सिंदबाद ट्रैवल्स-32 जर्मनी(1) हाइडलबर्ग Sindbad Travels-32 Germany(1) Heidelberg
सिंदबाद ट्रैवल्स-32
Sindabad Travels-32
जर्मनी (1):-हाइडलबर्ग
Germany (1):-Heidelberg
Coordinates:- 49.3988°N,8.6724°E
Time zone:-Central European Time Zone
आज 26 अगस्त 2022 को एक बहुत लंबे अंतराल के बाद जब मैं अपने विदेश यात्रा वृतांत के अगले भाग को यानी 32वें भाग को लिखने बैठा हूँ तो बहुत अच्छा लग रहा है।पिछला भाग-31 जो मेरी स्विट्ज़रलैंड यात्रा का आखिरी भाग था मैंने 26 जुलाई 2019 को पोस्ट किया था फिर इस बीच ऐसे बहुत से व्यक्तिगत कारण रहे कि इस क्रम में 3 वर्ष का व्यवधान आ गया।अब आज से इसको फिर से शुरू कर रहा हूँ और प्रयास होगा कि इसको पहले की भाँति प्रस्तुत करता रहूँ।
तो अब बात 14 अक्टूबर 1991 से शुरू करता हूँ;14 अक्टूबर मेरा जन्मदिन भी होता है तो सन 1991 के अपने इस जन्मदिन 14 अक्टूबर को अब मैं चल पड़ा था अपनी निर्यातक बनने की यात्रा के अगले पड़ाव पर यानी कि जिनेवा से जर्मनी के फ्रैंकफर्ट की ओर।मैं जब जिनेवा से जहाज में बैठा तो अतुल भैया और कनक भाभी के स्नेह तथा आवभगत की मधुर यादें हृदय में समेट कर ले जा रहा था और स्विट्जरलैंड के मनोरम दृश्यों की झांकी भी।जहाज हवा में उड़ कर बादलों के बीच अठखेलियाँ करता अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहा था और मेरा मन पीछे की यादों की ओर घूम रहा था।मुझको अपना फिरोजाबाद, घरवाले,दिल्ली से दुबई जाना, वहाँ शरद भाईसाहब,कपूर साहब,आबूधाबी के मत्तार शेख,बहरीन के रतन कपूर भाईसाहब और अर्चना भाभी के रुकना,वहाँ का दृष्टिहीन मोतियों का व्यापारी,दोहा के इस्माइल शेख और उनका बेब्ज़ी पिलाना, ऑर्डर देना,इजिप्ट के अद्भुत पिरामिड,स्वेज नहर,पैपिरस इंस्टिट्यूट, इजिप्शियन म्यूज़ियम,मिस्टर मैगदी, इंग्लैंड,फ्रांस और पेरिस की हिरान, स्विट्ज़रलैंड सब याद आ रहे थे।अब मैं सोच रहा था कि कैसा होगा जर्मनी?कैसे लोग होंगे वहाँ के?कुछ काम आगे बढ़ेगा या नहीं..
जब मैं जर्मनी के विषय में सोच रहा था तो चूंकि मैं इतिहास का विद्यार्थी रहा था तो मुझको याद आ रहे थे बिस्मार्क जिन्होंने जर्मनी के एकीकरण में मुख्य भूमिका निभाई थी।मुझको प्रथम विश्व युद्ध और द्वितीय विश्वयुद्ध के किस्से याद आ रहे थे।हिटलर के नरसंहार के किस्सों के विषय में सोचने पर मेरे अंदर एक अजीब किस्म की बेचैनी होने लगती थी और चूंकि हाल ही में बर्लिन की दीवार गिरा कर (9 नवम्बर 1989 को ये दीवार ढाही गयी थी) जर्मनी का पुनः एकीकरण हुआ था तो वो किस्से फिर से ध्यान आ रहे थे।सही बात ये है कि जब मैं जर्मनी की ओर जा रहा था तो मुझको इस देश के इतिहास को छोड़ कर जो यहाँ की खास चीज़ पता थी वो थी यहाँ की कारें;मर्सडीज़ बैंज़,ओपल,वोक्स वैगन आदि और ये कि मेरे इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सर जी ऐन झा हॉस्टल में मेरे रूम मेट रहे तथा मेरे घनिष्ठ मित्र श्री धीरेंद्र पांडे के घर वाले जर्मनी को कालीन निर्यात करते थे।यानी कि वहाँ के अपने से सम्बंधित व्यापार के विषय में मेरी जानकारी ना के बराबर थी पर मुझे क्या पता था कि आने वाले कुछ वर्षों में जर्मनी का मेरे व्यापारिक जीवन को एक नया मोड़ देने में एक अहम स्थान होने वाला था।विमान में एयरहोस्टेस घोषणा कर रही थीं कि हमारा विमान शीघ्र ही फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर उतरने वाला था और मैं भी अपने मस्तिष्क के विचारों की यात्रा पर ब्रेक लगा कर तैयार होने लगा था एक नये देश की धरती और लोगों से रू ब रू होने के लिए।
फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डा पेरिस के चार्ल्स डि गॉल हवाई अड्डे की भांति कलात्मक और सुंदर नहीं बना हुआ था किंतु बड़ा था,ग्रेनाइट के शानदार फर्श थे।यह एक भव्य और विशाल एयरपोर्ट प्रतीत हो रहा था।यहाँ ये बताना भी समीचीन होगा कि विश्व की पहली एयरलाइंस The Deutsche Luftschiffahrts-Aktiengesellschaft की स्थापना भी 16 नवम्बर 1909 को जर्मनी के फ्रैंकफर्ट ऐम मेन में ही हुई थी।
मैंने स्विट्ज़रलैंड से ही अपने रुकने का रिज़र्वेशन 8 दिन के लिए इस्कॉन,हाइडलबर्ग में करवा लिया था।एयरपोर्ट से अपना सारा सामान लेकर में मेट्रो ट्रेन से फ्रैंकफर्ट मेन स्टेशन जिसको वहाँ की भाषा में Frankfurt (Main) Hauptbahnhof कहते हैं आ गया और वहाँ से मैंने हाइडलबर्ग के लिए ट्रेन ले ली।फ्रैंकफर्ट से हाइडलबर्ग का लगभग 78 किलोमीटर का ये सफर करीब सवा घंटे का था लेकिन गजब की ट्रेन,गजब के दृश्य और फ्रैंकफर्ट की ऊँची गगनचुम्बी इमारतों के शहर से हरियाली भरे पहाड़ी शहर में पहुँच जाना एक स्वप्न की भांति था।हाइडलबर्ग के स्टेशन से टैक्सी ले कर मैं इस्कॉन वाले पते पर पहुँचा और वहाँ रिसेप्शन पर पहुँच कर मैंने अपना परिचय बताया और कहा कि मेरा शहर फिरोजाबाद भी भगवान श्री कृष्ण के जन्मस्थान मथुरा के पास ही है और लगभग ब्रज का ही अंग है।वहाँ इस्कॉन के कुछ अनुयायी जो वहीं रहते थे खड़े हुए थे और मेरा मथुरा कनैक्शन सुनते ही उनमें से एक ने मेरा सारा सामान,अटैची आदि उठाया,मुझको मेरा कुछ भी सामान उठाने नहीं दिया और पहली मंजिल पर जीना चढ़ कर जिस कमरे में मुझको ठहरना था वहाँ ले गया।
Excellent memoir I have gone through in my life
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