सिंदबाद ट्रैवल्स:- हॉलैंड/द नीदरलैंड्स-एम्सटरडम में ठंड खाने का किस्सा

सिंदबाद ट्रैवल्स
हॉलैंड/द नीदरलैंड्स
एम्सटरडम में ठंड खाने का किस्सा

एम्सटर्डम शहर फाइनेंस और ट्रेड का एक बहुत बड़ा केंद्र है।यहाँ के स्टॉक एक्सचेंज की स्थापना सन 1602 में हुई थी।इसको विश्व का सबसे पुराना लेकिन आधुनिक सिक्युरिटीज का स्टॉक एक्सचेंज मार्केट माना जाता है।एम्स्टर्डम में घूमने के लिए असंख्य कैनाल हैं।Van Gogh Museum है,डैम स्क्वायर है।एम्स्टर्डम बहुत ही सुंदर शहर है।डाउनटाउन में यहाँ शाम के वक़्त काफी भीड़ होती है।यहाँ की नाइट लाइफ काफी मशहूर है।यहाँ एक इलाका ही रेड लाइट डिस्ट्रिक्ट है और यहाँ की संस्कृति के अनुसार इनके लिए वो इलाका भी इनके शहर का एक जानामाना स्थान है। एम्स्टर्डम समुद्र तल से लगभग 2 मीटर नीचे बसा हुआ शहर है और इस वजह से यहाँ की इमारतों का आर्किटेक्चर कुछ ऐसा है कि वो पीछे को कुछ झुकी सी बनी हुई लगती हैं।यहाँ का मौसम ऐसा है कि कब धूप निकली है और कब बारिश होने लगे पता नहीं।हॉलैंड में शहरों के बाहर आपको विंड मिल्स काफी देखने को मिलती हैं यानी कि बहुत विशाल बड़े बड़े टावर खड़े हैं और उन पर बहुत बड़े बड़े पंखे लगे होते हैं जो हवा की गति के अनुसार घूमते हैं और उनसे ऊर्जा उत्पादित होती है।एम्स्टर्डम में कुछेक अन्य बड़े यूरोपीय शहरों से अधिक एक चीज़ और बहुत ध्यान आकर्षित करती है और वो है यहाँ की साइकलें।यहाँ लोग सायकिल पर चलना बहुत पसंद करते हैं और साइकिलों की यहाँ भरमार है।एम्स्टर्डम की ख़ूबसूरती बिल्कुल अलग किस्म की है।ठंडी हवा,शहर के बीच में नहरें और उन ओर बनी पुलिया या ब्रिज जो शहर में 900 के आसपास हैं,साइकिलो पर चलते लोग या पैदल घूमते लोग और हॉं यहाँ की एक बात और बहुत खास है कि यहाँ ड्रग्स लीगल हैं तो यहाँ किसी भी किस्म का नशा करना अपराध नहीं है और नशे की वस्तुएं यहाँ खुलेआम मिलती हैं।
एम्स्टर्डम में एक दिन एक बड़ा मजेदार किस्सा यह हुआ कि मैं एक दुकान से कुछ खाने पीने का सामान लेने गया तो मैंने देखा कि वहाँ खड़े लोगों में चार लड़कियां भी थीं जिनमें दो लगभग 15-16 वर्ष की और दो लगभग 8-9 वर्ष की थीं।उनकी शक्लों में कुछ साम्य भी प्रतीत हुआ।छोटी दोनों बच्चियां बहुत शोर मचाते खेल रहीं थीं।मुझको कुछ उत्सुकता सी हुयी और मैं उनके पास गया तो मालूम पड़ा कि वो जुड़वां बहनों के दो सैट थे यानी कि दो बड़ी जुड़वां और दो छोटी जुड़वां।यह देख कर मुझको ख्याल आया कि बिल्कुल ऐसे ही मेरी पत्नी के यहाँ है।मेरी पत्नी रचना और उनकी जुड़वां बहन स्वप्ना तथा इनकी दो छोटी जुड़वां बहनें ऋचा और शिखा।ईश्वर की भी माया अजीब है उसने एक ही दुनिया में अलग अलग स्थानों पर एक जैसी न जाने कितनों की कहानियाँ बनाई हैं।
एम्स्टर्डम में एक दिन ऐसा हुआ कि मुझको लगा कि मुझको सर्दी लग गयी है तो मैं होटल से निकल कर एम्स्टर्डम सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर स्थित एक होम्योपैथी दवाइयों के स्टोर पर गया और मैंने कहा कि भाई मुझको ठंड लग गयी है और ऐसा लगता है कि बुखार न आ जाये तो मुझको कोई दवा दे दो तो उन लोगों ने मुझको दावा देने से साफ मना कर दिया और कहा कि हम ऐसे दावा नहीं देते जब बुखार आ जाये तब आना तब ही दवा दे सकते हैं।मैंने कहा हमारे देश में तो इतनी तकलीफ बताने पर डॉक्टर दवा दे देते हैं पर वो न माने और मुझको दवा नहीं दी।अब मेरी स्थिति बहुत खराब थी क्योंकि मुझको सर्दी का जबरदस्त असर महसूस हो रहा था,गला कफ से बंद हुआ जा रहा था,जुकाम भयंकर था और थोड़ी देर में तो बुखार भी लगा काफी हो जाएगा।मेरे लिए ऐसे बीमार पड़ने की कई समस्या थीं एक तो परदेस फिर पूरे हफ्ते बायर्स से आसपास जाकर मिलने अपॉइंटमेंट्स थे। हमारा काम करने का सिस्टम था कि हम एक शहर में रुक जाते और फिर उसके आस पास के इलाके वहीं से ट्रेन से कवर करते थे जिसके लिए ह्माफी पास फर्स्ट क्लास वाला यूरेल पास होता था।
मैं पहले भी जिक्र कर चुका हूँ कि हम दोनों भाइयों ने व्यापार का ऐसा तरीका बनाया था कि कुछ व्यापारी और देश मैं ज्यादा देखता था और कुछ अभिनव।जैसे इंग्लैंड,बेल्जियम, ऑस्ट्रिया आदि देशों में उनका जाना अधिक रहा हाँलाँकि हॉलैंड, जर्मनी आदि अभिनव भी काम लेने जाते थे।इंग्लैंड के मिस्टर ली, विलियम शिप्पी, विलियम हिल्ली आदि अनेकों बायर से अभिनव का सम्पर्क ज्यादा रहता था।अभिनव जब हॉलैंड आये तो एक बार रात को उन्होंने बैलून में बैठ कर हवा में हॉलैंड-एम्स्टर्डम की सैर भी की थी बाद में मेरी बेटी ऐश्वर्या और शायद अर्पित ने भी बैलून की सैर की।खैर तो मैं किस्सा अपनी तबियत का बता रहा था।तो अब मैं तबियत से बहुत परेशान था,दुकानदार दवा देने को तैयार नहीं था तब मुझको याद आया कि हम लोग जब छोटे बच्चे थे तो हमारी दादी और फिर मम्मी और बाद में हमारे छोटे बच्चों को भी मेरी माँ सर्दी लगने पर एक चम्मच में बताशा रख कर उस पर कुछ बून्दें डॉक्टर्स ब्रांडी की डाल कर खिला देती थीं और रजाई ओढ़ा कर सुला देती थीं जिस से सर्दी का असर दूर हो जाता था।मेरा शराब और सिगरेट से कभी कोई वास्ता नहीं रहा है तो मुझको लगा कि मेरे लिए तो अभी भी यह कारगर दावा होगी और आराम से मिल भी जाएगी।बस फिर क्या था मैंने पास के एक स्टोर से ब्रांडी की छोटी शीशी ली,कमरे में जाकर उसको खोला और नीट ही जितनी अपने हलक में उड़ेल सका उतनी पी कर सर तक रजाई ढक कर सो गया।इससे मुझको थोड़ी गर्मी सी लगी,पसीना सा भी आया और सुबह जब मैं सो कर उठा तो सर्दी का कोई नामो- निशान नहीं था और मैं अपने काम पर निकलने को तैयार था।
एम्स्टर्डम ही नहीं अपितु पूरे नीडरलैंड्स की एक बहुत खास बात मैंने देखी कि यदि आपने किसी से कोई पता या रास्ता पूछ भर लिया या स्टेशन पर ट्रेन के  डायरेक्शन आदि के विषय में कुछ भी पूछ लिया तो वो आपको बहुत तसल्ली और प्यार से पूरा समय देकर समझाते हैं। जर्मनी के कुछ हिस्सों और हॉलैंड के लोग मैंने पाया कि कद में काफी लंबे होते हैं।हमारा एम्स्टर्डम और हॉलैंड के बहुत सारी कम्पनियों से काम रहा है और लगभग सबके साथ ही काम करने का हमारा अनुभव अच्छा ही रहा।

Photo:-इंटरनेट से साभार

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