अस्तित्व 7

मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश
भाग 7

इधर इन लोगों की बातचीत चल रही थी कि उधर मिस्टर लोरेंजो की टेबल पर तमाशा हो गया।शायद मिस्टर लोरेंजो ने शराब अधिक पी ली थी और वो अपने साथ के ही उस अफ्रीकन मूल के व्यक्ति से लड़ पड़े थे। इस हंगामे की तरफ से जब तक इवान का ध्यान वापिस उस टेबल पर आया तब तक उस टेबल पर बैठे वो पाँचों लोग वहाँ से न जाने कहाँ चले गए थे। अब इवान ने मिस्टर लोरेंजो की टेबल की ओर देखा तो वहाँ भी कोई नहीं था। अब तक इवान को यह लगभग पक्का लगने लगा था कि मिस्टर लोरेंजो का उन पाँच लोगों से कोई न कोई सम्बन्ध तो है। इवान की समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब आगे क्या करे तो उसने सोचा कि अब सोया जाए और कल आगे के कार्यक्रम पर विचार किया जाएगा। अपनी कॉटेज में आकर इवान आज के उस घटनाक्रम पर विचार करने लगा और न जाने कब उसकी आँख लग गयी।
सुबह होने पर जब इवान की आँख खुली तो खिड़की के बाहर बहुत ही मनोरम दृश्य था। वहाँ न जाने कितने इम्पाला और उनके शावक दौड़ लगा रहे थे। इवान अपने हाथ में कॉफी का प्याला लिए बालकनी में कुर्सी पर बैठ कर उस मनभावन दृश्य को निहार रहा था कि अचानक उन इम्पाला समूहों में से उसने देखा कि 10-12 इम्पाला उसकी कॉटेज की तरफ बढ़ते आ रहे हैं और जब तक इवान कुछ समझे वो सभी इम्पाला उसकी बालकनी के एकदम पास थे। उनमें से एक इम्पाला ने मानो कहा “इवान” और इवान ने लौट कर कहा
 “ सातके”  लेकिन ये क्या हुआ!!!
 अब भी वो इम्पाला इवान, इवान करके ही बस आवाज दे रहे थे तो इवान को कुछ खटका हुआ और वो एक झटके से बालकनी से उठके अपने कमरे में आया, उसने तुरंत कपड़े पहने और कॉटेज से बाहर स्विमिंग पूल की तरफ निकल आया कि तभी उसके दाहिनी तरफ से उसने कुछ पालतू बत्तखों को आते देखा और तभी उन बत्तख में से 10-12 बत्तख आगे बढ़ीं और मानो उन्होंने इवान को पुकारा, “इवान”  और जवाब में इवान ने फिर कहा “सातके”  लेकिन वो बत्तखें “इवान, इवान “ पुकारती रहीं। इवान ये तो समझ गया था कि उसके शत्रुओं को उसके बारे में पता चल गया है और अब उसको घेरने की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। उसको कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक उसको ऊपर आसमान की तरफ से एक आवाज आई कि जैसे उसको कोई पुकार रहा हो “इवान” और ये आवाज कुछ जानी पहचानी सी थी। इवान ने ऊपर की ओर देखा तो 7 सिस्टर्स थीं लेकिन अब इवान को सब अपने दुश्मन लग रहे थे फिर भी उसने अपने को संयत करते हुए कहा कि
 “ सातके” और लो कमाल हो गया , 
7 सिस्टर्स ने समवेत स्वर में एक साथ जवाब दिया, “मातके, सातके-मातके।” अब इवान को मानो चैन मिला और 7 सिस्टर्स उससे कहा रही थीं कि, “ तुम पर हमला होने वाला है तो सावधान हो जाओ और बायीं तरफ के बगीचे में फिलहाल चले जाओ।”  इवान उनकी बात मानकर बायीं तरफ के उस अत्यंत खूबसूरत फूलों से लदे वृक्षों के बगीचे की तरफ चल पड़ा। जब इवान बगीचे में घुसा तो उसने देखा कि वृक्षों के पीछे जैसे कोई है।
वहाँ कोई तो था कि अचानक उसकी झलक फिर दिखी, वो तीन थे। अरे, अरे ये तो कुछ जाने पहचाने लोग थे… वो मिस्टर लोरेंजो और उनके 2 साथी थे जो फिर वृक्षों के बीच न जाने कहाँ छिप गए थे। इवान सोचने लगा कि इसका मतलब जब इटली में मुझ पर हमला हुआ तो उसको भी लोरेंजो ने ही अंजाम दिया था और उसी क्षण इवान ने तय कर लिया कि आज वो इस लोरेंजो को सबक सिखाएगा ही। इवान ये सोच ही रहा था कि अचानक उन वृक्षों के पीछे से पाँच लोग एक साथ निकले और इवान पर टूट पड़े।वो पाँचों लोग अपने-अपने हाथों में में बांस के टुकड़े लिए हुए थे और उनको घुमाते हुए इवान के चारों ओर घूमने से लगे। बीच-बीच में वो जमीन पर हाथ कर लेते और ऊपर पैर उठा कर किक चलाने लगते और न जाने कहॉं से वहाँ एक भयंकर किस्म के संगीत की धुन भी बजने लगी; ढम, ढम-ढम, ढम-ढमाढम, ढम ढम ढम ढम और जैसे जैसे इस धुन की तीव्रता बढ़ती जा रही थी उन लोगों के घूमने की गति भी बढ़ती जा रही थी और उनका इवान के चारों तरफ का घेरा छोटा होता जा रहा था। अब इवान की समझ में आ चुका था कि ये प्रसिद्ध एफ्रो-ब्राजीलियन मार्शल आर्ट काइपोईरा या कैपीरा के मारक लड़ाके हैं जो उसकी जान लेने आये हैं और हो सकता है कि इनके हाथों के बांस के टुकड़ों में कोई धारदार हथियार भी छिपे हों। इवान को यह विधा खुद उसके पापा ने सिखाई थी जो खुद आधुनिक काइपोईरा के पिता कहलाने वाले मैनुअल डोस राइस मचाडो जिनको मेस्त्रे बिम्बा नाम से भी जाना जाता है उनसे सीख कर आये थे और उनका कहना था कि इवान से बेहतर इस विधा में इस समय दुनिया में कोई नहीं था। धीरे-धीरे उस संगीत की भयावहता बढ़ती जा रही थी और उन लड़ाकों का उन्माद भी। पर अरे ये क्या हुआ, इवान ने भी उसी उन्माद से घूमना शुरू कर दिया था और अब उसकी हाथ पैरों की थाप भी तेज हो गयी थी, अब कभी वो हाथों के बल घूम रहा था तो कभी अपने पैरों के बल । ये घूमना और चक्कर काटना बढ़ता जा रहा था, गति इतनी तेज हो गयी थी कि किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अचानक इवान ने बिजली से भी तेज कुलाटें लेनी शुरू कर दीं और जब तक हमलावर कुछ समझ पाते उनमें से तीन जमीन पर ढेर पड़े थे लेकिन इस से बाकी दो का उन्माद कम नहीं हुआ और उनमें से एक ने अपने हाथों के बल उछल कर अपने पैरों की कैंची इवान की गर्दन में फंसा दी और उसको जमीन पर घुमाने लगा कि तभी दूसरे हमलावर ने अपने दोनों हाथों से इवान की गर्दन को दबाना शुरू कर दिया। ऐसा लगा कि अब तो इवान का दम ही घुट जाएगा कि अचानक पूरा जोर लगा कर इवान ने फिरकी की भांति जमीन पर ही घूमना शुरू कर दिया और इतनी जोर का चक्कर काटा कि क्षण भर में ही उन दोनों लड़ाकों की गर्दन इवान के हाथों में थीं किंतु तभी उन तीन लड़ाकों में से एक ने जिसको होश आया गया था , उसने बांस के टुकड़े से एक धारदार लम्बा पतला हथियार निकाला और उससे इवान पर हमला कर दिया पर वो भूल गया था कि लड़ाई के वक़्त इवान की आँखें दसों दिशाओं को देखती हैं और जब तक उसकी समझ में आता उस धारदार हथियार का शिकार उसके दोनों साथी बन चुके थे और उसकी गर्दन अपने पैरों के बीच लेकर इवान ने ऐसी घुमाई कि उसकी आत्मा भी उसके उस शरीर का साथ छोड़ गई। इधर तेज संगीत अपने पूरे उन्माद के साथ बज रहा था और उधर तीन आवाज़ें एक के बाद एक आयीं, “मैं जूनिया मारा गया, उखाऊजाखा की सेवा से मुक्त हुआ।” “मैं जिम्बा मारा गया, उखाऊजाखा की सेवा से मुक्त हुआ।” , “मैं पोम्बू मारा गया, उखाऊजाखा की सेवा से मुक्त हुआ।” और इसके साथ ही मानो संगीत का शोर अपने चरम पर पहुँच गया और आसमान में  भयंकर बिजली कड़कने लगी और अचानक सब शांत हो गया। इवान ने देखा तो मालूम पड़ा कि वहाँ तो सब साफ सुथरा पड़ा था जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं था । जब तक इवान सम्हलता तब तक सामने से मिस्टर लोरेंजो अपने साथियों के साथ आते हुए दिखे।
अब मिस्टर लोरेंजो को अपने सामने देख कर इवान का गुस्सा फिर बढ़ने लगा लेकिन जब तक वो कुछ कहता मिस्टर लोरेंजो ही उस से बोले कि, “ तुम ठीक तो हो इवान?” इवान के बर्दाश्त की सीमा पार हो गयी थी और वो बोला, “ आपसे मतलब? मुझको अब आपकी असलियत पता चल गई है”  पर मानो मिस्टर लोरेंजो पर इस बात का कोई असर हुआ ही नहीं और वो बिल्कुल शांत स्वर में बोले, “परमपिता परमेश्वर का लाख-लाख शुक्र है कि तुम ठीक हो वरना मैं तो डर ही गया था।”  इस पर इवान ने चिढ़ते हुए कहा कि, “आप का डर सही साबित हुआ, आप तो यही सोच रहे होंगे कि मुझको सब पता लग गया है और मैं बच गया तो आपका क्या होगा क्योंकि आपकी असलियत अब मेरे सामने आ गयी है।” इस पर मिस्टर लोरेंजो ने कहा कि, “ तुमको अभी भी बहुत सी बातें नहीं मालूम हैं।”  मिस्टर लोरेंजो ने कहा कि, “ मैं और मेरे ये दो साथी मिस्टर बोबो और मिस अगाथा तुम्हारे लिए ही यहाँ आये हैं।” इवान ने अविश्वास से मिस्टर लोरेंजो के उन दोनों साथियों की ओर देखा। ये वही दोनों थे जो पिछली रात भी मिस्टर लोरेंजो के साथ उनकी डिनर टेबल पर थे।एक अफ्रीकी मूल का पुरुष जिसकी बालों की एक नीली लट थी और एक यूरोपियन लड़की जिसके बालों की एक हल्की गुलाबी पर्पल सी लट थी। इवान को ध्यान से लगा कि उसने इस 35 वर्षीय अफ्रीकी व्यक्ति बोबो को पहले भी कहीं देखा है। वो सोच ही रहा था कि मिस्टर लोरेंजो बोले, “ तुम सही सोच रहे हो इवान। तुम मिस्टर बोबो से पहले भी मिले हो, मिस्टर बोबो ही मिस्टर ब्राइट हैं।”  
अब इवान पहचान गया कि उसको जंगल सफारी पर यही मिस्टर ब्राइट या बोबो ले गए थे। इतनी बातों के बाद भी इवान को उन लोगों पर भरोसा नहीं हो रहा था, वो समझ नहीं पा रहा था कि वो क्या करे कि अचानक उसके मस्तिष्क में एक विचार कौंधा और  उसने बहुत धीरे से कहा “सातके” । अरे ये तो कमाल हो गया, लोरेंजो, बोबो और अगाथा तीनों ने एक साथ समवेत स्वर में जवाब दिया, “मातके, सातके-मातके।” 

लेखक:- अतुल चतुर्वेदी

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