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इलाहाबाद विश्वविद्यालय:चिंताएं और सुझाव

इलाहाबाद विश्वविद्यालय:चिंताएं और सुझाव इलाहाबाद विश्वविद्यालय देश के आधुनिक समय के प्राचीनतम शिक्षण संस्थानों में एक अलग स्थान रखता है.इस विश्वविद्यालय का एक गौरवप...

दादाजी बनारसी दास जी का पत्र बाबा सुशील चंद्र जी को

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आज बाबा स्व0 सुशील चंद्र जी के पुराने कागजों को व्यवस्थित करने के क्रम में एक और अनमोल खजाना हाथ लगा.इसमें दादाजी स्व0 बनारसी दास जी का एक पत्र,एक लेख और उनसे सम्बन्धित अखबार ...

फ़िरोज़ाबाद जिले की 30वीं वर्षगांठ पर बधाई

आज जब फ़िरोज़ाबाद जनपद की स्थापना के 30 वर्ष पूरे होने पर यह लेख लिखने बैठा हूँ तो मुझको याद आ रहा है 5 फरवरी 1989 का वो दिन और उस दिन का माहौल जब फ़िरोज़ाबाद के टीबी अस्पताल ग्राउंड में म...

Mehrauli Archeological Park:-Rajon Ki Baoli मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क:-राजों की बावली

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Mehrauli Archeological Park:- Rajon Ki Baoli   मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क:- राजों की बाउली या बावली/बावड़ी/बैन/बाव जैसा मैं पहले लिख चुका हूँ कि मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क में बलबन का मकबरा,जमाली कमाली की मस्जिद मैं देख चुका था लेकिन वहाँ चारों तरफ अलग अलग किस्म के इमारतों के अवशेष अथवा इमारतें और माहौल ऐसा था कि मन हो रहा था कि इस हरियाली भरे जंगल नुमा इलाके में और भी देखा जाए कि इतिहास के कौन कौन से जाने-अनजाने पृष्ठ इधर-उधर बिखरे हुए हैं।सही बात यह भी थी कि मुझको खुद भी पूरा ठीक से मालूम नहीं था कि इस परिसर में हमारे देश के पुरातत्व विभाग ने कौन-कौन से ऐतिहासिक खजाने सहेज कर रखे हुए हैं.जमाली-कमाली मस्जिद के पास खड़ी अपनी कार मैंने स्टार्ट की और उस परिसर में और आगे की ओर बढ़ चला.रास्ते में लाल बलुआ पत्थर के ‘स्थान और दिशा सूचक’ चिन्ह थे जिन पर काले रंग से ‘कुली खाँ का मकबरा’ और ‘राजों की बावली’ लिखा हुआ था. इस स्थान पर आने के पहले मेरी जानकारी बावड़ियों के विषय में बहुत ही कम थी और सच कहूँ तो शाहरुख खान और रानी मुखर्जी अभिनीत एक फ़िल्म आयी थी ‘पहेली’ तो मैंने इस से पहले बावड़ी ...