श्री जे0एन0चतुर्वेदी का निधन:एक युग का अंत
परसों 12 मार्च 2018 को अत्यन्त दुःखद समाचार मिला कि श्री जयेंद्र नाथ चतुर्वेदी जी का वाराणसी में देहावसान हो गया।
स्व0 श्री जे0एन0चतुर्वेदी जी आगरा जिले के होलीपुरा के अत्यंत प्रतिष्ठित चतुर्वेदी परिवार के स्व0 श्री रूपकिशोर जी के पुत्र थे।
श्री जे0एन0चतुर्वेदी जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की थी और वो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल हॉस्टल के अंतःवासी (inmate) रहे थे।वे 1951 बैच के भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के अफसर थे।उनका नाम भारतीय पुलिस सेवा के अत्यन्त सम्मानित अधिकारियों में लिया जाता है।यदि उनको कार्यकुशलता,दक्षता,सादगी,गरिमा और ईमानदारी का पर्याय कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी।ये उनकी कार्यकुशलता और ईमानदारी की छवि का ही परिणाम था कि जब दिल्ली में पुलिस कमिश्नर प्रथा शुरू हुई तो वे दिल्ली के पहले पुलिस कमिश्नर नियुक्त किये गए।उनका दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के रुप में कार्यकाल जुलाई 1978 से जनवरी 1980 तक का रहा था लेकिन इतने सालों बाद भी बताते हैं दिल्ली पुलिस में उनको एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है।
स्व0श्री जे0एन0चतुर्वेदी जी 1 अप्रेल 1984 से 17 सितंबर 1985 तक उत्तर प्रदेश पुलिस के महानिदेशक पद पर रहे और उनकी ईमानदारी और कर्मठता को लोग आज तक याद करते हैं।यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश के इतिहास में वो पहले IPS अधिकारी थे जिनकी उत्तर प्रदेश पब्लिक सर्विस कमीशन (उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग)के चेयरमैन के रूप में नियुक्ति हुयी और वहाँ भी उनकी ईमानदारी,कार्यकुशलता और दक्षता को लोग याद करते हैं।यदि ये कहा जाए कि उनके देहांत के साथ एक युग का अंत हो गया तो गलत नहीं होगा।
स्व0श्री जयेंद्र नाथ चतुर्वेदी जी और मेरे पिताजी श्री अशोक चतुर्वेदी जी के बहुत निकट के और घनिष्ट सम्बन्ध रहे।हमारी मनोरमा बुआ के पति स्व0रवीन्द्र नाथ जी फूफाजी और जयेंद्र नाथ जी चचेरे भाई थे और सरोज बुआ और जे0एन0फूफाजी से पापा के सदैव बहन और जीजाजी वाले ही सम्बन्ध रहे।मुझको याद है जब वो नैनीताल में डी आई जी के पद पर थे तब हम लोग उनके घर गए थे।फिर वो चाहे दिल्ली रहे हों,लखनऊ रहे हों अथवा इलाहाबाद मेरा भी उनसे अक्सर मिलना होता रहा और उनके व्यक्तित्व से मैं बहुत प्रभावित था।इतने बड़े और कड़े अधिकारी होने के बावजूद घर पर उनका हम लोगों से खूब बातें करना,और कई बार उनकी हास-परिहासयुक्त (witty) बातें उनकी विद्वता और सादगी का परिचय देती थीं।सेवा से अवकाश प्राप्त करने के बाद वो और बुआ देहरादून रहने लगे थे और जाड़े के मौसम में वो लोग अपने पुत्र के पास अहमदाबाद चले जाते थे।किसी काम से जब भी मेरा देहरादून जाना हुआ तो उनका आशीर्वाद लेने मैं उनके पास अवश्य जाता था।उनकी पुत्री श्रीमती शुचिता(जिनके पति श्री रंजन द्विवेदी जी IPS-retd. हैं) पंजाब नेशनल बैंक में कार्यरत हैं और पुत्र श्री शशांक अहमदाबाद में वैज्ञानिक हैं।
इस समय जब मैं सोच रहा हूँ तो याद आ रहा है उनका अत्यन्त सादगी से भरा किन्तु उतना ही प्रभावशाली व्यक्तित्व,उनका मुस्कुराता चेहरा और साथ ही साथ उनसे संबंधित बहुत सी बातें भी याद आ रही हैं जैसे लखनऊ में जब वो पुलिस महानिरीक्षक के पद पर पोस्टेड थे तो मैं एक बार उनके घर मिलने गया।उस समय मैं लखनऊ में ही पढ़ता था।रात हो चली थी और जब मैं चलने को हुआ तो फूफाजी ने मुझसे पूछा कि कैसे जाओगे,जब मैंने बताया कि मैं तो रिक्शे से आया था तो वो और बुआ अपनी प्राइवेट कार को खुद चलाकर मुझको छोड़ कर आये थे।
स्व0श्री जयेंद्र नाथ चतुर्वेदी न सिर्फ भारतीय पुलिस सेवा के अपितु वो हमारे श्री माथुर चतुर्वेदी समाज के भी एक गौरवशाली दैदीप्यमान नक्षत्र थे और उनके निधन से समाज की एक अपूर्णनीय क्षति हुई है।ईश्वर से प्रार्थना है कि उनकी दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके समस्त परिजनों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
सादर नमन!!!
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