सिंदबाद ट्रैवल्स:- हॉलैंड या द नीदरलैंड्स एम्सटर्डम में उच्श्रृंखल लोगों से सामना

सिंदबाद ट्रैवल्स
हॉलैंड या द नीदरलैंड्स
एम्सटर्डम में उच्श्रृंखल लोगों से सामना

हॉलैंड से मेरी बचपन की याद ऐसे जुड़ी हैं कि हमारे पापा का हॉलैंड के भारत में राजदूत,हॉलैंड के रेल मंत्री जो फिलिप्स कंपनी के डायरेक्टरों में थे या मालिक आदि कुछ थे उनसे घनिष्ट सम्पर्क था।यह बात 1968-69 की होगी कि वो लोग हमारी तत्कालीन फैक्ट्री हनुमान ग्लास वर्क्स में अपने परिवार सहित आये थे।हम लोग छोटे-छोटे बच्चे थे तो हम लोगों को विदेशी लोगों के प्रति कौतूहल भी था और आकर्षण भी।अंग्रेज़ी थोड़ी ही आती थी तो बार-बार हम लोग उनके बच्चों के पास जाते जो 18-20 साल के रहे होंगे और उनसे बस एक ही बात पूछते कि what is your name? मुझको हनुमान ग्लास की अपने बाबा की गद्दी का वो दिन आज जैसा अभी भी याद है जहॉं हम लोग यह खेल कर रहे थे।हमारे बार-बार एक ही बात पूछने पर उनमें से एक लड़के ने झल्ला कर मुझसे कहा No names.यह किस्सा जब हुआ तो मैं 6-7 साल का रहा था लेकिन हॉलैंड का नाम मुझको तब से मालूम और याद था।
अपनी विदेश यात्राओं में मुझको कई बार एम्स्टर्डम जाने का अवसर मिला क्योंकि जब भी मैं KLM एयलाइंस की फ्लाइट लेकर जाता था तो वो पहले एम्स्टर्डम ही लेकर जाती थी।जब पहली बार ऐसा हुआ तब मेरे पास हॉलैंड का वीजा नहीं था (तब Schengen Visa शुरू नहीं हुआ था जो अब यूरोप के बहुत सारे देशों के लिए एक ही एकीकृत वीज़ा है) लेकिन वहाँ के इमिग्रेशन वाले ने मुझको अपनी तरफ से वीज़ा वहीं पर दे दिया और कहा जाये एम्स्टर्डम देखिए सुंदर जगह है।मेरी अगली फ्लाइट दूसरे दिन थी और मेरे रुकने का इंतज़ाम एयरलाइन ने ही एयरपोर्ट के पास के एक 5 स्टार होटल में कराया था।मैं टैक्सी लेकर एम्स्टर्डम शहर गया और का बाज़ार तथा शहर मुझको बहुत चमक दमक वाला लगा।बाज़ार के पास शहर में ही एक स्थान पर बगीचे जैसी सुंदर जगह पर मैं अपना वीडियो कैमरे का बैग एक साइड में रखकर कुछ फोटोग्राफी कर रहा था कि मैंने क्या देखा कि बिल्कुल बॉलीवुड जैसी फिल्मी स्टाइल में खुली जीप जैसी एक कार पर चार पाँच नौजवान लड़के-लड़कियों सवार थे और वो तेजी से गाड़ी चलाते हुए जहाँ मेरा कैमरे का बैग रखा था उस तरफ बढ़े और एक लड़के ने गाड़ी के दरवाजे से अधलेटा सा होते हुए फिल्मी स्टाइल में ही मेरा बैग उठाने को अपना हाथ बढ़ाया और इस समय वो लोग खूब चीख रहे चिल्लाते हुए शोर मचा रहे थे मतलब हल्ला गुल्ला करते हुए घूम रहे थे।जब तक वो गाड़ी मेरे बैग के पास पहुँचती उससे पहले पलक झपकते ही मैं अपना बैग उठा कर वापिस अपने स्थान पर था और ये पार्टी हल्ला मचाते तेजी से अपनी गाड़ी दौड़ाते हुए आँखों से ओझल हो गयी।मेरे पास कुछ लोकल लोग थे जो यह वाकया देख रहे थे उन्होंने मुझसे कहा कि आपको अव्वल तो बैग ऐसे छोड़ना नहीं था और फिर उन लोगों के आने पर  ये नहीं करना था।मेरे पूछने पर उन्होंने कहा कि ऐसे हुड़दंगी नौजवानों की टोली अक्सर नशे में होती है और हो सकता है आपके ऐसा करने पर ये आप पर हमला कर देते।खैर घटना तो हो चुकी थी पर मुझको आगे के लिए एक जानकारी और सबक मिल गया था।
मैं शहर में आकर रेलवे स्टेशन से बाहर निकल कर दाहिने हाथ की दिशा में कुछ आगे बढ़ कर घूम कर स्टेशन के दाहिने हाथ पर ही थोड़ा पीछे स्थित इबिस Ibis होटल में रुका।मैं यूरोप की यात्राओं में कोशिश करता था कि मेरा ठहरने का होटल रेलवे स्टेशन के आसपास ही हो।इस से एक तो घर जैसी फीलिंग रहती थी क्योंकि मेरा घर फिरोजाबाद में बिल्कुल रेलवे स्टेशन के पास ही है।यदि दो तीन प्लेटफॉर्म और बन जाएं तो शायद ट्रेन मेरे घर पर मेरे कमरे के सामने ही रुकेगी।स्टेशन के पास होटल लेने से एक आराम तो यह रहता है कि आप यदि कहीं होकर लौटें और देर भी हो जाये तो बस स्टेशन के  बाहर निकल कर ही होटल है।दूसरे यूरोप में बस स्टेशन के पास का ही इलाका ऐसा होता है जहाँ देर रात तक थोड़ी चहल-पहल दिखती है और रात को भूख लगे तो स्टेशन पर कुछ खाने को भी मिल जाता है।एम्स्टर्डम सेंट्रल स्टेशन काफी बड़ा और सुंदर है।एम्स्टर्डम रेलवे स्टेशन से बाहर निकलें सुर सीधे सामने वाली सड़क  Damrak पर  आगे चलकर लगभग 8-10 मिनट के वाकिंग डिस्टेंस पर गांधी रेस्टोरेंट है जो अपने भारतीय खाने के लिए प्रसिद्ध है।मैं जितने भी दिन एम्स्टर्डम रहा हूँ मेरा कम से कम एक वक्त का खाना तो इस रेस्टोरेंट में होता ही था।
एम्स्टर्डम ऐम्सटेल नदी के मुहाने पर बसा शहर है पर यूरोप में नदी के मुहाने पर बसे शहरों में उन लोगों ने नदी की विभिन्न धाराओं का अपने शहर की सुंदरता बढ़ाने में नहरों/कैनाल का रूप देकर ऐसा सुंदर प्रयोग किया है जो देखने योग्य है।वहाँ मैं जब भी गया तो नदी के मुहाने की सोच कर मुझको कोलकाता, सुंदरबन, हुगली आदि स्थान ध्यान में आये और मुझको लगा कि हम ऐसा क्यों नहीं कर सकते हैं।एम्स्टर्डम शहर का नाम वहाँ की स्थानीय भाषा के एक अपभ्रंश जिसका अर्थ Dam या बांध होता है उससे पड़ा है।
एम्स्टर्डम में फरवरी मार्च में मौसम काफी ठंडा ही होता है और काफी ह्यूमिड भी हो जाता है।
हॉलैंड के लोग अपने को डच कहना पसंद करते हैं।यहाँ के लोग अमूमन काफी लंबे,मददगार,थोड़े बातून भी,ब्लॉन्ड रंग के बाल और नीली आँखों वाले ज्यादा लगे।इन लोगों का चेहरा अमूमन थोड़ा बड़ा या चौड़ा दिखा और इनकी कद-काठी लंबी पतली वाली लगी।यहाँ के पुरुष आम तौर पर 6 फुट या उससे लंबे और महिलाएं अमूमन 5 फिट 6 इंच या उससे लंबी ही हैं।

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