सनातन धर्म

सनातन धर्म/हिंदू या जीवन प्रणाली कभी संकीर्ण नहीं रहे.जैसे गंगोत्री से गंगा की पवित्र किन्तु छोटी सी धारा शनैः शनैः अपना रूप बदलते हुए,रास्ते में मिलने वाली अनेकों छोटी बड़ी धाराओं को अपने में समाहित करते हुए विशाल और विशालतर होती चली जाती है और अंततः समुद्र में आत्मसात हो जाती है कुछ ऐसा ही सनातन है जो हजारों सालों से विभिन्न विचारधाराओं,सभ्यताओं की सोच और मान्यताओं को अपने में आत्मसात करता रहा है और इसीलिए प्राचीनता के साथ स्वयं सदैव आधुनिक और नवीन रहा है और सदैव नयी मान्यताओं,सुधारों को अपनाने हेतु तैयार.
आज जैसे गंगा में प्रदूषण रोकने की जरूरत है वैसे ही सनातन हिंदू धर्म की चिरन्तन अविरल बहती पवित्र धारा में कट्टरता रूपी प्रदूषण रोकने की आवश्यकता है.ध्यान रखिये खाली वैदिक,शाक्त,वैष्णव या शैव कोई एक सनातन धर्म नहीं है बल्कि समय समय पर सनातन ने इन सबको आत्मसात किया है.कोई मूर्ति पूजा,निर्गुण या तंत्र अकेला सनातन नहीं है अपितु ये सब उसमें घुले मिले हैं.कोई कपड़े पहने या भगवा या श्वेत वस्त्र धारी या निर्वस्त्र अकेला सनातन अवलंबी नहीं है अपितु ये सभी हैं,कोई जटाजूटधारी या केशहीन गंजा अकेला सनातन का प्रतिपादक या अनुयायी नहीं हैं हैं अपितु ये सब उसी महानद की छोटी-छोटी धाराएं हैं.इसलिए बचाइए सनातन को सिर्फ कट्टरता से बल्कि मानिए और जानिए कि सनातन जितना कट्टरतावादियों का है उतना ही उदारवादियों का भी और जितना आस्तिकों का है उतना ही नास्तिकों का भी!
अतुल चतुर्वेदी

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