श्री रामनवमी की बधाई

भये प्रगट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी,
हर्षित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी।
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सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होई बालक सुरभूपा.

आज बात भगवान अथवा राजा-राजकुमार की नहीं अपितु उस बालक की बात है जो जब खेलते थे,रोते थे तो सभी माता पिता की भांति उनके भी माता पिता हर्षित और प्रफुल्लित होते थे।बात उस शिष्य की है जो किशोरावस्था में ही एक साधारण मनुष्य की भांति अपने गुरु विश्वामित्र के साथ जंगलों में जाकर एक तरफ शिक्षा प्राप्त कर रहे थे तो दूसरी तरफ सात्विक कर्मों,यज्ञों आदि में विघ्न डालने वाले राक्षसों का संहार भी कर रहे थे।बात उस राजकुमार की है जिन्होंने राजा जनक के यहाँ आयोजित स्वयम्वर में कठिन प्रतियोगिता में भाग लेकर, शिवजी का दैवीय धनुष तोड़ कर,न सिर्फ मिथिलानरेश पुत्री राजकुमारी सीता से विवाह रचाया अपितु सारे विश्व को अपने भुजबल कौशल से परिचित कराया।
आज उस एक साधारण व्यक्ति की बात है जो नंगे पाँव बियावान जंगल में अपने छोटे भाई और अपनी पत्नी के साथ निकल पड़ा था अपने पिता के वचन के मान के लिए।बात उस साधारण मनुष्य की है जो जंगली जानवरों से भरे भयंकर जंगल में अपनी पत्नी और भाई के साथ बिना किसी साधन के दिन और रात आगे ही बढ़ता चला गया।आज हमारे उस माहापुरुष की बात है जिसने उस काल में राजकुमार होने के बावजूद साधारण आदिवासी महिला शबरी के जूठे बेर स्वाद से खाये।
बात उस व्यक्ति की है जिसकी पत्नी को भी जंगल से उस समय के संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति,सबसे साधन संपन्न व्यक्ति जिसके पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना भी थी,वो हर ले गया।बात उसी साधारण व्यक्ति की है जिसने अपने व्यवहार और आचरण के बल पर सुग्रीव और हनुमान से मैत्री सम्बन्ध स्थापित किया।बात उस दो हाथ और दो पैर वाले साधारण व्यक्ति के असाधारण व्यक्तित्व की है जिसके लिए वानर और भालुओं की सेना बिना किसी लालच,पारिश्रमिक और पारितोषिक के अपनी जान पर खेलने को तत्पर हो गयी।आज बात उस साधारण व्यक्ति के अद्भुत राजनैतिक मर्यादित कौशल की है कि संसार के सबसे ताकतवर व्यक्ति का भाई भी सहायता को उपलब्ध हो गया।बात उस साधारण व्यक्ति के असाधारण रणकौशल की है जिसने  उस समय के संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति को,जो कि अनाचार में लिप्त और मद में चूर था,धूल चटा दी उसका संहार कर दिया।ये उस साधारण मानव के असाधारण, मर्यादित,सत्य और शील के गुण ही थे जिन्होंने उनको भगवान श्री रामचंद्र के रूप में स्थापित किया।भगवान् श्री रामचंद्र किसी एक व्यक्ति,एक दल,अथवा किसी एक विचारधारा के नहीं हैं अपितु हम उनका स्मरण इसलिए करते हैं कि उन्होंने कमजोरों,असुरों से पीड़ित लोगों और स्त्री के सम्मान की रक्षा के लिए दुनिया के सबसे ताकतवर व्यक्ति से ना सिर्फ टक्कर ली अपितु उसका विनाश किया।उन्होंने उस समय दक्षिण भारत में प्रचिलित शैव धर्म का भी पूरा सम्मान किया अर्थात कह सकते हैं कि तत्कालीन परिस्थितियों में सर्वधर्म समभाव रखा।देश का मान बढ़ाया,मानवता का मान बढ़ाया,गुरु की सेवा की,पिता के वचन का मान रखा।सही अर्थों में मानव धर्म और राजधर्म का निर्वहन किया।ये उनके गुण ही थे जिन्होंने उनको एक साधारण मानव से असाधारण व्यक्तिव के रूप में स्थापित किया।आइये आज श्री रामनवमी के दिन राजा रामचंद्र के सद्गुणों से प्रेरणा लें और ये संकल्प लें कि समाज में बुराई के रूप में जो रावण व्याप्त हैं उनकी समाप्ति में अपना योगदान देंगे,सर्वधर्म समभाव रखेंगे और सामाजिक समरसता और देश की एकता को आघात पहुंचाने वाले  आधुनिक रावणों को किसी भी हालत में सफल नहीं होने देंगे।

चैत्र मास की नवमी अर्थात रामनवमी को आप सभी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचन्द्र के जन्मदिन पर बधाई एवं शुभकामनाएं।

सियावर रामचंद्र की जय!

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