अस्तित्व भाग 8
मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश
भाग 8
अब इवान को भरोसा हो गया था कि वो लोग उसके शुभचिंतक ही थे पर उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये माजरा क्या है? मिस्टर लोरेंजो उसके मन के प्रश्न को समझ रहे थे तो वो बोले, “ सुनो इवान हम सबका उद्देश्य एक ही है। ये किस्सा इतना आसान नहीं है और ना ही मामला इतना छोटा है। इस बार जो खतरा है उसमें कम से कम इस पृथ्वी के तो अस्तित्व के लिए ही समस्या हो सकती है। इसमें इस समय की स्थिति ये है कि जो शक्तियां हजारों साल से धीरे-धीरे अपनी नकारात्मक कोशिशों में लगी थीं उनके प्रयासों और गतिविधियों में अचानक एकदम से बहुत तेजी आ गयी है। हमको ये सब तो मालूम है और ये भी पता है कि वो लोग कुछ बहुत बड़ा जो हमारी कल्पना शक्ति से भी परे हो सकता है ऐसा कुछ करने की योजना बना रहे हैं लेकिन इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चल पा रहा है और सूत्रों को जोड़ने से ही यह गुत्थी सुलझेगी। हम सबकी आशा तुमसे ही है क्योंकि तुम्हीं वो व्यक्ति हो जिसको हजारों साल से तराश-तराश कर अब इस समय में इतनी सारी शक्तियों से सज्जित किया गया है।” इवान कुछ समझा लेकिन बहुत कुछ नहीं समझ पाया तो मिस्टर लोरेंजो ने कहा कि, “बहुत से प्रश्नों के उत्तर तुमको समय के साथ ही मिलेंगे इसलिए उन बातों के लिए तुम परेशान मत हो और हाँ, हम लोग तुम्हारी मदद और सुरक्षा को हैं , हमारे जीवन में तुम्हारी सुरक्षा से महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है। तुम ये भी जान लो कि हमारे जैसी और टीमें भी तुम्हारे लिए सतर्क और सज्ज हैं।” ये लोग ये बातें कर ही रहे थे कि अचानक सामने झाड़ियों में कुछ सरसराहट हुयी और जब तक इवान कुछ समझे मिस्टर लोरेंजो ने उसको धकेल कर गिरा दिया और जैसे उसको पूरा कवर करने को उसके ऊपर लेट गए तथा उसकी गर्दन को अपनी हथेलियों से ढक दिया। इवान ने देखा कि झाड़ियों में से दो बहुत ही छोटे कद के नाटे अफ्रीकी लोग जो पिग्मी बाँदार बौने लग रहे थे और उनके मुँह में बाँस का पोला पाइप सा था। जब तक बोबो उनकी तरफ भागता वो न जाने कहाँ गायब हो गए। इधर इवान का ध्यान जब मिस्टर लोरेंजो की तरफ गया तो उसने देखा कि उनका शरीर नीला पड़ चुका था और उनके मुँह से झाग निकल रहे थे। अगाथा ने उनके उस हाथ को सीधा किया जिस हथेली से उन्होंने इवान की गर्दन को कवर किया था तो दिखाई पड़ा कि हथेली में एक जगह एक बहुत ही छोटा सा पिन जैसा तीर लगा हुआ था । अब माजरा साफ था कि इन अफ्रीकी पिग्मी बाँदार बौने लोगों ने जहरबुझे तीर से मुँह में लगे पोले पाइप द्वारा इवान पर जानलेवा हमला किया था जो मिस्टर लोरेंजो ने अपने ऊपर लेकर इवान की जान बचा दी थी।अफ्रीका में शत्रु की जान लेने के पुराने तरीकों में से एक तरीका यह भी था। इवान की आँखों से आँसू बह निकले थे, उसको विश्वास नहीं हो रहा था कि उसकी जान बचाने को एक व्यक्ति ने, जिससे उसका कोई घनिष्ट सम्बन्ध भी नहीं था, अपनी जान दांव पर लगा दी। मिस्टर लोरेंजो इवान से कह रहे थे कि, “ इवान दुखी मत हो, जल्द ही हम फिर मिलेंगे, मेरे इस शरीर वाले जीवन का ध्येय यही था और समय इतना ही था पर यात्रा जारी है मेरे दोस्त और तुमको इस काम को अंजाम देना ही है। “
यह कहने के साथ ही मिस्टर लोरेंजो के चेहरे पर एक सन्तोष भरी मुस्कान आयी, उनके मुँह से निकला “मेरा लोरेंजो का जीवन समाप्त हुआ, मैं परमपिता की इस जीवन की सेवा से मुक्त हुआ, अगले जीवन की तैयारी है।” और यह कहते हुए उनकी साँसे धीमे होकर थम गयीं पर यह क्या अचानक वहाँ बहुत तीव्र प्रकाश की चमक हुयी जिससे सबकी आँखें चौंधिया सी गयीं और जब स्थिति सामान्य हुई तो वहाँ मिस्टर लोरेंजो का शरीर का कोई निशान नहीं था बस एक दिव्य सुगन्ध सी थी जिसका अनुभव इवान ने अपने जीवन में पहले कभी नहीं किया था।
ये सारा घटनाक्रम इतनी जल्दी और अचानक हुआ था कि इवान का सर चकराने लगा था और वो कमजोर सा पड़ रहा था कि अचानक उसको अपनी जिम्मेदारी का अहसास हुआ और इस बात का भी कि यह काम कितना महत्वपूर्ण है कि उसको बचाने को किसी ने अपने प्राणों की आहुति तक दे दी है। बोबो और अगाथा अब उसके साथ ही चलकर उसके कॉटेज में आ गए थे। कॉटेज में पहुँच कर कुछ देर वो तीनों गहरे दुःख और सोच में काफी समय तक बैठे रहे और यह समय कितना था यह घण्टों और मिनटों में आंकना बहुत ही कठिन काम था क्योंकि सुख के क्षण और दुःख के घण्टे नापना सम्भव नहीं है।
लेखक :- अतुल चतुर्वेदी
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