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Showing posts from January, 2019

Mehrauli Archeological Park:-Rajon Ki Baoli मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क:-राजों की बावली

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Mehrauli Archeological Park:- Rajon Ki Baoli   मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क:- राजों की बाउली या बावली/बावड़ी/बैन/बाव जैसा मैं पहले लिख चुका हूँ कि मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में बलबन का मकबरा,जमाली कमाली की मस्जिद मैं देख चुका था लेकिन वहाँ चारों तरफ अलग अलग किस्म के इमारतों के अवशेष अथवा इमारतें और माहौल ऐसा था कि मन हो रहा था कि इस हरियाली भरे जंगल नुमा इलाके में और भी देखा जाए कि इतिहास के कौन कौन से जाने-अनजाने पृष्ठ इधर-उधर बिखरे हुए हैं।सही बात यह भी थी कि मुझको खुद भी पूरा ठीक से मालूम नहीं था कि इस परिसर में हमारे देश के पुरातत्व विभाग ने कौन-कौन से ऐतिहासिक खजाने सहेज कर रखे हुए हैं.जमाली-कमाली मस्जिद के पास खड़ी अपनी कार मैंने स्टार्ट की और उस परिसर में और आगे की ओर बढ़ चला.रास्ते में लाल बलुआ पत्थर के ‘स्थान और दिशा सूचक’ चिन्ह थे जिन पर काले रंग से ‘कुली खाँ का मकबरा’ और ‘राजों की बावली’ लिखा हुआ था. इस स्थान पर आने के पहले मेरी जानकारी बावड़ियों के विषय में बहुत ही कम थी और सच कहूँ तो शाहरुख खान और रानी मुखर्जी अभिनीत एक फ़िल्म आयी थी ‘पहेली’ तो मैंने इस से पहले बावड़ी ...

आगरा का कैलाश मंदिर

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आगरा का कैलाश मन्दिर! आगरा-मथुरा-दिल्ली रोड पर सिकन्दरा से थोड़ा आगे बढ़ने पर और मरियम के मकबरे के ठीक सामने के रास्ते से कुछ किलोमीटर अंदर जाने पर यमुना के किनारे यह अति प्राचीन,अति मनोरम,सिद्ध स्थल है! कहा जाता है कि इसकी स्थापना सदियों पूर्व (मान्यता के अनुसार लगभग 15 हजार वर्ष पूर्व??!!!)भगवान परशुराम जी के पिता महर्षि जमदग्नि ने की थी और यही एक ऐसा स्थल है जहाँ एक साथ दो-दो शिवलिंग विराजमान हैं! यहाँ के वर्तमान कार्य देख रहे महंत श्री गौरव गिरि जी से मुलाकात हुयी. उनके साथ चाय का प्रसाद लिया और इसी दौरान उन्होंने बताया कि ईस्वी सन 1264 से उनके परिवार के लोग ही इस मंदिर के महंत रहे हैं और वर्तमान में यह उस परंपरा की 20वीं पीढ़ी है! मेरा इस स्थान पर कई दशकों से दर्शन करने हेतु जाना रहा है.1980 के दशक में मैं सावन के महीने में सोमवार को अपनी माँ के साथ और अपनी शादी के बाद मैं,मम्मी और मेरी पत्नी हम सब दर्शन  हेतु जाते थे (तब कार मन्दिर तक चली जाती थी,अब तो श्रावण मास में इतवार दोपहर से ही फ़िरोज़ाबाद से आगरा ही जाने में दिक्कत हो जाती है,भीड़ के कारण,मन्दिर तक तो कार जाने का सवाल...

प्रवासी दिवस:प्रवासी भारतीय और पद्मभूषण दादाजी पण्डित बनारसी दास चतुर्वेदी

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प्रवासी भारतीय दिवस के अवसर पर:- पद्मभूषण दादाजी पण्डित बनारसीदास चतुर्वेदी और प्रवासी भारतीय पद्मभूषण दादाजी बनारसी दास चतुर्वेदी जी एक प्रसिद्ध साहित्यकार,पत्रकार...

एक्सप्रेस वे और दुर्घटनाएं

जो सड़क पर चलते हैं या जिनके घरवाले या परिचित सड़क पर चलते/यात्रा करते हैं,उन सबके ध्यानाकर्षण हेतु:- यमुना एक्सप्रेस वे पर आज दिनांक 2 जनवरी 2019 को हुई एक दुर्घटना के विषय में:- आज य...