सिंदबाद ट्रैवल्स-40इटली-2फ्लोरेंस Sindbad Travels-40Italy-2Florence

सिंदबाद ट्रैवल्स-40
इटली-2
फ्लोरेंस 

Sindbad Travels-40
Italy-2
Florence 

अगले दिन सुबह ही सुबह मैं तैयार हुआ और कृष्ण भक्त टैक्सी वाले ने मुझको रोमा टरमीनी रेलवे स्टेशन छोड़ दिया जहाँ से मुझको ठीक 8 बजकर 2 मिनट की ट्रेन फ्लोरेंस के लिए लेनी थी और फिर वहाँ से वेनिस जाकर रात को ही लौटना था।जैसा मैं पहले भी जिक्र कर चुका हूँ कि मेरे पास फर्स्ट क्लास का यूरेल का पास था और रेल का टाइमटेबल भी मुझ पर था।मैं रेलवे स्टेशन पहुँचा तो जब प्लैटफॉर्म पर पहुँचा तो क्या देखता हूँ कि टीटी-गार्ड के हाथ की झंडी तैयार है,मुँह में सीटी लगी है जो वो एक हाथ से पकड़े है और झंडी वाले हाथ में बंधी घड़ी पर उसकी निगाह हैं।मुझको दौड़ता देख कर उसने इशारा किया कि आ जाओ,मैंने दौड़ते हुए ही ट्रेन पर Firenze यानी फ्लोरेंस लिखा देखा और चढ़ गया,गार्ड ने जब देखा कि मैं आराम से ट्रेन में चढ़ गया तब उसने सीटी बजायी और ट्रेन चल दी।ट्रेन 15-20 मिनट चली थी कि एक स्टेशन आया और ट्रेन उस पर रुक गयी,मैंने टाइम टेबल में देखा तो उस स्टेशन पर ट्रेन का स्टॉपेज था ही नहीं पर मैंने सोचा कि शायद कोई कारण होगा।थोड़ी देर बाद ट्रेन एक और स्टेशन पर रुक गयी तो मैं कुछ परेशान हुआ और तभी टीटी महोदय मेरे डिब्बे में आये तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं किसी गलत ट्रेन में बैठ गया हूँ,मुझे तो फ्लोरेंस जाना है तो उन्होंने कहा कि ट्रेन तो फ्लोरेंस ही जा रही है।इस पर मैंने टाइम टेबल दिखाते हुए उनसे कहा कि इसमें तो इस ट्रेन को सुपरफास्ट बताया है पर ये तो रुकते हुए चल रही है।इस पर टीटी बहुत हँसा और उसने बताया कि भाई सुपर फास्ट ट्रेन उसी प्लैटफॉर्म से 8 बज कर 2 मिनट पर जानी थी पर आप तो 8 बजे की ट्रेन में बैठ गए हो और ये तो आराम से रुकते हुए जाएगी।अब मेरी समझ में दो मिनट का महत्व और यूरेल कि समयबद्धता का महत्व समझ में आया।इस बात का परिणाम यह हुआ कि अब मेरे लिए उसी दिन आगे वेनिस जाकर रोम लौटना  सम्भव नहीं था तो मैंने अपने कार्यक्रम में तब्दीली की और उस फ्लोरेंस से आगे पीसा तक जाकर रात को वापिस रोम लौट आया और फिर मेरा वेनिस जाने का मुहूर्त लगभग 6 वर्षों के बाद ही बन पाया।
फ्लोरेन्स रोम से उत्तर में लगभग 162 किलोमीटर की दूरी पर है।यह मध्य इटली में टस्कनी कंट्री साइड में स्थित है और टस्कनी रीजन की राजधानी है।यहाँ के अक्षांश देशांतर के को-ऑर्डिनेट्स 43° 76' 96" N तथा 
11° 25' 58" E हैं।
फ्लोरेंस या फ़िरंजी मध्यकाल में यूरोप के व्यापार का एक बहुत बड़ा केंद्र था और यूरोप के सबसे अमीर शहरों में हुआ करता था।यह एक बहुत ही सुंदर और कलात्मकता युक्त शहर है।इसको यूरोपीय रैनिसां यानी पुनर्जागरण की जन्मस्थली भी कहा जाता है।यूनेस्को ने यहाँ के ऐतिहासिक केंद्र को 1982 में वर्ल्ड हेरिटेज साइट में शामिल किया है।जब मैं फ्लोरेंस पहुँचा तो मुझको याद आया कि हम लोगों को बी ऐ की क्लास में रैनिसां पढ़ाते हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हम लोगों के विद्वान अध्यापक आदरणीय श्री वी सी पांडे जी एक नाम लेते थे जो मुझको आज तक याद है फ्रा फिलिप्पो लिप्पी का।फिलिप्पो लिप्पी या लिप्पो लिप्पी का जन्म फ्लोरेंस में ही हुआ था और उनकी गिनती पुनर्जागरण काल के प्रसिद्ध पेंटरों में होती है। Madonna and Child उनकी प्रसिद्ध कलाकृतियों में है।
इटली की फैशन की दुनिया में फ्लोरेंस का बहुत बड़ा स्थान है।यहाँ का प्रसिद्ध चर्च गौथिक वास्तुकला का एक शानदार उदाहरण है।जब आप वहाँ पहुँचते जहाँ एक बड़ा सा चौक है,बासिलिका है सामने शानदार वास्तुकला वाला गिरजाघर है और साइड में प्लेन दीवाल की खिड़कियों वाली बहुमंजली इमारतें हैं तो उस दृश्य को आप मंत्रमुग्ध होकर देखते ही रह जाते हैं।इस शहर का आधुनिक कूटनीति के चाणक्य मैकियावेली Machiavelli से भी नाता रहा है जिसकी यह जन्मस्थली और कर्म स्थली थी और मैडीची Medici और मैडीची परिवार का भी यहाँ के इतिहास से नाता रहा।
फ्लोरेंस में घूमते में मुझको एक महिला अपनी गोद में एक खिलोने जैसा कुत्ता ले जाते दिखी।हम लोग सदैव से कुत्तों को पालते रहे हैं और हमारे परिवार में इसका शौक है और इनकी नस्लों की जानकारी भी लेकिन जब तक मैंने पास से नहीं देख लिया तब तक उस छोटे से कुत्ते को मैं वास्तविक के स्थान पर खिलौना ही समझता रहा।फ्लोरेंस से मैंने  सैमसोनाइट का ग्रे कलर का एक बहुत ख़ूबसूरत सूटकेस खरीदा जो अभिनव ने ले लिया था।मैं जब भी विदेश जाता था तो अपने घरवालों-परिवारीजन के लिए एक सूटकेस अवश्य लाता था क्योंकि उस दशक तक भारत में इतने अच्छे सूटकेस नहीं मिलते थे।
फ्लोरेंस का सर्द मौसम और सुंदर नजारा ऐसा था कि मन वहाँ से चलने का नहीं हो रहा था किंतु यात्री भला कहीं रुक सकता है तो मैं भी आगे की ट्रेन लेकर प्रसिद्ध पीसा की मीनार देखने हेतु पीसा शहर को चल दिया।

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