एक्सप्रेस वे और दुर्घटनाएं

जो सड़क पर चलते हैं या जिनके घरवाले या परिचित सड़क पर चलते/यात्रा करते हैं,उन सबके ध्यानाकर्षण हेतु:-

यमुना एक्सप्रेस वे पर आज दिनांक 2 जनवरी 2019 को हुई एक दुर्घटना के विषय में:-

आज यमुना एक्सप्रेस वे पर एक ऐसी दुर्घटना देखी है कि दिल दहल गया.अभी अभी दिल्ली से वापिस आया हूँ,रात के बारह बज रहे हैं लेकिन उस दुर्घटना का मन पर इतना गहरा असर हुआ है कि उसके विषय में लिखने से अपने को रोक नहीं पा रहा हूँ.

आज दिन में एक व्यापारिक काम से मेरा अपने मित्र फ़िरोज़ाबाद के श्री प्रवीन जैन के साथ दिल्ली जाना हुआ.कार प्रवीन जी का भतीजा यश चला रहा था और बहुत अच्छी तरह से  सावधानी से चला रहा था.हम लोग यमुना एक्सप्रेस वे के आगरा की तरफ से दिल्ली जाने वाले रास्ते पर मथुरा वाला दूसरा टोल पार कर चुके थे और हमारी गाड़ी लगभग 75-80 किमी प्रति घंटा की रफ्तार पर थी कि अचानक यश जो कि हमारी गाड़ी चला रहा था उसने सामने की तरफ इशारा किया और कुछ कहा.हम क्या देखते हैं कि काफी तेज स्पीड पर एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी तेजी से दाहिने हाथ के डिवाइडर से जा टकराई,उस पर थोड़ा सा चढ़ी,फिर वापिस सड़क पर आयी और बहुत ही तेजी से बेकाबू हाल में बाएं हाथ पर चलती चली गयी और सड़क की तीनों लेनों को पार करते हुए बाएं हाथ की रेलिंग से टकराई और टक्कर इतनी जोर की थी कि फिर कई पल्टी मारती हुयी कलाबाजियां सी खाती वापिस सड़क पर एक तरफ पलट कर रुक गयी.जब गाड़ी रेलिंग से टकरायी और पल्टी खाती हुयी आयी तो उसमें से कुछ माँस के लोथड़े, चिथड़े और आदमी बाहर उड़ते हुए गिरते से दिखे.हम लोगों की कार उस गाड़ी के पीछे ही थी और यदि हमारी गाड़ी नियंत्रित स्पीड पर और एक होशियार चालक के हाथ में नहीं होती तो होता यह कि हम लोग भी उस गाड़ी की चपेट में आ ही जाते क्योंकि यह सारी घटना महज कुछ सैकंडों में ही हो गयी थी;लिखने में बहुत वक़्त लग रहा है पर घटना क्षणों की थी.

हम लोगों ने एक साइड में लेकर तुरंत अपनी कार रोकी और उतरे तब तक और गाडियां भी रुकना शुरू हो गयी थीं.वहाँ का आलम यह था कि रेलिंग के पार कंटीले तारों के नीचे एक शरीर पड़ा था जिसके सर का पता नहीं था बस वहाँ लाल माँस के टुकड़े से थे,गाड़ी और रेलिंग के बीच दूसरा प्राणहीन शरीर पड़ा था जिसका आधा सर कुचला सा हो गया था.गाड़ी के शीशे आदि टूट चुके थे और अंदर से सवारियों के चीखने पुकारने की आवाज़ें आ रही थीं.वहाँ इकट्ठा अन्य लोगों की मदद से पहले हम लोगों ने गाड़ी सीधी करने का प्रयास किया किन्तु वह सम्भव नहीं हुआ.फिर हम लोगों ने और प्रवीन जैन ने खुद सबसे आगे बढ़ कर गाड़ी में से पीछे के टूटे शीशे से एक लड़के को जिसकी उम्र 18-20 साल रही होगी उसको खींच कर बाहर निकाला,उसका सर फटा हुआ था लेकिन होश से में था.इसके बाद अन्य लोगों ने अंदर से धीरे-धीरे 4 और सवारियों को बाहर निकाला जिनमें एक को बहुत चोट आई थी,एक महिला भी थीं जो गहरे शॉक से में थीं.

इस बीच यश यमुना एक्सप्रेस वे की हेल्प लाइन के नम्बर को बार बार मिलाता रहा किन्तु वो नम्बर बार बार घण्टी जाने पर भी उठा नहीं फिर यश पर एक्सप्रेस वे के CPRO का नम्बर था तो उस नम्बर पर सूचना दी जा सकी.इस बीच वहाँ बहुत लोग इकट्ठे हो गए थे और सबने मदद का प्रयास किया,एक ने लड़के से जो थोड़ा होश में था उसके फोन से मिलवा कर उनके दिल्ली स्थित परिचित को सूचना भी दी. उस लड़के ने ही बताया कि वो लोग मथुरा से दिल्ली जा रहे थे,उसके पिता का नाम जसवंत है और वो भी उसी गाड़ी की सवारियों में थे.20-25 मिनट के बाद एक्सप्रेस वे की एक बोलेरो जैसी गाड़ी आयी जिसमें दो घायल अस्पताल को गए जिनमें एक महिला घायल थीं.ऐम्बुलेंस आने में और समय लगा और पुलिस उसके भी बाद…..

कुछ लोग अपने फोनों से लोगों की फोटो ले रहे थे किंतु सच मानिए वो दृश्य इतना बीभत्स था कि उसकी फोटो खींचने की न मेरी हिम्मत थी और न उसको पोस्ट करना ही उचित था…..

अखबारों में तो यमुना एक्सप्रेस वे और आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे पर होने वाली दुर्घटनाओं के विषय में तो लगभग रोज पढ़ते हैं किंतु इस भयावह दुर्घटना को अपनी आंखों के सामने होते देखा और खुद बाल-बाल बचे तो इससे कुछ सवाल और चिन्ताएं मन में उठीं तो यह लिखने को विवश हुआ हूँ:-

1.सरकार ने जब इतनी अच्छी सड़के बनवाना शुरू किया है तो गाड़ी चलाने वालों को सुरक्षा की वास्तविक सही ट्रेनिंग देने  के कोई पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किये हैं?

2.वाहन चालकों को भंडारे के प्रसाद की तरह लाइसेंस बिना उचित ट्रेनिंग के क्यों बांटे जाते हैं?कृपया ये मत कहिएगा कि लाइसेंस देने की प्रक्रिया है क्योंकि सच सबको मालूम है…

3.सड़कों पर इतनी मौतों के बाद भी स्पीड लिमिट का कड़ाई से पालन क्यों नहीं होता है?टॉल के बैरियर बनने के बाद और सी सी टीवी कैमरों के बाद तो बैरियर पर ही चालान की रसीद थमाना सम्भव है फिर ऐसा क्यों नहीं होता है?मैंने खुद न जाने कितनी गाड़ियों को बहुत तेज हो सकता है 150-160 तक की स्पीड पर एक्सप्रेस वे पर गाड़ी उड़ाते देखा है…..और ऐसा करने वालों में सरकारी अधिकारियों,मंत्रियों और नेताओं की गाड़ियां प्रमुख स्थान रखती हैं.

4.सरकार ने और ट्रांसपोर्ट विभाग ने क्या कभी इस बात पर ध्यान दिया है कि जैसी सड़कें बनने लगी हैं,क्या हमारे देश की गाड़ियों के टायर भी उसी क्वालिटी के बनते हैं?

5.मेरा मानना है कि इसमें एक तरफ तो लोगों में इस विषय में जागरूकता लाने को और सघन एवं सक्रिय अभियान चलाने की जरूरत है और दूसरी तरफ बहुत ही अधिक कड़ाई से बिना किसी को बख्शे ट्रैफिक के नियमों के पालन की की जरूरत है.

6.मुझको ऐसा लगा कि गाड़ी के एयर बैग खुले नहीं थे और पक्का तो नहीं कह सकता लेकिन शायद लोग सीट बेल्ट भी नहीं बांधे हुए थे….

7.जो मोबाइल फोन थे वो पास वर्ड से लॉक्ड थे वो तो घायलों में जिस बच्चे को होश था उसके फोन का उस से लॉक खुलवाया गया तब उनके परिचित को सूचना दिल्ली की जा सकी….ऐसी विषम परिस्थिति में इमरजेंसी में लॉक फोन से कोई किसको सूचित कैसे करे इस विषय में मोबाइल बनाने वाली कम्पनियों को कुछ उपाय सोचना चाहिए और यदि ऐसी सुविधा उपलब्ध है तो उसको बेहतर तरीके से प्रचारित करना चाहिए.

जो लोग भी सड़क पर किसी भी वाहन से चलते हैं उन सबसे मेरा अनुरोध है कि कृपया ट्रैफिक के नियमों का पालन करिये,बहुत तेज मत चलिए,गाड़ी का रख-रखाव ठीक रखिये;आज जो एक्सीडेंट मैंने देखा वो बहुत ही भयंकर था,ये किसी के भी साथ हो सकता है,आज वो लोग थे गाड़ी में उनका हुआ लेकिन ईश्वर न करे ये आप या हम भी हो सकते थे…….

नोट:-यदि आप भी इस चिंता से सहमत हैं तो अपने आस पास के लोगों से कहिए कि
सावधानी से चलिए,सुरक्षित अपने गंतव्य पर पहुँचिए.

और उचित समझें तो इस संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाइये

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