Posts

Showing posts from March, 2025

अस्तित्व भाग:- 10

मेरे आने वाले उपन्यास 'अस्तित्व' के कुछ अंश भाग 10 माचू-पीचू और मामा जेबो जब इवान और उसके साथी काहिरा घूमने की तैयारी कर रहे थे तो लगभग उसी समय काहिरा से बहुत दूर दुनिया के बिल्कुल पश्चिमी हिस्से में दक्षिण अमरीका के पेरू देश में उरुबाम्बा घाटी - उरुबाम्बा नदी के पास ही कहीं कुछ लोग इकट्ठे थे।इस स्थान का नाम माचू-पीचू था , यह एक पहाड़ी स्थल है और पुरानी इंका सभ्यता के इंका लोगों के खोए हुए शहर के रूप में भी विख्यात है।उन इकट्ठे हुए लोगों में दो तो वही दक्षिण अमेरिकी लोग थे जो युगांडा की लेक ऊरो वाली मीटिंग में मौजूद थे और उनमें एक जो स्त्री थी उसका नाम मामा जेबो था और दूसरा उसका साथी पुरुष था।इनके अतिरिक्त यहाँ तीन-चार लोग और थे। मामा जेबो ने अपने साथी पुरुष से कहा ),  “सुनो रिजोलू, जिस समय का हमको हजारों साल से इंतज़ार था वो समय आ गया है। ये माचू पीचू के पत्थर गवाह है कि आज हम लोग जिस कार्य के लिए इतने बेकरार हैं वो इस पूरी दुनिया या पूरे सौरमण्डल के ही भविष्य को बदल देगा। ”  इस पर रिजोलू ने कहा कि,  “ अब वो समय दूर नहीं जब देवता पिकिरू और मननमका देवी के आशीर्वाद से हम उन ...

अस्तित्व भाग 9

मेरे आने वाले उपन्यास "अस्तित्व" के कुछ अंश भाग 9 बोबो,अगाथा,मामा इब्बी और  लामा चैम्पो काफी समय बाद बोबो ने उठ कर तीन कॉफी बनायीं और एक इवान को दी, एक अगाथा को और एक खुद पीने लगा। कॉफी पीते हुए अगाथा ने कहा कि,  “ इवान हम सबको इस दुःख को भूल कर अब आगे के विषय में सोचना होगा क्योंकि जरा सी भी देरी घातक हो सकती है।”  इस पर बोबो ने कहा कि, “ पहले हम धैर्य से सारे सूत्र इकट्ठे करें जिससे आगे का रास्ता तय हो सके।”  इवान ने उनसे पूछा कि, “ तुम लोग रात को डिनर में क्या कर रहे थे और मिस्टर लोरेंजो का झगड़ा क्यों हुआ था?” इस पर अगाथा बोली कि,  “ हमको पता था कि तुमको मीटिंग की बातें सुननी हैं तो वो लोग तुम पर ध्यान न दें इसलिए हमने झगड़े का नाटक किया था और उन लोगों का ध्यान भटकाने को ही मिस्टर लोरेंजो उनकी टेबल पर कुछ पूछने का बहाना करते हुए गए थे।” इवान ने कहा कि, “ वो लोग इजिप्ट की  और फराओ अमेनहोटेप के किसी संदेश की बात कर रहे थे। उनके साथ के दो दक्षिणी अमेरिकी से दिखने वाले लोग किसी पिगरू और मनमन्का की चर्चा भी कर रहे थे।” बोबो, अगाथा कोई भी इस बात का अर्थ समझ नही...

अस्तित्व भाग 8

मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश भाग 8 अब इवान को भरोसा हो गया था कि वो लोग उसके शुभचिंतक ही थे पर उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये माजरा क्या है? मिस्टर लोरेंजो उसके मन के प्रश्न को समझ रहे थे तो वो बोले, “ सुनो इवान हम सबका उद्देश्य एक ही है। ये किस्सा इतना आसान नहीं है और ना ही मामला इतना छोटा है। इस बार जो खतरा है उसमें कम से कम इस पृथ्वी के तो अस्तित्व के लिए ही समस्या हो सकती है। इसमें इस समय की स्थिति ये है कि जो शक्तियां हजारों साल से धीरे-धीरे अपनी नकारात्मक कोशिशों में लगी थीं उनके प्रयासों और गतिविधियों में अचानक एकदम से बहुत तेजी आ गयी है। हमको ये सब तो मालूम है और ये भी पता है कि वो लोग कुछ बहुत बड़ा जो हमारी कल्पना शक्ति से भी परे हो सकता है ऐसा कुछ करने की योजना बना रहे हैं लेकिन इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चल पा रहा है और सूत्रों को जोड़ने से ही यह गुत्थी सुलझेगी। हम सबकी आशा तुमसे ही है क्योंकि  तुम्हीं वो व्यक्ति हो जिसको हजारों साल से तराश-तराश कर अब इस समय में इतनी सारी शक्तियों से सज्जित किया गया है।” इवान कुछ समझा लेकिन बहुत कुछ नहीं समझ पाया तो मिस्टर लोरेंजो...

अस्तित्व 7

मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश भाग 7 इधर इन लोगों की बातचीत चल रही थी कि उधर मिस्टर लोरेंजो की टेबल पर तमाशा हो गया।शायद मिस्टर लोरेंजो ने शराब अधिक पी ली थी और वो अपने साथ के ही उस अफ्रीकन मूल के व्यक्ति से लड़ पड़े थे। इस हंगामे की तरफ से जब तक इवान का ध्यान वापिस उस टेबल पर आया तब तक उस टेबल पर बैठे वो पाँचों लोग वहाँ से न जाने कहाँ चले गए थे। अब इवान ने मिस्टर लोरेंजो की टेबल की ओर देखा तो वहाँ भी कोई नहीं था। अब तक इवान को यह लगभग पक्का लगने लगा था कि मिस्टर लोरेंजो का उन पाँच लोगों से कोई न कोई सम्बन्ध तो है। इवान की समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब आगे क्या करे तो उसने सोचा कि अब सोया जाए और कल आगे के कार्यक्रम पर विचार किया जाएगा। अपनी कॉटेज में आकर इवान आज के उस घटनाक्रम पर विचार करने लगा और न जाने कब उसकी आँख लग गयी। सुबह होने पर जब इवान की आँख खुली तो खिड़की के बाहर बहुत ही मनोरम दृश्य था। वहाँ न जाने कितने इम्पाला और उनके शावक दौड़ लगा रहे थे। इवान अपने हाथ में कॉफी का प्याला लिए बालकनी में कुर्सी पर बैठ कर उस मनभावन दृश्य को निहार रहा था कि अचानक उन इम्पाला समूहों में से उसने ...

अस्तित्व भाग 6

मेरे द्वारा लिखे गए आगामी उपन्यास के कुछ अंश भाग 5 लेक ऊरो-युगांडा एक दिन इवान सुबह उठकर अपने घर के  बगीचे में कुत्तों से खेल रहा था कि अचानक कहीं से एक आवाज आयी। किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था, “इवान।”  उसको वो आवाज़ कुछ जानी पहचानी लगी और उसने ऊपर की तरफ देखा तो वही 7 सिस्टर्स थीं, रोम वाली। इवान उत्सुकता और उत्साह में कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसको अपने पापा की बात याद आयी और उसने कहा, “सातके” और दूसरी ओर से तुरन्त जवाब मिला, “मातके- सातके-मातके।” अब इवान निश्चिंत हुआ। तभी उन चिड़ियों में से एक बोली, “ इवान, उन लोगों की एक मीटिंग अफ्रीका के युगांडा देश के लेक ऊरो (Mundo) इलाके में हो रही है। कुछ बड़ा करना चाहते हैं वो लोग। तुमको वहाँ जाकर न सिर्फ सारी जानकारी हासिल करने होगी बल्कि उनकी इस खतरनाक विध्वंसकारी योजना को  असफल भी करना होगा। मीटिंग आगामी बुधवार या बृहस्पतिवार को उसी इलाके में होनी तय है। आज बुधवार ही है तो तुम अपना कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाओ।”  इवान ने पूरी बात अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा,कि” वैसे तो व्यापार के सिलसिले में तुम्हारा अनेकों देश आ...

अस्तित्व भाग 5

मेरे द्वारा लिखे गए आगामी उपन्यास के कुछ अंश भाग 5 लेक ऊरो-युगांडा एक दिन इवान सुबह उठकर अपने घर के  बगीचे में कुत्तों से खेल रहा था कि अचानक कहीं से एक आवाज आयी। किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था, “इवान।”  उसको वो आवाज़ कुछ जानी पहचानी लगी और उसने ऊपर की तरफ देखा तो वही 7 सिस्टर्स थीं, रोम वाली। इवान उत्सुकता और उत्साह में कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसको अपने पापा की बात याद आयी और उसने कहा, “सातके” और दूसरी ओर से तुरन्त जवाब मिला, “मातके- सातके-मातके।” अब इवान निश्चिंत हुआ। तभी उन चिड़ियों में से एक बोली, “ इवान, उन लोगों की एक मीटिंग अफ्रीका के युगांडा देश के लेक ऊरो (Mundo) इलाके में हो रही है। कुछ बड़ा करना चाहते हैं वो लोग। तुमको वहाँ जाकर न सिर्फ सारी जानकारी हासिल करने होगी बल्कि उनकी इस खतरनाक विध्वंसकारी योजना को  असफल भी करना होगा। मीटिंग आगामी बुधवार या बृहस्पतिवार को उसी इलाके में होनी तय है। आज बुधवार ही है तो तुम अपना कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाओ।”  इवान ने पूरी बात अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा,कि” वैसे तो व्यापार के सिलसिले में तुम्हारा अनेकों देश आ...

अस्तित्व भाग 4

मेरी आगामी पुस्तक के कुछ अंश भाग 4 इवान अब परेशान हो गया था और उसकी समझ में ये नहीं आ रहा था कि आखिर उस पर ये हमला हुआ क्यों। साथ ही इवान ये भी सोच रहा था कि उसका इस कार्यक्रम के विषय में मिस्टर लोरेंजो के अतिरिक्त तो किसी को पता नहीं था। उसने  तय किया कि अब वो वापिस होटल जाएगा और अपने कमरे में लेट कर आराम करेगा। इवान होटल पहुँचा ही था कि उसके पास मिस्टर लोरेंजो का फोन आ गया। वो उसकी कुशलता- हालचाल पूछ रहे थे और उन्होंने कहा कि उन्होंने बस उसकी खोज-खबर लेने को कॉल किया था। इवान की समझ में कुछ आ नहीं रहा था। बिल्कुल तरोताजा होकर इवान अगले दिन की अपनी घर वापिसी की यात्रा को तैयार था। ये कहना मुश्किल है कि घड़ी की सुइयाँ ज्यादा तेज चलीं या भारत की तरफ जाने वाला जहाज जिसमें इवान बैठा था लेकिन घर पहुँचने के उत्साह में इवान को पता ही नहीं चला कि कब उनका विमान दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँच चुका था और शीघ्र ही वह एयरपोर्ट के बाहर था जहाँ उसके माँ-पापा उसको लेने आये हुए थे। इवान जब भी विदेश से लौटता था उसके माँ-पापा हर बार उसको रिसीव करने अवश्य आते थे। माँ और पापा से...

अस्तित्व भाग 3

मेरी आगामी पुस्तक जो एक mythological fiction है उसके कुछ अंश भाग 3 7 सिस्टर्स की बातों से अचम्भित होकर अब इवान रोम की  पहली शताब्दी में बनी लगभग 48 मीटर ऊंची उस इमारत या कहें उस इमारत के खंडहरों में आगे बढ़ा।इवान की इतिहास और उससे जुड़े तथ्यों में काफी रुचि रही थी।उसको याद आ रहा था कि उसने पढा था कि रोमन साम्राज्य के फ्लावियान सम्राटों ने इस इमारत का निर्माण एक रंगशाला या एम्पीथियेटर के रूप में करवाया था जिसको बाद में कोलोजियम के नाम से प्रसिद्धि मिली। इस लम्बी और गोलाकार इमारत का निर्माण पत्थर, कंक्रीट से हुआ है और अपनी सर्वाधिक ऊंचाई पर यह एक 4 मंजिली इमारत है।इसमें एक साथ 50 से 80 हजार दर्शक बैठ कर यहाँ होने वाले ग्लैडिएटर संग्रामों, शिकार आदि के दृश्यों का सजीव आनन्द ले सकते थे। इवान जब कोलोजियम में एक तरफ खड़ा होकर उसको निहार रहा था जिसमें कई मंजिला दरवाजे या खिड़कियां सी बाहर से नजर आते हैं और उस पूरी इमारत में कई छेद दिखे जिनमें कभी लोहे से इस पूरी इमारत को लोहे की छड़ों आदि से साधने का कुछ इंतज़ाम रहा होगा लेकिन बाद में लोग धीरे-धीरे निकाल कर ले गए। इवान सोच रहा था कि ऐसे ही हिंद...

अस्तित्व भाग 2

मेरी आगामी पुस्तक के कुछ अंश भाग 2 होटल पहुँच कर स्नान आदि से निवृत्त होकर जब वो लोग खाना खा रहे थे तो इवान के पापा उसको बता रहे थे कि, ” बेटा हम सब सुनते आए हैं कि यह सृष्टि अनादि और अनन्त है। इसके रहस्य जानना बहुत कठिन है लेकिन अभी के लिए ये समझ लो कि हमारी पृथ्वी, हमारा सौरमण्डल इस सृष्टि का एक बहुत छोटा सा हिस्सा है लेकिन जब इस क्षेत्र में विकास हुआ तो उसके कई आयाम थे। यदि कुछ शक्तियां सदैव से ऐसी थीं जो चाहती थीं कि इस सौरमण्डलीय क्षेत्र में लोग सुख-शांति से रहें , चैन से रहें, आपस में प्रेम हो, सद्भाव हो , शांति रहे तो हमेशा से कुछ शक्तियां ऐसी भी सक्रिय रही हैं जिनकी सोच इसके ठीक विपरीत है और वो अपने उद्देश्य की पूर्ति में लगी रहती हैं।”  इवान ने पूछना चाहा कि,” सहस्त्रों वर्ष से ये दोनों किस्म के लोग ऐसे कैसे काम कर रहे हैं?” तो उसके बोलने के पहले ही शायद उसके पापा उसके प्रश्न को भांप गए थे और उन्होंने कहा कि, “ अच्छी और बुरी कुछ शक्तियां ऐसी हैं जिनके काल की गति हमारे समय की गति से फर्क है अर्थात उन पर हमारी तरह के जीवन-मृत्यु और वर्षों के नियम लागू नहीं होते और दोनों किस्...

अस्तित्व 1

मेरी अगली आने वाली पुस्तक जो एक mythological fiction है उसके कुछ अंश आप यहाँ पढ़ सकते हैं। 1. सुबह ही सुबह ये कहना मुश्किल था कि कमरे की खिड़की से रोशनी पहले आयी या इवान की आँख पहले खुली पर हाँ वो समय से तैयार था। पापा ने बताया कि,   “ हम लोग अब यहाँ के प्रसिद्द कैसल चल रहे हैं।” जब वो लोग कैसल पहुँचे तो इवान तो उस नजारे को देखता ही रह गया। ऊपर पहाड़ी पर कैसल की दीवार के किनारे खड़े होकर चारों ओर का नजारा बहुत अद्भुत था।पापा ने बताया कि, “ इस विश्वप्रसिद्ध कैसल में बहुत सी प्रसिद्ध हॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग हो चुकी है।”  फिर पापा ने इवान से कहा कि, “ बेटा तुमने बेहतरीन जगहों से पढ़ाई की है, जुडो, कराते, जाइजित्सु, मुये थाई, कलारिपायट्टू, सिलाम्बाम, कैंने इटालियाना , ग्रीको रोमन, फ्री स्टाइल कुश्ती, पहलवानी इंडियन स्टाईल, बूख, शुआई जियाओ, ग्लीमा , काइपोईरा आदि विधाओं में तुम विश्व में सर्वश्रेष्ठ में से एक हो, मेडिटेशन में तो सारे चक्रों को साध चुके हो और अब समझ लो कि जिस काम के लिए तुम तैयार हो रहे थे उसका समय आ रहा है।” इवान ने कहा, “पापा मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा है” ...