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Showing posts from September, 2026

लोकसेवक — 1: जज साहब सुरेश चंद्र चतुर्वेदी

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​ लोकसेवक — 1 जज साहब सुरेश चंद्र चतुर्वेदी लोकसेवक कौन है? क्या केवल कोई सरकारी अधिकारी? कोई न्यायाधीश? कोई मंत्री या शासक? या फिर हर वह व्यक्ति जिसे किसी समय समाज, राज्य या व्यवस्था ने कोई सार्वजनिक जिम्मेदारी सौंपी और जिसके फैसलों का असर दूसरे लोगों के जीवन पर पड़ा? इतिहास में सत्ता की चर्चा बहुत होती है, लेकिन सत्ता और समाज के बीच खड़े उन लोगों की चर्चा शायद उतनी नहीं होती जिन्हें किसी न किसी रूप में लोकसेवा की जिम्मेदारी मिली। इनमें राजा भी रहे, मंत्री भी, न्यायाधीश भी, प्रशासक भी, पुलिस अधिकारी भी, सेनापति भी, अर्थशास्त्री और समाज सुधारक भी और बहुत से ऐसे लोग भी जिन्हें शायद इतिहास ने उतनी जगह नहीं दी जितनी मिलनी चाहिए थी। अलग-अलग कालखंड। अलग-अलग क्षेत्र। अलग-अलग देश और भौगोलिक परिस्थितियाँ। अलग-अलग व्यवस्थाएँ और अलग-अलग तरह की लोकसेवा। और जाहिर है, सभी लोकसेवक आदर्श नहीं रहे। किसी ने अपने पद की मर्यादा बढ़ाई तो किसी ने उसे विवादों में डाला। किसी ने सत्ता के सामने खड़े होकर अपने दायित्व को निभाया तो किसी पर सत्ता के सामने झुकने के आरोप लगे। किसी के फैसले आज भी मिसाल के रूप में या...

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 139वाँ स्थापना दिवस | University of Allahabad

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​ आज 23 सितम्बर 2026 को इलाहाबाद विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस पर इस पावन संस्था से जुड़े रहे और जुड़े हुए सभी लोगों को बहुत बहुत बधाई। आज फिर से मैं ये पोस्ट इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि शिक्षा के इस पावन संस्थान से मेरा और मेरे परिवार का आरंभ से ही संपर्क रहा है। हमारे परिवार का संपर्क इस विश्वविद्यालय से बहुत पुराना यानी कि कई पीढ़ियों पुराना है।मेरे बाबा के चाचा  दीवान बहादुर स्व0 जानकी प्रसाद जी चतुर्वेदी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.A. द्वितीय श्रेणी सन 1893 में M.A (English) प्रथम श्रेणी में और दूसरी पोजीशन के साथ सन 1895 में और फिर LLB भी प्रथम श्रेणी में सन 1896 में पास किया था।उस जमाने में एंट्रेंस और इंटर की परीक्षाएं भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय कराता था और स्व0 जानकी प्रसाद जी ने आगरा कालेज,आगरा से इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ये परीक्षा पास की थीं अर्थात सन 1889 से हमारे परिवार का इस गौरवशाली विद्या के मंदिर से लगातार संपर्क बना रहा और ये हम लोगों के लिए बड़े गौरव और गर्व की बात है। उनके बाद मेरे पितामह स्व0 सुशील चंद्र जी चतुर्वेदी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से B.Sc. और LLB ...