सिंदबाद ट्रैवल्स-39इटली-1रोमSindbad Travels-39Italy-1Rome
सिंदबाद ट्रैवल्स-39
इटली-1
रोम
Sindbad Travels-39
Italy-1
Rome
Co-ordinates 41° 53' 36" N
12° 28' 58" E
भारत से समय 3:30 घण्टे पीछे
जी एम टी से + 2 घंटे
फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे से रोम के लिए जहाज चल चुका था और यात्राओं में जैसी मेरी आदत बन चुकी थी मैं भी पीछे की घटनाओं को याद करने लगता था और उनका विश्लेषण करने लगता था तथा साथ ही साथ अगले डेस्टिनेशन के लिए अपने आप को तैयार भी करने लगता था।जहाज अब रोम की तरफ बढ़ रहा था और मैं सोच रहा था कि मैं कितना भाग्यशाली हूँ कि मैंने एक नए और बहुत कठिन काम को करने का बीड़ा उठाया तो मेरे मम्मी-पापा,भाई,बहिन,बहनोई और मेरी पत्नी सबने न सिर्फ उत्साहवर्धन किया बल्कि मेरे लिए सारे साधन जुटाने में यथासम्भव मदद की।मेरे मामा लोग,मेरे यूनिवर्सिटी हॉस्टल के सीनियर सभी ने किसी न किसी रूप में मेरे इस सफर को आसान बनाने में मेरी मदद की और इन सबके बिना मैं यह काम शुरू कर ही नहीं सकता था।अब मैं अपने पहली विदेश यात्रा के अंतिम चरण में था,एक्सपोर्टर बनने का मेरा स्वप्न तो पूरा हो ही चुका था पर मेरे शहर फिरोजाबाद और भारत के कांच उद्योग के लिए इसी यात्रा से आगे चलकर एक बिल्कुल नए व्यापार की शुरुआत होने वाली थी और आगे चल कर यह व्यापार फिरोजाबाद शहर के प्रमुख व्यापारों में होने वाला था;कुछ वर्षों में ही काँच के निर्यात के प्रमुख सेंटर के रूप में फिरोजाबाद अपनी पहचान बनाने वाला था।
मैं इन्हीं विचारों में डूबा हुआ था और सोच रहा था कि अब इटली में तो सिर्फ घूमना-पर्यटन करना है।हाँलाँकि आगे चलकर इटली से भी हमारा अच्छा व्यापार हुआ।फ्रैंकफर्ट से रोम की फ्लाइट लगभग 2 घण्टे या उस से कुछ कम समय की थी और रोम के इस्कॉन में मैंने अपने रुकने का रिज़र्वेशन फोन से करवा ही लिया था तथा फ्रैंकफर्ट से ही रोम से दिल्ली 24 अक्टूबर का वापिसी का फ्लाइट का रिज़र्वेशन भी करवा लिया था क्योंकि अब लगभग डेढ़ महीने के लगभग का समय होने को था घर से निकले और मुझको घर की याद सताने लगी थी।
रोम के एयरपोर्ट पर इमिग्रेशन आदि आराम से हो गया।लियोनार्डो दा विंची नाम का रोम का हवाई अड्डा तो खूबसूरत होना ही था और था भी।अपना सामान आदि लेकर मैं टैक्सी लेकर रोम के एयरपोर्ट से इस्कॉन टेम्पल-गेस्ट हाउस को चल दिया जो वीआ सारदेगना पर था।
इस्कॉन के गेस्ट हाउस पहुँच कर मैंने देखा कि यह हाइडलबर्ग वाले एस्टैब्लिश्मेन्ट से काफी बड़ा था।यहाँ एक बहुत बड़ा बंगला जैसा था जिसके चारों तरफ बगीचा,खाली जगह,पेड़ पौधे इत्यादि थे।यहाँ का पूजा वाला हॉल भी काफी बड़ा था।मुझको जो कमरा मिला उसमें बाकायदा एक साइड में मेरे लिए लकड़ी का बना अच्छे गद्दे वाला बैड था और कमरे में एक कुर्सी भी थी।इस कमरे या गेस्टहाउस के इस हिस्से का रास्ता बाहर बगीचे के पास की खाली जगह से से एक घुमावदार लोहे की सीढ़ी से होकर जाता था।वहाँ बहुत सारी कर खड़ी थीं और इसकी बाउंड्री के पास ही जो स्थान था वो पुरानी कारों का डंप करने का स्थल था तो वहाँ तो न जाने कितनी कारें कबाड़ के रूप में खड़ी दिख रही थीं और ये देखना मेरे लिए नई बात थी और आश्चर्य की भी।
जैसा मैंने बताया कि इस्कॉन का यह सेंटर काफी बड़ा था और शाम को यहाँ के मन्दिर में कीर्तन पूजा आदि के दौरान काफी लोग और रौनक दिखती थी।वहीं पर मद्रास (अब चेन्नई) से आये एक रिटायर्ड कर्नल साहब भी ठहरे हुए थे जो लगभग 60 वर्ष से ऊपर की उम्र के थे लेकिन काफी ऐक्टिव थे वो और उनकी पत्नी दोनों भी घूमने आए हुए थे।वो मुझसे कुछ पहले आये थे इसलिए साथ होने पर उनसे मुझको कुछ जानकारी भी मिली और अच्छा भी लगा।कर्नल साहब से ही मुझको मालूम पड़ा कि रोम में तम्बाकू की दुकानें काफी हैं जिनको वो तबाची बुलाते थे।इन तम्बाकू की दुकानों पर ही अधिकतर फोन के कार्ड मिलते थे।वो मोबाइल फोनों का जमाना नहीं था तो कार्ड खरीदकर फिर उसके माध्यम से ही टेलीफोन बूथ से घर बात होती थी।
इस्कॉन टेम्पल में एक वहीं के नागरिक भक्त थे जिनका टैक्सी का काम था।ये हम लोगों के काफी काम आए।रोम पहुँचने के कुछ समय बाद इस्कॉन से मैं और कर्नल दम्पत्ति इसी डिवोटी की टैक्सी से रोम शहर का एक चक्कर लगाने निकले।ये कार एक साधारण सी कार ही थी और जर्मनी की मर्सडीज़ टैक्सी के बाद वो अच्छी लग ही नहीं सकती थी।
रोम शहर में पहुँच कर उसकी भव्यता आँखे खोलने वाली थी।यूरोप के कुछ ही शहर हैं जहाँ आपको इतनी भीड़ और चहल पहल दिखती है।टैक्सी वाले भक्त महोदय ने हमको रोम के प्रसिद्ध कोलेजियम,फॉण्टाना द ट्रेवी, पैन्थोंन आदि प्रमुख स्थलों के सामने गाड़ी से घुमाया फिर वो हमको वेटिकन सिटी ले गए जो दुनिया का सबसे छोटा देश है और रोम का अंदर ही स्थित है।हम लोग कुछ स्थानों पर कार से उतरे लेकिन हम लोग बातचीत में यह तय कर चुके थे कि आज रोम शहर का एक चक्कर कार से ऐसे ही लगा लें फिर एक दिन पूरे दिन तसल्ली और तरीके से रोम शहर को घूमना होगा क्योंकि रोम इतना बड़ा है तथा वहाँ पर्यटकों की रुचि के इतने सारे स्थल हैं कि एक दिन में उन सबको देखना सम्भव ही नहीं है।
रोम को वहाँ के स्थानीय लोग रोमा कहते हैं और स्वयम को रोमानो पहले इटैलियानो बाद में और इसमें वो गर्व महसूस करते हैं जैसे हमारे यहाँ मुम्बईकर और इलाहाबादी करते हैं।रोम को city of 7 hills भी कहा जाता है।रोम इटली के लैज़ियो रीजन में इटली के मध्य भाग में बसा हुआ है टाइबर नदी के तट पर।यह शहर थैरेनियन समुद्र से केवल 24 किलोमीटर की दूरी पर है और समुद्र तल से 13 मीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है।रोम एक ऐसा शहर है जिसका काफी हिस्सा दीवारों के अंदर बसा हुआ है।यहाँ की जलवायु मेडिटेरेनियन है,सूखी गर्मियां और हल्के ह्यूमिड जाड़े हाँलाँकि अक्टूबर के महीने में वहाँ काफी गलन वाली सर्दी थी भले ही स्विट्ज़रलैंड और जर्मनी से कम थी।
रोम का लगभग 3000 साल का इतिहास है।एक किंवदंती तो यह बताती है कि दो जुड़वां भाई रोमलस और रीमस थे जिनको एक मादा भेड़िया ने अपना दूध पिला कर पाला था।उन्होंने एक शहर बनाने का तय किया लेकिन एक वाद-विवाद में उनमें ऐसा झगड़ा हुआ कि रोमलस ने अपने भाई को जान से मार दिया और शहर का नाम उसके नाम पर रोम पड़ गया।आज रोम यूरोपियन यूनियन का तीसरा सबसे बड़ी आबादी वाला शहर है।जब मैं 1991 में यहाँ पहली बार गया तो यहाँ की करेंसी लीरा या मिलेलीरा थी (अब यूरो है) ।रोम को पश्चिमी सभ्यता और ईसाई सभ्यता का उद्गम स्थल और पालने वाले स्थल माना जाता है और यह कैथोलिक चर्च का केंद्र स्थल भी है।ईसाइयों के सर्वोच्च धर्म गुरु पोप का निवास स्थान भी रोम के अंदर स्थित वैटिकन सिटी में ही है।रोम की स्थापना सन 753 ईसा पूर्व हुयी थी ऐसा माना जाता है और यह उन प्राचीनतम शहरों में है जिसमें लोगों का रहना शुरू से ही और लगातार रहा है।रोम पहले रोमन किंगडम फिर रोमन गणतंत्र और फिर रोमन साम्राज्य की राजधानी रहा और इसको पहला मेट्रोपोलिस-महानगर और पहला इम्पीरियल सिटी भी माना जाता है।मध्यकाल में रोम Papacy यानी ईसाई पोप राज्य के प्रभाव और राजनैतिक नियंत्रण में चला गया और 8वीं शताब्दी से सन 1870 तक पेपैल राज्य की राजधानी रहा।यूरोपीय पुनर्जागरण काल से रोम में एक जबरदस्त सांस्कृतिक , कला, वास्तुकला आदि सभी का विकास हुआ जिसने रोम को एक ऐसा शहर बना दिया जिसका कोना-कोना देखने लायक है और इतिहास से जुड़ा है।रोम से अनगिनत विश्व प्रसिद्ध चित्रकार,कलाकार,मूर्तिकार,दार्शनिक आदि का सम्बंध रहा है और जब आप रोम में कहीं भी घूम रहे होते हैं तो उसके जर्रे-ज़र्रे से यह बात पता चलती है।रोम के आप किसी भी कोने में जाएं आपको एक बहुत ही सुंदर फाउंटेन/फव्वारा अवश्य देखने को मिलेगा जहाँ मूर्तिकला के अद्भुत उदाहरण होंगे,हर की अपनी एक कहानी होगी और पानी आईने लायक होगा।1960 में रोम में ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों का आयोजन हुआ था।यहाँ FAO,IFAD आदि जैसे अनेकों वैश्विक संगठनों के मुख्यालय भी स्थित हैं।रोम में आप किसी भी स्थान पर जाएं आपको कला का कोई न कोई उदाहरण देखने को अवश्य मिलेगा और तभी तो कहा भी गया है कि Rome was not built in a day.
अगले दिन मेरा वेनिस और फ्लोरेंस जाने का कार्यक्रम था तो हमने तय किया कि उसके अगले दिन रोम शहर को ठीक से देखेंगे।इसके बाद हमारे उस कृष्ण भक्त टैक्सी वाले ने हमको वापिस इस्कॉन सेंटर पर छोड़ दिया।
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