शिवरात्रि को इलाहाबाद की यादें

शिवरात्रि


आज शिवरात्रि है और याद फिर से इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की आ गयी।

हॉस्टल में वैसे तो सभी पर्व धूम-धाम से मनाये जाते थे लेकिन शिवरात्रि की बात ही कुछ और थी।

हॉस्टल के जमाने के या यों कहें कि विद्यार्थी जीवन के दौरान लगभग सभी विद्यार्थियों का हाल भगवान शिव के गणों जैसा ही होता है जो हर हाल में देवी सरस्वती को प्रसन्न करने के प्रयास करते हुए जीवन में आगे चलकर देवी दुर्गा-शक्ति और देवी लक्ष्मी की कृपा की आकांक्षा रखते हैं।

तो इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हम लोगों के सर गंगानाथ झा हॉस्टल में शिवरात्रि के दिन एक अलग ही उत्साह और धूम का माहौल होता था और हो भी क्यों ना आखिर त्योहार शिव जी के विवाह का तो शिव भक्त और/या शिव जी के गण क्यों न प्रसन्न हों?

हॉस्टल के कॉमन रूम में शाम को शिव जी की पूजा होती थी तथा सभी छात्रावासी गण इसमें बढ़-चढ़ कर उत्साह से भाग लेते थे। पूजा के बाद  फिर प्रसाद चढ़ाया जाता था। प्रसाद में गुलाब जामुन विशेष उल्लेखनीय होते थे और फिर शिव बूटी जो लेना चाहें उनके लिए उपलब्ध होती थी।
उस पूरी शाम हॉस्टल में खूब हर्षोल्लास और धूम धाम का माहौल रहता था और शिव-बूटी अर्थात भांग की कृपा से एक अलग ही रौनक हो जाती थी।

वैसे तो शिवरात्रि का त्योहार हर जगह लोग अपने-अपने तरीके से हर्षोल्लास से मनाते ही हैं लेकिन फिर भी हॉस्टल के दिनों में इस त्योहार की जो धूम होती थी उसको याद करके आज भी मन उत्साहित हो जाता है और मुझको लगता है कि आज भी उस समय के छात्रावासी बन्धु हॉस्टल के दिनों में मनाए गए शिवरात्रि के त्योहार को याद करते ही होंगे।

आप सभी को समस्त परिवारीजनों सहित भगवान शिव और माँ पार्वती के विवाह के पर्व महाशिवरात्रि की बधाई और शुभकामनाएं!


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