बुरा ना मानो होली है
#बुरा_ना_मानो_होली_है
इन दिनों पूरे ब्रज क्षेत्र में होली का माहौल और खुमार रहता है पर इस बार तो लगता है न सिर्फ पूरे देश में बल्कि पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में भी होली की रंग-तरंग की धूम है शायद सारे कुओं और नदियों में भांग पड़ गयी है या शायद समंदर में भी...
होली मतलब हँसी, ठिठोली,भांग की तरंग और nothing serious.
ब्रज क्षेत्र में तो भंग की तरंग का ऐसा जोर है कि जो छाने वो ताने , जो न छाने वो भी न जाने और ना ही माने.
खुमार तो मुझ पर भी छा रहा है,इतिहास का विद्यार्थी हूँ और इतिहास ही गड्ड-मड्ड हुआ जा रहा है.
हांलांकि इस होली के माहौल में ये भी बता दूँ कि मैंने गोविंदा की एक फ़िल्म देखी थी,"क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता" तो देखिए मैं भी झूठ नहीं बोलता लेकिन आज अगर कुछ इधर का उधर हो जाये तो बस यही कहूँगा कि ,"बुरा न मानो होली है".
ये तो हम सब ही जानते हैं कि होली हमारा सदियों पुराना त्योहार है और जब भगवान श्री कृष्ण ने पूतना का वध किया था तबसे होली मनाने की प्रथा शुरू हुयी यह ऐतिहासिक तथ्य हम सभी जानते हैं.बात जब इतिहास और होली की हो रही है तो लगे हाथ ये भी बता दूँ कि होली के समय मध्यकाल में बादशाह अकबर पूरे दल बल के साथ फतेहपुर सीकरी/आगरा से अनारकली को चिनवाने के बाद मुम्बई जाकर आर०के० स्टूडियो में होली खेलते थे और उनके साहबजादे की तो ये होली बहुत ही प्रसिद्ध थी.
ये भी सत्य है कि बाद में शहजादे शेखू ने तो फ़िल्म 'आन' में होली के गाने "खेलो रंग हमारे संग" से एक नया ट्रेंड ही शुरू कर दिया.
इतिहास की बात करते ही कक्का बिसम्मा राका याद आये जो 1857 में बिठूर में थे और वहीं से वो प्रशा गए,जहाँ जाकर उन्होंने जर्मनी का एकीकरण किया,फिर वहाँ उनका नाम उच्चारण फर्क के कारण कुछ बिस्मार्क जैसा पुकारा जाने लगा.देखिए होली हो या भंग की तरंग मैं इतिहास का विद्यार्थी रहा हूँ और गोविंदा की फ़िल्म,"क्योंकि ….." का फैन हूँ तो बात तो इतिहास की ही ज्यादा करूंगा और वो भी असली देसी घी जैसी सच्ची.
ये तो हम सबको पता ही है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद जब नेपोलियन भारत आया तो उसने भी यहाँ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी थी जबकि सिकन्दर और सिल्यूकस उस लड़ाई में शामिल नहीं हुए थे.जब लड़ाई की ही बात छिड़ गई तो जब बांग्लादेश को स्वतंत्र कराने के युद्ध में जूलियस-सीजर,न्यूटन और जॉर्ज वाशिंगटन मुक्ति वाहिनी के साथ लड़ रहे थे और जनरल नियाजी से आत्म समर्पण करवा रहे थे तो शायद उस समय जनरल अरोड़ा और जनरल मानेकशॉ गोल्फ खेल रहे थे.इस समय माहौल में होली का रंग और भंग की तरंग इतनी जबरदस्त है कि कुछ भी कहूँ लेकिन फिर भी कहूँगा,"क्योंकि मैं झूठ नहीं बोलता." हॉं ये अवश्य ध्यान नहीं आ रहा है कि भुट्टो शिमला में क्या कर रहे थे और समझौता किस से कर के चले गए??!!!लेकिन चलिए बांग्लादेश स्वतंत्र हो गया और उसके बाद ही काजी लेंदुप दोरजी से शी जिन ने झूला झूल कर बात की और फिंगर तो रह गईं पर अब्राहम लिंकन के प्रयासों से सिक्किम भारतीय हो गया.यहाँ राज़ की एक बात और बता दूँ कि वाशिंगटन,लिंकन, बंगबंधु, नेपोलियन आदि सब reciprocate ही कर रहे थे क्योंकि जब-जब उनको जरूरत पड़ी हमारे वीर कंदराओं से निकल कर उनके युद्ध लड़ते रहे थे.ये वो ऐतिहासिक बातें हैं जो बहुत ही सीक्रेट किस्म की हैं और किसी को पता नहीं हैं और छद्म-इतिहासकारों को तो बिल्कुल ही नहीं.खैर,भांग का जोर है और होने वाली अब भोर है तो होली खेलो.
बुरा न मानो होली है
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