Sindbad Travels-21 सिंदबाद ट्रैवल्स-21
Sindbad Travels-21
England-9 2nd trip
London,Yeovil,Martock
सिंदबाद ट्रैवल्स-21
इंग्लैंड-9 दूसरी यात्रा
लंदन,इयोविल,मारटौक
आज इतवार का दिन था और वास्तव में आज केवल एक ही काम था और वो था कल यानी कि सोमवार का इंतज़ार करना जिस से क्रेडिट कार्ड प्रकरण का कुछ समाधान हो।बहरहाल मैंने इस दिन का उपयोग लंदन घूमने में ही करने का विचार बनाया।आराम से उठ कर होटल में ही बढ़िया और भरपेट नाश्ता करने के बाद मैं बाहर घूमने निकला।सबसे पहले मैं ऐसे ही टहलते हुए टॉटेनहम कोर्ट रोड की तरफ पहुँचा।ये स्ट्रीट काफी जीवंत सड़क है।इस पर एक तरफ प्रसिद्ध डोमिनियन थियेटर है।ये काफी पुराना थियेटर है,इसमें फरवरी 1931 में चार्ली चैप्लिन की प्रसिद्ध फ़िल्म City Lights का प्रीमियर हुआ था जिसमें स्वयं चार्ली चैप्लिन आये थे और लोग इस बात का जिक्र आज तक करते हैं।बाद में चल कर ये थियेटर संगीत के कार्यक्रमों यानी कि musical concerts के लिए अधिक प्रसिद्ध हो गया।इसी टॉटेनमकोर्ट रोड पर लंदन का प्रसिद्ध मेपल हाउस Maple House भी है जो एक प्रसिद्ध कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स है।
टॉटेनमकोर्ट रोड के इसी भीड़भाड़ और चहलपहल वाले इलाके में एक मजेदार वाकया हुआ।वहाँ मुझे अपने एक पुराने और अत्यन्त घनिष्ठ परिचित मिल गए।बात शायद डोमिनियन के पास वाले मोड़ की है।मैं फुटपाथ पर था और वो शायद सड़क पर खड़े होकर यानी कि बिल्कुल फुटपाथ के किनारे पर ही खड़े होकर मुझसे बात कर रहे थे कि एक तरफ से अचानक लंदन में चलने वाली लाल सिटी बस तेजी से आई और उन पर चढ़ ही गयी होती वो तो reflex action के कारण मैंने अपने उन मित्र को तुरंत शायद सैकिंड के भी सौवें हिस्से में चपलता से अपनी ओर खींच लिया नहीं तो न जाने क्या दुर्घटना हो जाती।इसके काफी समय बाद तक मेरे दिल की धड़कनें धक धक करके तेजी से चलती रहीं और आज भी जैसे ही उस घटना के विषय में सोचता हूँ तो आज भी दिल की धड़कन तेज हो जाती हैं।इस घटना के पहले मैं सोचता था कि हमारे देश में सिर्फ नौकरशाही ही ऐसी है जिसमें अधिकांश की सोच आज भी तत्कालीन ब्रिटिश राज की ट्रेनिंग के हिसाब से है लेकिन इस घटना ने मुझको ये सोचने पर मजबूर किया कि हमारी दिल्ली की ब्ल्यू लाइन के बस ड्राइवर भी लंदन के इसी किस्म के बस ड्राइवरों से अपनी प्रेरणा लेते हैं।मेरे इन घनिष्ठ मित्र को जब मालूम पड़ा कि मेरे साथ क्रेडिट कार्ड का ये किस्सा हो गया है तो उन्होंने मुझसे कहा कि वो मुझको कुछ पैसे दे सकते हैं किंतु मैंने विनम्रता पूर्वक उनको धन्यवाद देते हुए मना कर दिया किन्तु उनकी इस बात के लिए मैं ताउम्र उनका आभारी रहूँगा वरना परदेस में ऐसे शुभचिंतक किस्मत वालों को ही मिलते हैं।
दोपहर के बाद इसी तरह से घूमते हुए मैंने एक रेस्टोरेंट में जाकर खाने में कुछ सलाद और एक पीत्जा खाया।
शाम का झुटपुटा होते होते मैं लंदन के प्रसिद्ध Piccadilly Circus के इलाके में पहुँच चुका था।पिकेडली लंदन के सबसे प्रसिद्ध व्यावसायिक इलाकों में से एक है।यहाँ एक तरफ Shaftesbury Memorial Fountain है जो 1893 में बना था।इसके ऊपर पंखों वाले एक मनुष्य की नग्न प्रतिमा है।इसको इरोस की प्रतिमा भी कहा जाता है किंतु ये अल्फ्रेड गिल्बर्ट नामक वास्तुविद द्वारा बनाई गई थी।उस समय तांबे के फव्वारे पर एल्युमीनियम की प्रतिमा को स्थापित करना एक बहुत चर्चित घटना और कला जगत की बहुत बड़ी घटना थी।ये फाउंटेन शैफ्ट्सबरी के 7 वें अर्ल एंथोनी एश्ले कूपर की याद और सम्मान में बनाया गया था।पिकेडली सर्कस इलाके को लंदन का Times Square भी कहा जाता है।यहाँ की रौनक,रौशनी और चकाचौंध देखते ही बनती है।यहाँ पर बड़े बड़े विज्ञापन के रोशनी के चमकते बोर्ड देखते ही बनते हैं।Coca cola, Foster’s, TDK, Sanyo जैसे विश्व प्रसिद्ध ब्रांडों के नियॉन साइन जैसे बोर्ड एक तरफ अपनी अद्भुत छटा बिखेर रहे थे तो कहीं Philips, Panasonic, Nescafe वाले भी अपना अपना जलवा दिखाने में किसी से पीछे नहीं थे।एक तरफ Ripley’s believe it or not का बोर्ड दिखा तो कहीं Guinness world record भी था।चारों तरफ गजब की भीड़ और कमाल की रोशनी की चकाचौंध यही था संक्षेप में पिकेडली सर्कस।वहाँ लोगों ने बताया कि पिकेडली सदैव रोशन और जीवंत रहता है 24/7 और इतिहास में चंद मौके ही ऐसे आये हैं जब यहाँ की रोशनी गुल (Lights off) की गईं हैं।ऐसा एक बार तो 1965 में हुआ जब इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री और उनके दूसरे विश्वयुद्ध के प्रमुख नायक सर विंस्टन चर्चिल का निधन हुआ और बाद में एक बार 1997 में जब प्रिंसेस डायना की एक दुर्घटना में मृत्यु हुई थी।
पिकेडली इलाके में घूमते घूमते ही मैं कई दुकानों में भी गया जिसमें एक की चर्चा यहाँ करना चाहूंगा।ये दुकान थी स्कॉटिश किल्ट्स Scottish Kilts की।किल्ट असल में घुटने तक की लंबाई का स्कर्ट की किस्म का ही एक परिधान है।ये स्कॉटलैंड की संस्कृति के प्रमुख प्रतीकों में से एक है।इसको प्राचीन काल में गॉल एवं केल्टिक (Gaul & Celtic) लोग पहनते थे।अब इसको Irish Pipe Band वाले भी पहनते हैं।स्कॉटिश किल्ट्स या स्कर्ट मूलतः ऊनी चारखानेदार पैटर्न के कपड़े की होती हैं जिस पर आड़े तिरछे,खड़े और क्षैतिज डिजाइनों के खाने बने होते हैं।इन स्कर्ट्स की अपनी अंतर्राष्ट्रीय पहचान है और स्त्री और पुरुष दोनों इनको बहुत शान से पहनते हैं।यहाँ ये भी बताना चाहूँगा कि ये परिधान आम स्कर्ट से काफी महँगा होता है।
इस प्रकार से लंदन में मेरा ये इतवार का दिन घूमते टहलते बीत ही गया और रात को जल्दी ही मैं अपने कमरे में आकर सो गया।असल में बाहर ठंडक बहुत थी और मुझको ये डर लगा कि कहीं सर्दी खा कर बीमार न हो जाऊं नहीं तो बहुत दिक्कत हो जाएगी।इस डर का भी दरअसल एक कारण था।एक बार मेरे छोटे भाई अभिनव लंदन आये हुए थे कि अचानक उनके दांत में भयंकर तकलीफ हो गयी।इस से उनको तेज बुखार आ गया।वो रात को खाना खा कर पैदल होटल की तरफ आ रहे थे तबकी ये घटना है।उनकी थकी हुई लड़खड़ाती चाल देख कर एक पुलिस वाला उनके पास आया और इनसे पूछा कि “Are you drunk?” और जब तक ये कुछ जवाब दें तब तक तो उसने शराब जांचने का यंत्र इनके मुँह में घुसा सा दिया।खैर ये शराब पिये हुए तो थे नहीं अलबत्ता तेज बुखार में थे।यह देख कर पुलिस वाले ने इनसे कई बार सॉरी कहा और इनको दांत के डॉक्टर के पास ले जाकर छोड़ दिया।वहाँ की पुलिस की वाकई ये बहुत तारीफ की बात है।दांत के डॉक्टर से गुड्डू यानी अभिनव ने कहा कि उन पर इंश्योरेंस है इस पर उस डॉक्टर ने कहा कि इंश्योरेंस के पेमेंट के माध्यम से इलाज कराना है तो किसी सरकारी टाइप अस्पताल चले जाइये और यदि मुझसे इलाज कराना है तो मुझको तो कैश पेमेंट सीधे चाहिए।अब उस समय खराब तबियत में कहाँ जाएंगे ये सोचते हुए उन्हीं डॉक्टर साहब से काफी महँगा इलाज कराया और उनको नगद पेमेंट किया था।इसलिए मुझको लगा कि यहाँ बीमार न पड़ें वही बेहतर रहेगा।
बिस्तर पर लेट कर ये सोचते हुए कि कल क्रेडिट कार्ड प्रकरण देखें क्या गुल खिलाता है थोड़ी देर में ही निद्रा देवी ने मुझको अपनी शरण में ले लिया।
अगली सुबह मैं जल्दी से तैयार हुआ और मैंने क्रेडिट कार्ड हेल्प लाइन के टॉल फ्री नम्बर को मिलाया।उन लोगों ने कहा कि वो भारत में मेरी बैंक से बात करके अभी थोड़ी देर में बताते हैं।फिर मैंने तुरंत अपनी बैंक को फोन मिलाया।समय में फर्क होने के कारण यद्यपि लंदन में अभी सुबह हुई थी लेकिन भारत में दफ्तर चालू हो चुके थे।मेरी बैंक वालों ने बताया कि कुछ तकनीकी खराबी ऐसी हो गयी है कि अभी क्रेडिट कार्ड काम नहीं कर पायेगा।अब मेरा गुस्सा तो सातवें आसमान पर था मैंने लगभग चीखते हुए कहा कि तो अब मैं क्या लंदन के होटल में बर्तन माँज कर अपनी जान छुड़ाऊं।इस पर वो लोग बोले कि आपकी परेशानी हम समझ रहे हैं लेकिन ये कुछ समस्या ऐसी हो गयी है कि कार्ड अभी काम नहीं करेंगे।मैंने कहा लेकिन कुछ करिये जिस से मेरे हाथ में पैसा तो हो।इस पर उन्होंने कहा कि ठीक है हम अभी वीसा कार्ड वालों से बात करके कुछ रास्ता निकालते हैं आप 10 मिनट इंतज़ार करिये।मरता क्या न करता सो इंतज़ार तो करना ही था लेकिन ये दस मिनट मेरे लिए दस साल जैसे थे।थोड़ी देर में मेरे कमरे के फोन की घंटी बजी।ये फोन मेरी बैंक से ही था।उन्होंने कहा कि आप वीसा वालों के फोन का इंतज़ार करिये वो आपको पैसा कैसे मिल पायेगा ये बताएंगे।अगला फोन वीसा वालों का था।उन्होंने मुझसे कहा कि आप पास के फलाने बैंक के कैश काउंटर पर जाइये और वहाँ अपना पासपोर्ट दिखाइयेगा तो वो आपको 5,000 पाँच हजार यूएस डॉलर दे देंगे।अब मेरी जान में जान आयी।मैं तुरंत उनके बताए बैंक पहुँचा, काउंटर पर पासपोर्ट दिखाया और उन लोगों ने मुझसे एक वाउचर पर मेरे दस्तखत करवाये और मुझको पाँच हजार डॉलर दे दिए।अब मेरे सर से एक बहुत बड़ा बोझा उतर चुका था और सबक भी मिल चुका था कि वक़्त पड़ने पर जेब का रुपया ही काम आएगा प्लास्टिक करेंसी धोखा दे सकती है हाँलांकि आज 2017 में अब परिस्थितियों में बहुत परिवर्तन आ चुका है।
बैंक से पैसे लेकर मैं तुरंत कैब पकड़ कर लंदन के वाटर लू स्टेशन की तरफ चल दिया।मेरा आज का समरसेट के मारटौक नामक शहर में एक व्यापारी से मिलने का अपॉइंटमेंट था।Martock शहर में किसी जमाने में रेल जाती थी किन्तु अब नहीं।तो वहाँ के सबसे पास Yeovil Junction नामक रेलवे स्टेशन था जहाँ मुझको ट्रेन से पहुँचना था और फिर वहाँ से मारटौक जाना था।लंदन से इयोविल की दूरी लगभग 200 किलोमीटर और ईओविल से मारटौक की दूरी लगभग 12 किलोमीटर थी।ईओविल जंक्शन के लिए ट्रेन लंदन के वाटरलू स्टेशन से जाती थी और इसको वहाँ पहुँचने में लगभग 2 घंटे 30 मिनट का समय लगता था।ईओविल से मारटौक जाने के लिए उस समय एक ही टैक्सी उपलब्ध थी और वो भी स्टेशन पहुँच कर उनको फोन करने पर आती थी।ईओविल जंक्शन से मारटौक शहर पहुँचने में लगभग 15-20 मिनट का समय लगता था।ट्रेन से ईओविल तक का सफर अत्यन्त आरामदेह और खुशनुमा था।ठंडी वादियों में भाप से चलने वाले इंजन की ट्रेन में बैठ कर दोनों तरफ हरियाली देखते हुए घुमावदार थोड़ी चढ़ाई वाले रास्ते पर जाना एक बहुत ही पुरसुकून अनुभव था।जो लोग भी इंग्लैंड और यूरोप घूमने जाएं उनको वहाँ की ट्रेन में अवश्य सफर करना चाहिए।ये सफर आरामदेह,आनन्ददायक और रोचक तो होता ही है साथ ही साथ आपको उस देश के भीतरी इलाकों को भी भलीभाँति से देखने का मौका भी मिलता है।तो इस प्रकार से लगभग ढाई तीन बजे मैं ईओविल जंक्शन पहुँच गया था।वहाँ बहुत ही शांति थी,सवारी मेरे अलावा मुझको कोई और उतरती दिखी नहीं।मैंने स्टेशन से ही अपने ग्राहक को फोन किया तो उन्होंने टैक्सी वाले को फोन करके मेरे पास भेजा।बहरहाल थोड़ी देर में ही टैक्सी आ गयी जो अकेली ही स्टेशन से मारटौक के बीच चलती थी।स्टेशन पर पता करने पर मालूम हुआ कि लंदन वाटरलू के लिए आखिरी ट्रेन 6 बज कर 30 मिनट पर है अर्थात उसके पहले मुझको स्टेशन वापिस आ जाना था।खैर टैक्सी से ईओविल से मारटौक का रास्ता बहुत ही खूबसूरत था और थोड़ी देर में ही हम मारटौक पहुँच गए।इतने सन्नाटे और खाली खाली दिखने वाले स्थान में सर्दी भी ज्यादा महसूस हो रही थी।
Martock समरसेट,इंग्लैंड का एक बड़ा और पुराना गांव है।अभी 2017 में इसकी जनसंख्या मात्र 4766 की है तो आज से लगभग 20 साल पहले तो और भी काफी कम रही होगी।इंग्लैंड में हर जगह का एक इतिहास है तो मारटौक का भी था। 50.9704°N और 2.7653°W के कोऑर्डिनेट्स वाला मारटौक ऐतिहासिक रूप से एक मार्केट टाउन या बाज़ार वाला कस्बा था।इंग्लैंड की प्रसिद्ध Domesday book में ईस्वी सन 1086 में Mertoch का जिक्र है।पुरानी अंग्रेज़ी में इसका अर्थ 'Rising bright from the shining sea’ होता है।इसका एक दूसरा अर्थ Mart यानी कि बाज़ार और 'ac’ or 'oak’ से है मतलब वो बाज़ार जहाँ ओक का पेड़ है।मारटौक एक छोटा कस्बा नुमा गांव था।अच्छी सड़कें,साफ सुथरे रास्ते,हरियाली और शांति और एक प्रसिद्ध पुराना ऐतिहासिक चर्च।मैं अपने ग्राहक (Buyer) के गया।ये वही लोग थे जिनके लिए मिस्टर विक्टर लेमेंट ने ऑर्डर लिखवाया था।इनका माल बना तैयार रखा था किंतु ये एलसी खोलने में कुछ दिक्कत कर रहे थे।इस यात्रा में इनसे खूब अच्छी बातचीत हुई।इनका बहुत बड़ा वेयर हाउस आदि था।ये अलग बात है कि बाद में जब इनको माल भेजा तो इन्होंने पेमेंट नहीं किया और अंततः तमाम कोशिशों के बावजूद वो पैसा मारा ही गया।खैर फिलहाल एक अच्छी और संतोषजनक मीटिंग करके मैं फिर उसी टैक्सी से ईओविल स्टेशन आया।अंधेरा होने को आ गया था।पूरे स्टेशन पर सवारी के नाम पर मैं
अकेला आदमजात था।ट्रेन आने पर उसमें बैठा और ढाई घंटे में वापिस लंदन पहुँच गया।
वाटरलू स्टेशन से रात होते होते मैं अपने होटल पहुँचा और वहाँ पहुँच कर मैंने थकान मिटाने को सबसे पहले खूब गर्म पानी के फव्वारे के नीचे खड़े होकर स्नान किया।इसके बाद होटल से बाहर निकल कर कुछ खाना खाया और वापिस अपने कमरे में आकर सो गया क्योंकि अगले दिन मेरी लंदन से पेरिस,फ्रांस की यात्रा थी।
इस प्रकार से मेरी लंदन की ये यात्रा भी समाप्ति की ओर थी।अब इसके बाद मैं आपको अपनी उसी पुरानी 1991 की यात्रा के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए लंदन की उस यात्रा के बाद की पेरिस,फ्रांस की यात्रा के विषय में बताऊंगा जिसमें वो किस्सा भी है जब कुली की भांति मेरी अटैची मुझको अपने सर पर रख कर ढोनी पड़ी थी।
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