्रेज़ महिला मुझ पर चिल्ला पड़ीं।वो लगभग 68-70 वर्ष की महिला थीं पहले तो मेरी समझ में ही नहीं आया कि नीली स्कर्ट जैसी ड्रेस और उस पर हैट लगाए ये महिला मुझसे कुछ कह रहीं हैं किंतु अगले ही पल मेरी समझ में आ गया कि वो मुझको कोका कोला का खाली टिन पत्थर पर छोड़ देने के लिए डाँट रही थीं,मैं अपनी गलती पर बहुत शर्मिंदा हुआ और घबरा भी गया,मैंने उनसे क्षमा मांगते हुए तुरंत वो खाली कैन उठाया और उसको आगे चल कर एक डस्टबिन में डाला।मैंने तब भी सोचा और आज भी सोचता हूँ कि हमारा देश तभी स्वच्छ हो सकता है जब यहाँ के आम नागरिक में भी स्वच्छता के लिए इतनी चेतना, प्रतिबद्धता  और समर्पण हो।आज भी कभी कार आदि में चलते वक़्त यदि मैं गलती से शीशा खोल कर सड़क पर कुछ फेंकना चाहूँ तो मेरी बेटी ऐश्वर्या तुरंत मुझको टोकती है और तब मुझको लंदन की वो वृद्ध महिला खूब याद आती हैं।

अब मुझको सामने भव्य Tower bridge दिख रहा था।टॉवर ब्रिज टेम्स नदी पर बना एक अत्यंत विशाल पुल है जिसके दोनों किनारों पर एक एक tower बना हुआ है और दोनों टॉवरों के ऊपर के हिस्से जैसे बंधे हुए हैं।इस पुल की ऊँचाई लगभग 42 मीटर और लंबाई लगभग 244 मीटर है।इस पर जमीन के लेबल पर और लिफ्ट से जाने पर  4 मंजिल ऊपर दोनों टावरों के बीच भी पैदल आने जाने का रास्ता walk way बना हुआ है।इस पुल की खासियत ये है कि पानी के जहाज आने पर ये पुल दो भागों में ऊपर उठ जाता है और नीचे से पानी का जहाज आराम से निकल जाता है।इस पुल को उठाने में प्रयुक्त होने वाली सारी मशीनरी इन टॉवरों में लगी है और टिकट लेकर वहाँ जाकर  बड़े बड़े इंजन,व्हील्स आदि पुल उठाने वगैरह की तमाम व्यवस्थाएं देखने को मिलती है जो किसी को भी चमत्कृत करने को पर्याप्त हैं।बताते है कि इस टॉवर ब्रिज को बनाने में लगभग 11 हजार टन स्टील का इस्तेमाल हुआ था और ये ब्रिज उपयोग के लिए ईस्वी सन 1894 में खोला गया था।इस पुल पर ऊपर के हिस्से में चलते हुए आप लंदन का काफी हिस्सा देखने का आनंद  उठा सकते हैं।इस पुल को बनाने में प्रयुक्त हुई इंजीनियरी काबिले तारीफ है।लंदन जाने वालों को tower bridge a must see है और इसको अवश्य देखना चाहिए।


Tower bridge के सामने की फोटो अतुल चतुर्वेदी, ईस्वी सन 1991

टॉवर ब्रिज देख कर अब मैं टेम्स नदी के किनारे ही चलता हुआ लगभग 15-20 मिनट में Tower of London पहुँच गया और अंदर टिकट भी लिया।ये टेम्स नदी के किनारे बना हुआ इंग्लैंड का एक बड़ा ऐतिहासिक किला है जिसका निर्माण ईस्वी सन 1066 में प्रारंभ हुआ था।इसमें एक सफेद टावर की इमारत बनी हुयी है जिसको 1078 ईस्वी मैं William the conqurer नामक राजा ने बनवाया था  और इसी टॉवर के नाम पर इस किले का नाम Tower of London पड़ा।ये किला लंदन और इंग्लैंड के इतिहास के हर उतार चढ़ाव का गवाह रहा है।एक लंबे अरसे तक इस किले का उपयोग कैदियों को रखने और यातना देने के लिए भी हुआ था और ये प्राचीन और  मध्य युगीन काल में शासकों द्वारा विरोधियों और जनता पर किये गए अत्याचारों का गवाह बना।16 वीं और 17वीं सदी में कई हस्तियां यहाँ कैद रही और तब दुश्मनों को ठिकाने लगा देने के लिए लंदन में एक मुहावरा “sent to the tower” चल पड़ा था।

इस किले में 1540 से 1640 के बीच लोगों को बहुत अधिक प्रताड़ित किया गया था और उसके लिए किले के प्रांगण में  बाकायदा एक Tower Torture था।जिसमे जाने पर लोगों को प्रताड़ित करने के कई यंत्र लगे दिखते हैं जो उस समय लोगों को मृत्यु तुल्य कष्ट देने जैसा Torture करने के काम में आते थे।दरअसल यंत्रणा उपकरण और अन्य तरीके वहाँ प्रदर्शनी रूप में प्रदर्शित थे। वहाँ एक कीलों से भरी कुर्सी, जिसके हत्थों तक पर अनगिनत कीलें उल्टी करके लगी हुयी थीं यानी कि नुकीला हिस्सा ऊपर की ओर खुला हुआ था, देखी जिस पर कैदी को बैठाया जाता था जिस से उसके पूरे शरीर में कीलें घुस जाती थीं।The Racks नामक उपकरण था जिसमें कैदी के हाथ पैर बांध कर उनको अलग अलग दिशा में खींचा जाता था।इन यंत्रों को सामने देख कर एक क्षण को तो ये लगा कि खुदा न खास्ता ये अपने ऊपर बीतती तो…...सोच कर ही पूरे शरीर में सिहरन भरी एक ठंडी सी लहर दौड़ गयी।एक तरफ The Manacles था यानी कि हथकड़ियां।जी नही सादा हथकड़ियां नहीं अपितु हथकड़ियों में बांध कर ऊपर दीवार से लटका दिया जाता था और कभी कभी नीचे से खींचा भी जाता था।अधिकतर लोग जो भाग्यशाली थे वो तो इन यातनाओं से मृत्यु को ही प्राप्त हो जाते थे जो इतने भाग्यशाली नहीं थे उनको अन्य यातनाओं का भी सामना करना पड़ता था। Bloody Tower नाम से प्रसिद्ध इमारत में तो कई राजकुमारों को मौत  के घाट उतारा गया था।इन सारी चीजों को देख कर मन अजीब सी घृणा और जुगुप्सा से भर गया और ऐसा प्रतीत हुआ कि इस किले की दीवारों से चारों ओर से उन अभिशप्त पीड़ितों की चीख पुकार से मेरे कान के पर्दे फटे जा रहे हों।इस टॉवर के भूतों के किस्से भी प्रसिद्ध बताये गए जैसे कि बताया कि 1536 ईसवी में राजा हेनरी अष्टम की पत्नी रही Anne Boleyn का सर काट कर मौत के घाट उतार दिया गया था और कहते हैं कि आज भी White Tower में उसका भूत अपना कटा हुआ सर अपने हाथ में लेकर घूमता है हाँलांकि ये white tower “the most complete eleventh century palace in Europe “ के रूप में भी प्रसिद्ध है और ये किला UNESCO द्वारा घोषित एक World Heritage Site भी है।

वैसे Tower of London एक बहुत ही सुंदर बना हुआ किला है जिसके एक ओर टेम्स नदी बहती है और किनारे पर सफेद पत्थर की भव्य इमारत White Tower है।हमारे देश भारत में भी दिल्ली,आगरा,इलाहाबाद आदि क़िले यमुना नदी के किनारे ही बने हुए हैं वो मुझको याद आ गए.Tower of London में पैदल चलने का पथ बहुत अच्छा पत्थरों का बना हुआ है और चारों ओर खूब हरियाली है।यहाँ लंदन और इंग्लैंड के निर्माण शिल्प के और अंग्रेजों की स्थापत्य कला के 1000 साल के इतिहास और विकास के भी दर्शन होते हैं।इस किले की मिल्कियत राजशाही की होने के कारण वर्तमान में इसकी मालकिन इंग्लैंड की महारानी हैं।प्राचीन काल से राजा/रानी की अनुपस्थिति में इस किले का इंचार्ज Constable of Tower होता है।और हाँ इन सबके और भूतों के अतिरिक्त इस किले के प्रांगण में यहाँ के एक और स्थायी निवासी भी दिखे और वो थे काले काले कव्वे।हरियाली भरे प्रांगण में मुझको बिल्कुल चमकते हुए काले रंग के कौए खूब मजे से चहलकदमी सी करते हुए दिखे।वहीं पर मौजूद इंग्लैंड के गार्डों की लाल वर्दी पहने एक गार्ड ने मुझको बताया कि ये कौए इस किले के स्थायी निवासी हैं और वहाँ की मान्यता ये है कि “If birds leave the tower the kingdom will fall” so wings of these birds are clipped मतलब कि यदि ये पक्षी क़िला छोड़ देंगे तो इंग्लैण्ड का राज्य ढह जाएगा इसलिए इनके पंख क़तर दिए गए थे ताकि वो उड़ ना सकें और उनको खिलाने के लिए बाक़ायदा कर्मचारी भी नियुक्त थे.मुझको भारतीय पौराणिक मान्यताओं से भी ये सही लगा कि जिस स्थान पर इतने लोग मृत्यु को प्राप्त हुए हों तो आखिर उन की आत्माओं तक भोजन पहुँचाने को भी इन कौओं का वहाँ रहना उचित ही था।

इस क़िले से जैसा मैंने बताया की इंग्लैण्ड की राजशाही के विभिन्न दौरों का इतिहास जुड़ा हुआ है.इस क़िले में इंग्लैण्ड के राजा रहे हेनरी अष्टम की कहानी भी सुनी जिन्होंने 1509 से 1547 राज्य किया.अपनी पत्नी Catherine of Aragaon को तलाक़ देने के मसले पर उनकी तत्कालीन पोप से खटक गयी और उन्होंने इंग्लैण्ड को Catholic धर्म से Protestant धर्म का अनुयायी घोषित कर दिया।बाद में महारानी एलिजाबेथ 1 ने प्रोटोस्टेंट धर्म को खूब बढ़ावा दिया और खुद को चर्च का गवर्नर घोषित कर दिया।ये बातें सुन कर मुझको उसी समय काल में भारत में बादशाह अकबर के दीन-इलाही धर्म की बातों की याद आ गयी।शायद उस समय के सर्वशक्तिमान राजा अपने,अपनी जनता के और ईश्वर के बीच में किसी और की सत्ता नहीं चाहते थे इसलिए वो सब जैसे एक किस्म के प्लान के तहत ही कार्य कर रहे थे चाहे इलाके अलग अलग थे।मुझको यहाँ रानी मैरी के विषय में भी जानकारी मिली जिसकी क्रूरता ने उसको Bloody Marry का नाम भी प्रदान कर दिया था।इस प्रकार के किस्सों से ये धारणा प्रबल हुई कि स्वेच्छाचारी राजशाही सत्ता के नियम और सोच लगभग एक जैसे ही होते हैं उनके स्थान,देश,काल कोई भी हो।

Tower of London का यह किला काफी समय तक अंग्रेज़ शासकों के रहने के स्थल के अलावा उनके अस्त्रागार,ट्रेज़री, टकसाल,और Crown Jewels of England के रखने की जगह भी रहा है।इसी किले के प्रांगण में एक तरफ की इमारत में शाही जेवरात Crown Jewels  रखे हुए प्रदर्शित थे. इसमें अंग्रेज़ शासकों को उपहार में मिले सामान,उनके राज्यारोहण और उत्सवों में पहने जाने वाले मुकुट,आभूषण, Regalia और अंग्रेजों द्वारा लूटे गए तमाम जेवरात भी मौजूद थे।उस समय वहाँ अंदर कक्ष में जाकर फोटो खींचने की इजाज़त नहीं थी।इंग्लैंड के राजा रहे हेनरी तृतीय के समय (1216-1272) से ये रत्नादिभूषण Tower of London में रखने की प्रथा है हाँलांकि वहाँ प्रदर्शित अधिकांश जवाहरात आदि लगभग 350 साल पुराने राजा चार्ल्स द्वितीय के समय से ही हैं उसके पहले के या तो चोरी हो गए या गला दिए गए काफी कुछ तो ओलिवर क्रॉमवेल,जो एक रिपब्लिकन था (उस समय इंग्लैंड में रिपब्लिकन भी होते थे), ने बिकवा और गलवा दिए थे जब उसने English civil war 1649 के दौरान राजशाही का तख्ता पलट कर दिया था ।ये जानकर मुझको हँसी भी आयी और अपने यहाँ की कहावत “चोर के घर मोर” भी याद आयी।

यहाँ जो जवाहरात देखने को मिले उनमें 530 कैरट का विश्व का सबसे बड़ा हीरा clear cut diamond Cullinan,  दूसरा प्रसिद्ध हीरा Cullinan1, विश्व प्रसिद्ध नीलम Stuart Sapphire, और St.Edward’s Sapphire,काले राजकुमार का लाल माणिक्य यानी कि Ruby और हमारे देश का प्रसिद्ध हीरा कोहिनूर भी था।मुकुट में जड़ा कोहिनूर चमक रहा था और मैं उसको बहुत देर तक निहारता रहा और जितना उसको देखता उतनी टीस हृदय में उठती और बहुत ही दुःख और बेबसी सी भी महसूस हुयी।मैं वहाँ खड़ा बहुत देर यही सोचता रहा कि ये अंग्रेज़ भी अजब कौम हैं एक तरफ अपने अत्याचार के किस्सों का भी म्यूज़ियम खोल रखा है तो दूसरी ओर सारी दुनिया से लूटा हुआ माल भी जोर शोर से प्रदर्शित कर रहे हैं।वहाँ के जवाहरातों को देखते हुए मुझको हैदराबाद के निजाम की आभूषणों की प्रदर्शनी हैदराबाद में देखी थी वो याद आ गयी और उनका प्रसिद्ध Jacob Diamond भी याद आ गया जो कि विश्व का पाँचवाँ  सबसे बड़ा 184 कैरट के लगभग का हीरा है और जो आखिरी निज़ाम हैदराबाद उस्मान अली खान के पिता जी के जूते के अंदर पड़ा मिला था जो कि कई साल से खोया हुआ था ।ये मिला तो लंबे अरसे तक खोये रहने के बाद और फिर  खुद निज़ाम ने भी उसका उपयोग मेज पर रखे पेपरवेट के रूप में काफी समय तक किया था।

इस पूरे किले को घूमने में  मुझको लगभग तीन-चार घंटे लग गए लेकिन ये एक बहुत बड़ा अनुभव रहा।एक ओर अंग्रेज़ो के इतिहास से मानो साक्षात्कार हुआ तो दूसरी तरफ ये भी अहसास हुआ कि मनुष्य कितना क्रूर भी हो सकता है।मन में उन असंख्य और अनाम लोगों के प्रति पीड़ा की भी अनुभूति हुई जिन पर यहाँ अत्याचार हुए होंगे और जिन्होंने यहाँ अपने प्राण त्यागे तो दूसरी ओर उन पंख कटे से कौओं के प्रति मन में दयाभाव भी उमड़ा साथ ही बड़ा आश्चर्य भी हुआ इस बात पर कि दुनिया में सबसे विकसित कौमों में से एक मानी जानेवाली ये अंग्रेज़ कौम इतनी अंधविश्वासी भी है।उनकी क्रूरता की कहानियाँ बयान करते Torture Tower को देख कर मैं ये सोचने लगा कि इस बात को उनका अहंकार कहें या ईमानदारी कि इन अंग्रेजों को अपने इतिहास के काले पन्नों को भी प्रदर्शित करने में कोई संकोच नहीं था।

हाँ उनकी क्रूरता के प्रमाण देख कर पीड़ा तो बहुत हुई लेकिन ताज्जुब नहीं क्योंकि अंग्रेजों के इस पहलू को एक भारतीय और इतिहास का विद्यार्थी रहा  होने के नाते मैं भली भाँति जानता था।शाम होते होते मैं बहुत थक चुका था क्योंकि आज बहुत पैदल चला था इसलिए अब मैं  चल दिया था वापिस अपने ठहरने के स्थान यूथ हॉस्टल की ओर।अब अगले दिन के कार्यक्रमों में एक प्रमुख कार्यक्रम मैडम तुसाद का वैक्स म्यूज़ियम देखने का था।

Comments

  1. So good Atul, really you write well, your depiction is much true to the heart and simple.
    I loved reading all your three memoires.... Waiting for next one eagerly
    Really..!!
    💐💐👌👌👍👍

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  2. Thanks,Anand!!
    I am happy that you liked these.

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