फ़िरोज़ाबाद जिले की स्थापना के 37 साल

फ़िरोज़ाबाद जिले की 37 साल पूरे होने के अवसर पर आप सभी को बधाई!


आज जब फ़िरोज़ाबाद जनपद की स्थापना के 37वर्ष पूरे होने पर यह लेख लिखने बैठा हूँ तो मुझको याद आ रहा है 5 फरवरी 1989 का वो दिन और उस दिन का माहौल जब फ़िरोज़ाबाद के टीबी अस्पताल ग्राउंड में मंच से उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जी (अब स्वर्गीय) ने फ़िरोज़ाबाद को जिला बनाने की घोषणा की थी.मंच से ही उन्होंने जिले के पहले जिलाधीश ऐस0सी0रस्तोगी जी (अब स्वर्गीय) और जिले के पहले पुलिस अधीक्षक श्री अरविंद जैन का परिचय कराया था.मंच पर उस समय के कांग्रेस के सांसद गंगाराम जी(अब स्वर्गीय), जलेसर के सांसद रहे श्री कैलाश यादव,कांग्रेस के विधायक रहे गुलाम नबी साहब, फ़िरोज़ाबाद नगर पालिका के तत्कालीन चेयरमैन श्री अशोक चतुर्वेदी जी,स्व0रघुवर दयाल वर्मा जी,श्री अशोक सेहरा जी आदि गणमान्य लोग मौजूद थे और सामने था उम्मीदों, आशाओं, आकांक्षाओं और कृतज्ञता से भरपूर फ़िरोज़ाबाद की जनता का अपार जनसमूह. स्व0तिवारी जी ने जब जिला बनाने की घोषणा की तब के हर्षोल्लास से भरे जयकारे आज भी फ़िरोज़ाबाद की फ़िज़ाओं में घूम रहे हैं. फ़िरोज़ाबाद को जिला बनाने के आंदोलन में अनगिनत लोगों का अद्भुत योगदान रहा है जिनमें से कुछ प्रमुख नाम श्री प्रकाश चंद्र चतुर्वेदी, एडवोकेट,श्री अनूप चंद्र जैन,एडवोकेट,श्री झब्बूलाल जी,स्व0पीके तैलंग जी आदि के नाम उल्लेखनीय हैं.

अपने सैकड़ों वर्ष के इतिहास की विरासत लिए यह कस्बा अब जिला बनने के बाद एक नए विकास के युग के शुरू होने की राह देख रहा था.उस समय फ़िरोज़ाबाद में जीविकोपार्जन के दो प्रमुख साधन थे जिनमें एक काँच उद्योग और दूसरा था खेती जिसमें आलू और नारखी आदि कुछ इलाकों में मिर्च की खेती का काम था. फ़िरोज़ाबाद को जिला बनाने वाले मुख्यमंत्री तिवारी जी का सपना था कि फ़िरोज़ाबाद जिले में टूण्डला से शिकोहाबाद तक गैर प्रदूषणकारी इकेक्ट्रॉनिक्स आदि जैसे किसी उद्योग की आधारशिला रखी जाए लेकिन उनका यह सपना अभी तक सपना ही है जबकि इसी प्रकार के उद्योगों की स्थापना के परिणामस्वरूप आज हैदराबाद और बैंगलोर के नाम विश्व के मानचित्र पर आ चुके हैं.

जिला बनने के बाद फ़िरोज़ाबाद को आवश्यकता थी एक सुनियोजित चतुर्मुखी विकास की,नए कारोबारों की,नए रोजगारों की,नए आवासीय परिसरों की,नए शिक्षण संस्थानों की,नए ट्रेनिंग संस्थानों की और बढ़िया कानून व्यवस्था की, क्योंकि अब फ़िरोज़ाबाद के लोगों को जिला बनने के बाद इन सभी चीजों के सपने साकार होते लगने लगे थे.

लोगों के इन सपनों को साकार करने में पहला रोल तो तिवारी जी ने जिले की घोषणा करके पूरा कर दिया था किंतु अन्य हसरतों,इच्छाओं और जरूरतों को पूरा करने का काम था नव नियुक्त अधिकारियों का और फ़िरोज़ाबाद का सौभाग्य था कि फ़िरोज़ाबाद जिले को पहले जिलाधीश और पुलिस अधीक्षक के रूप में बहुत अच्छे अधिकारी मिले. स्व0रस्तोगी साहब ने फ़िरोज़ाबाद के विकास के लिए एक दूरगामी सोच का प्लान बनाया और बार बार लखनऊ की दौड़ लगाकर उसको साकार भी करने का सफल प्रयास भी किया.ये मेरा भी सौभाग्य था कि रस्तोगी साहब के बहुत से लखनऊ दौरों में मुझको उनके साथ रहने का मौका मिला तो मैंने जाना कि एक अच्छा जिलाधिकारी किस प्रकार एक जिले को बनाता है.सुहाग नगर कॉलोनी का अधिग्रहण,वहाँ सरकारी दफ्तरों का बनाना,सभी अधिकारियों के विभागों को फ़िरोज़ाबाद में कार्यरत करना इस सभी में स्व0रस्तोगी साहब ने जीजान से सफल प्रयास किये और ऐसा ही पुलिस विभाग में श्री अरविंद जैन साहब कर रहे थे.फ़िरोज़ाबाद का सौभाग्य था कि शुरू में फ़िरोज़ाबाद जिले को बहुत अच्छे,कर्मठ,विकास की सोच रखने वाले अधिकारी मिलते रहे उनमें से कुछ के नाम मुझको याद आ रहे हैं जैसे श्री राजीव कुमार,श्री अशोक कुमार,श्री पीके मोहंती,श्री नितिन गोकर्ण,श्री दीपक कुमार,श्री रजनीश गुप्ता,श्री नरेन्द्र भूषण आदि जैसे जिलाधिकारी तो श्री  बृज राज मीणा,डॉ0कश्मीर सिंह,श्री अमिताभ ठाकुर,श्री अजय आनन्द,श्री राजा श्रीवास्तव,श्री डीबी राय,श्री नवनीत राणा,श्री विजय शंकर सिंह,श्री दलजीत सिंह,श्री डी0सी0पांडे,श्री श्याम माहेश्वरी आदि जैसे कर्मठ पुलिस अधीक्षक अपना काम बेहतरीन तरीके से अंजाम देते रहे और वो भी नेताओं जैसे प्रचार के बिना.उधर कचहरी के लिए भी वकील लोगों और नव नियुक्त जिला जज श्री वीके जैन और सीजेएम श्री ऐ0के0 कक्कड़ जी आदि के प्रयास जारी थे.जब कचहरी के लिए जगह का सवाल आया तो तत्कालीन नगर पालिका के चेयरमैन श्री अशोक चतुर्वेदी जी ने गांधी पार्क में बने हुए चुंगी के स्कूल में जो बन्द था कचहरी के लिए जगह उपलब्ध कराई और उसका भी भव्य उद्घाटन हुआ जिसमें हाईकोर्ट के जज आदि बहुत से लोग आए.


फ़िरोज़ाबाद में लगा कि विकास कार्य शुरू हो गए हैं जैसे नया जिला कार्यालय क्षेत्र दबरई में विकसित हुआ जहाँ धीरे-धीरे जिले के सभी कार्यालय स्थापित होते चले गए.दुर्भाग्य की बात है कि बाद के सालों में प्रदेश के अन्य स्थानों की भांति फ़िरोज़ाबाद में भी ऐसे अधिकारी ज्यादा आये जिनको नेताओं से भी अधिक प्रचार की भूख रहती लगी.ऐसा नहीं कि उनका ध्यान विकास में नहीं था और ये भी सही है कि फ़िरोज़ाबाद में सरकार की विभिन्न योजनाओं के लिए उन्होंने खूब पुरस्कार जीते,किस्म किस्म की दौड़ें होने लगीं,हर काम के लिए ब्रांड एम्बेसडर नियुक्त होने लगे,अखबारों और मीडिया में खूब फोटो भी लोगों को छपती दिखने लगीं;कई बार ऐसा भी प्रतीत हुआ कि कुछ स्थानों में अधिकारियों द्वारा किये जाने वाले बहुत से कार्य वस्तुतः सत्तारूढ़ दल के नेता करते दिखे और नेताओं के काम यानी मीडिया प्रेस में रोज छपना आदि काम अधिकारी करते दिखे;किन्तु इस किस्म की गतिविधियों के अलावा जो ज्यादा महत्वपूर्ण था यानी कि एक नए फ़िरोज़ाबाद के लम्बी अवधि के  सुनियोजित विकास के लिए जो करना था वो इन सभी की प्राथमिकताओं में पीछे रह गया.


1989 से 2019 के तीस साल के सफर में  ऐसा भी नहीं है कि कोई विकास कार्य नहीं हुआ;गैस आयी है,दबरई कार्यालय बने हैं,झेड़ा-झाल योजना है,मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हुयी है,ट्रॉमा सेंटर बना है,कैसे भी हों लेकिन कई इंजीनियरिंग कॉलेज बने हैं,एकाध प्राइवेट यूनिवर्सिटी भी बन गयी है,फ़िरोज़ाबाद में प्राइवेट कॉलोनियों के रूप में फ़िरोज़ाबाद शहर में विभव नगर,गणेश नगर का विकास हुआ और अब ऑर्चिड ग्रीन भी है और सुहाग नगर तो थी लेकिन इन तीस वर्षों में विकास प्राधिकरण की कोई अन्य कॉलोनी अभी तक शहर फ़िरोज़ाबाद में नज़र नहीं आयी और जिले के अन्य शहरों-कस्बों यानी कि टूण्डला, शिकोहाबाद, सिरसागंज, जसराना, एका आदि के भी हालात कुछ ऐसे ही रहे हैं. महिलाओं/बालिकाओं के लिए कोई नया विद्यालय या महाविद्यालय नहीं दिखा.श्रमिकों की ट्रेनिंग के लिए या उद्योग के बढाने को गैस आने के बावजूद कोई सचमुच में काम करती संस्था नहीं दिखती है.पत्रकारों के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला प्रेस क्लब आज भी चाहिए.श्रमिकों के आवास के लिए 1960 के बाद कोई लेबर कॉलोनी नहीं दिखी.बच्चों के खेलने के लिए या वृद्ध लोगों के टहलने के लिए कोई नया पार्क नहीं दिखा.ये वो सारी बातें थीं जिनका सपना फ़िरोज़ाबाद जिले की जनता ने देखा था और ये हसरतें आज भी अधूरी हैं.विकास के कुछ काम हुए हैं लेकिन अपेक्षा और आशाओं से बहुत कम और जो जिंदा कौमें होती हैं उनको सतत रूप से अपने और आने वाली सन्तानों के भविष्य के लिए सपने देखने और उनको पूरा करने के प्रयास जारी रखने होते हैं और फ़िरोज़ाबाद जिले के निवासी,यहाँ के लोग जिंदा कौम हैं इसमें कोई शक नहीं हैं.

आज फ़िरोज़ाबाद जिले को आवश्यकता है श्रमिकों और अकुशल श्रमिकों के बच्चों के लिए सचमुच अच्छी तरह से चलने वाले स्कूलों की,बालिकाओं के लिए नए विद्यालयों की,एक लॉ कॉलेज की,एक मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की,काँच के विभिन्न पहलुओं को सिखाने वाले एक महाविद्यालय अथवा यूनिवर्सिटी की,फ़िरोज़ाबाद के आलू की खेती से जुड़े किसानों के लिए खेती से सम्बंधित उच्च प्रौद्योगिकी सिखाने वाले एक महाविद्यालय रूपी संस्थान की और जिले के और फ़िरोज़ाबाद शहर के सुनियोजित विकास की.आज फ़िरोज़ाबाद को ज़रूरत है  टूण्डला से शिकोहाबाद-सिरसागंज-जसराना तक की औद्योगिक पट्टी की जिसमें प्रदूषण रहित व्यापार और उद्योग हो जो इलेक्ट्रॉनिक्स,कम्प्यूटर अथवा सौर ऊर्जा से सम्बंधित हो सकता है.आज फ़िरोज़ाबाद को जरूरत है प्राचीन पर्यटन स्थलों के सौंदर्यीकरण करके(सांती मन्दिर,पाढम का परीक्षित कूप,शिकोहाबाद की ईदगाह और फ़िरोज़ाबाद का जैन मंदिर और हनुमान जी) और इसके अतिरिक्त फ़िरोज़ाबाद के इमामबाड़े और गली बौहरान को यहाँ की ऐतिहासिक हेरिटेज के रूप में विकसित-प्रचारित करके,इस जिले को एक सांस्कृतिक-व्यावसायिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित करने की जिससे रोजगार के अनगिनत अवसर उपलब्ध होंगे.फ़िरोज़ाबाद में पुराने शहर से हट कर एक नया आवासीय क्षेत्र भी विकसित हुआ चाहिए जहाँ LIG,MIG तथा HIG सभी वर्गों के हिसाब से रहने की कॉलोनी बने और सभी आधुनिक सुविधाएं,कम्युनिटी मार्केट,शादी विवाह के लिए कम्युनिटी हॉल और बच्चों के खेलने आदि को पार्कों की व्यवस्था हो.

फ़िरोज़ाबाद, इसके इतिहास से  संबंधित राजा टोडरमल और चौबे दुर्गाप्रसाद का विवाद और फिरोजाबाद की स्थापना का इतिहास, काँच 

उद्योग को ज़िंदा रखने के लिए 1930 के बाद टैरिफ़ कमीशन में की लड़ाई आदि  घटना फ़िरोज़ाबाद के इतिहास का अभिन्न अंग हैं । 

1989 से 2026 के बाद अब विकास की अगली पारी शुरू होनी चाहिए और इसके लिए समझदार, दूरगामी सोच रखने वाली नौकरशाही और राजनैतिक नेतृत्व को विशेष प्रयास करने होंगे तभी फ़िरोज़ाबाद की गिनती देश के विकसित जिलों में हो सकेगी.

अतुल चतुर्वेदी


यह फ़ोटो फ़िरोज़ाबाद जिले के बनने के 25 वर्ष पूरे होने पर एक कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश नारायण दत्त तिवारी जी फ़िरोज़ाबाद आए थे तब का है।

इस फ़ोटो में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जी, फ़िरोज़ाबाद जिला जब बना उसके बनने के समय के प्रथम नगर पालिका अध्यक्ष अशोक चतुर्वेदी जी, बिशन चतुर्वेदी जी,मनोज शर्मा एडवोकेट, पूर्व सभासद हरीश चतुर्वेदी,वर्तमान सभासद लाला राईन,आदि मौजूद हैं।यह फ़ोटो स्वर्गीय अशोक चतुर्वेदी जी के निवास का है।

फ़िरोज़ाबाद जिले की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी जी ने ही की थी।

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