मध्य प्रदेश रीवा का जानकी पार्क और हमारे परिवार से उसका सम्बन्ध

मध्य प्रदेश रीवा का जानकी पार्क और हमारे परिवार से उसका सम्बन्ध

हमारे बाबा के चाचा थे दीवान बहादुर जानकी प्रसाद चतुर्वेदी।इन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से 1880-90 के दशक में M.A. English और LLB (1st div.) किया था और इसी कारण ये समाज और परिवार में M.A.चच्चा के नाम से जाने जाते थे।इनका चयन तत्कालीन UP PCS सेवा में भी डिप्टी कलेक्ट्री हेतु हो गया था किंतु ये उस समय की पारिवारिक परम्परा निभाते हुए रीवा राज्य की सेवा में गए। जानकी प्रसाद जी ने तत्कालीन रीवा महाराज श्री व्यंकटरमण सिंह जी और श्री गुलाब सिंह जी के साथ तत्कालीन रीवा राज्य के लिए 1934 तक काम किया और फिर अपने बड़े भाई रोशन लाल जी का देहांत (1932 में ) हो जाने पर रिटायरमेंट 
(1934 में ) ले लिया और अपने पैतृक निवास फिरोजाबाद आकर रहने लगे जहाँ वो 1936 तक यानी अपनी मृत्यु पर्यंत रहे।इनका भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की लड़ाई लड़ रहे लोगों से निरन्तर निकट का सम्पर्क था और किचलू साहब,काटजू साहब,पंडित मोती लाल नेहरू आदि इलाहाबादी लोगों  से इनके व्यक्तिगत सम्पर्क-सम्बन्ध थे।रीवा राज्य की सेवा करते हुए ये अनेकों विभाग के मंत्री रहे और फिर  महाराज रीवा के सेक्रेटरी  दीवान बहादुर जैसे उच्च पद पर अवकाश प्राप्ति तक थे।उनको महाराज रीवा ने ताजीमी सरदार का खिताब तथा जागीर दी थी जिसके broadly निम्नलिखित कुछ मतलब हुआ करते थे:-
1.उनको पैर में पहनने को सवा किलो सोने का एक कड़ा दिया था दाहिने पैर का।हिंदुओं (सनातन धर्म) में पहले आदमी हो या महिला पैर में सोना पहनने के अधिकारी नहीं होते थे/ना ही पैर में सोना पहनना शुभ माना जाता था जब तक कि वो स्वयं राज परिवार के ही ना हों अथवा उस घर के किसी व्यक्ति को राजा ने पैर में सोना पहनने का अधिकार दिया हो, ऐसी प्रथा और मान्यता हुआ करती थी।इसके बाद से ही हमारे परिवार को यह अधिकार पुरुष,महिला,बहू, लड़की सबके लिए प्राप्त हुआ।
2.ताजीमी सरदार को राजा के दरबार में कभी भी आने की अनुमति थी और उनकी बैठने की सीट महाराज के दाहिनी तरफ उनके बगल में थी और उनको जागीर भी दी गयी थी।
जानकी प्रसाद जी की रीवा राज्य के प्रति सेवाओं,उनकी कर्मठता और लगन को देखते हुए महाराज रीवा ने उनको एक डेमलर कार भी भेंट की थी।
तत्कालीन महाराज रीवा गुलाब सिंह जी ने दीवान बहादुर जानकी प्रसाद जी चतुर्वेदी के नाम पर गोरहा तालाब नामक एक स्थान पर पार्क बनवाया और उसका नाम उनके नाम पर जानकी पार्क रखा।

दो दिन पहले हमारे ताऊजी डॉक्टर के0ऐन0 चतुर्वेदी, जिनको हम मुन्ना चाचा कहते हैं, ने बताया कि रीवा में जानकी पार्क में एक मंदिरनुमा कुछ बन गया है और शायद उसको जानकी देवी का मंदिर कहा जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रचार हो रहा है कि पार्क उनके ही नाम पर है।मुन्ना चाचा ने बताया कि रीवा में रहने वाले हमारे परिवारीजनों में से किसी के पास इस से सम्बंधित कागजात नहीं थे।कल जब मुन्ना चाचा ने हमको ये बात बताई तो तुरंत हमने M.A.चच्चा के टेस्टिमोनीयल से इस पार्क की घोषणा निकाल कर उसकी फोटो लेकर मुन्ना चाचा को भेजी एम ए चच्चा की फोटो के साथ।मुन्ना चाचा ने बताया कि उन्होंने ये सब सामग्री कल ही रीवा भेजी और रीवा में परिवार वालों से कहा है कि वहाँ की नगर पालिका में इस से सम्बंधित एक मेमोरेंडम दें ताकि सच्चाई सब को मालूम रहे और किसी भ्रम की स्थिति न बने।
देखें क्या होता है......

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