अस्तित्व भाग 5

मेरे द्वारा लिखे गए आगामी उपन्यास के कुछ अंश
भाग 5

लेक ऊरो-युगांडा

एक दिन इवान सुबह उठकर अपने घर के  बगीचे में कुत्तों से खेल रहा था कि अचानक कहीं से एक आवाज आयी। किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था, “इवान।”  उसको वो आवाज़ कुछ जानी पहचानी लगी और उसने ऊपर की तरफ देखा तो वही 7 सिस्टर्स थीं, रोम वाली। इवान उत्सुकता और उत्साह में कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसको अपने पापा की बात याद आयी और उसने कहा, “सातके” और दूसरी ओर से तुरन्त जवाब मिला, “मातके- सातके-मातके।”
अब इवान निश्चिंत हुआ। तभी उन चिड़ियों में से एक बोली, “ इवान, उन लोगों की एक मीटिंग अफ्रीका के युगांडा देश के लेक ऊरो (Mundo) इलाके में हो रही है। कुछ बड़ा करना चाहते हैं वो लोग। तुमको वहाँ जाकर न सिर्फ सारी जानकारी हासिल करने होगी बल्कि उनकी इस खतरनाक विध्वंसकारी योजना को  असफल भी करना होगा। मीटिंग आगामी बुधवार या बृहस्पतिवार को उसी इलाके में होनी तय है। आज बुधवार ही है तो तुम अपना कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाओ।”
 इवान ने पूरी बात अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा,कि” वैसे तो व्यापार के सिलसिले में तुम्हारा अनेकों देश आना-जाना रहता है और उनका वीसा भी लगा रहता है लेकिन चूंकि अपना कोई काम कभी युगांडा से नहीं पड़ा तो वीसा भी नहीं है इसलिए तुम आज ही युगांडा के वीसा के लिए अप्लाई करो।”  खैर इवान ने अपने ऑफिस से अपने ट्रैवल एजेंट को यात्रा की सारी व्यवस्थाएं करने को कहा और सोमवार तक मय वीसा के सारे इंतजामात हो गए थे। सोमवार रात को मुम्बई से इवान ने अपनी फ्लाइट ली । इवान की कम्पाला, युगांडा की यह यात्रा नैरोबी, केन्या के रास्ते थी यानी कि मुम्बई से नैरोबी और रात कुछ घण्टे हवाई अड्डे पर बिठा कर फिर अगली फ्लाइट नैरोबी से कम्पाला की। इवान जब लगभग 6 घण्टे से कुछ ज्यादा की हवाई यात्रा करके नैरोबी के जोमो केन्याता अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुँचा तो वहाँ रात हो चली थी।इवान  टर्मिनल 1A पर पहुँच गया था जहाँ से सुबह की कम्पाला की फ्लाइट थी, उसका सामान मुम्बई से ही कम्पाला के लिए चैक-इन हो चुका था। ये हवाई अड्डा देखने में अच्छा था हाँलाँकि दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जिसने देखा है उसको तो ये उतना अच्छा कैसे लग सकता था लेकिन फिर भी ठीक था। इवान ने वहाँ की ड्यूटी फ्री शॉप पर एक चक्कर लगाया और अपने लिए एक खजूर का डिब्बा लिया। इवान को खाने में खजूर बहुत पसंद थे। इसके बाद इवान ने वहाँ के कैफे में बैठ कर कॉफी और साथ में एक वेज सैंडविच लिया और फिर इस सबसे निवृत्त होकर वो एयरपोर्ट पर ही लाउंज में एक किनारे एक कुर्सी पर बैठ कर सुबह के जहाज का समय होने तक सोने की कोशिश करने लगा। इवान जितना सोने का प्रयास करता वो बेकार हो जाता क्योंकि वहाँ के मच्छर उसको सोने नहीं दे रहे थे।इवान को ताज्जुब भी हुआ कि आखिर इतने अच्छे हवाई अड्डे पर इतने मच्छर कैसे पर वो तो ऐसा ही था। खैर, जैसे तैसे करके सुबह हुई और फिर इवान ने कम्पाला जाने के लिए फ्लाइट ली। युगांडा के एकमात्र हवाई अड्डे का नाम एंटेबे एयरपोर्ट है जो प्रसिद्ध लेक विक्टोरिया के उत्तरी किनारे पर है और युगांडा की राजधानी कम्पाला से यह हवाई अड्डा लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इवान हवाई अड्डे से अपने ठहरने के स्थान लेक ऊरो (मबूरो) रिसोर्ट चला आया और वहाँ पहुँच कर इतने सुंदर स्थान को देख कर उसका मन बहुत अच्छा हो गया। वहाँ पर उसने एक प्राइवेट कॉटेज ली थी जो ऊँचे लकड़ी के प्लेटफॉर्म पर बनी हुई थी।इस कॉटेज की छत ऐसा लगता था जैसे घास से ढकी हुई हो।कॉटेज में एक प्राइवेट बालकनी थी जिससे आप बाहर लेक ऊरो (Mburo) के वन्य जीवन का सुंदर नजारा ले सकते थे। इवान की कॉटेज में एक बहुत ही अच्छा बाथरूम था और उसमें हॉट शावर की व्यवस्था थी। तो बस, फिर क्या था, इवान ने सबसे पहले तो फव्वारे के नीचे खड़े होकर गुनगुने पानी से स्नान किया और उसके बाद बाथरूम से बाहर निकल कर गर्मागर्म चाय और चीज़ सैंडविच मंगा कर खाएं। इसके बाद इवान थोड़ी देर को सो गया क्योंकि एक तो लम्बी यात्रा करके आया था दूसरे नैरोबी के मच्छरों ने उसको सोने नहीं दिया था। इवान ने उस दिन सिर्फ आराम करने का प्लान बनाया था तो जब वो शाम को उठा भी तो वह अपनी कॉटेज की बालकनी में बैठा हुआ बाहर का मनोरम नजारा ही देखता रहा। अभी शाम शुरू ही होने वाली थी कि उसको बाहर के मैदान में एक झुंड में सफेद काली धारी वाले ज़ेब्रा दिखे और वाकई इस नज़ारे ने उसका मन मोह लिया था। इस मनमोहक माहौल में कुछ समय के लिए तो इवान यह भूल ही गया था कि वो युगांडा क्यों आया था लेकिन फिर उसका ध्यान अपने असली उद्देश्य की ओर गया लेकिन उस पर अभी तक कोई संकेत नहीं था। इवान ने सोचा वैसे भी आज तो मंगलवार ही है तो मीटिंग तो बुधवार या बृहस्पतिवार को होनी तय है । इसके बाद रिसेप्शन पर फोन करके इवान ने अगले दिन के लिए अपना जंगल सफारी घूमने का प्रोग्राम बनाने हेतु जानकारी ली और उसके हिसाब से अगले दिन की सफारी घूमने की बुकिंग करा ली।
लेक ऊरो जिसको अंग्रेज़ी में Mburo लिखा जाता है वहाँ का लेक ऊरो नेशनल पार्क युगांडा का एक छोटा लेकिन बहुत सुंदर राष्ट्रीय वन्यजीव उद्यान है।यह एंटेबे और कम्पाला दोनों से नजदीक है। इसकी कम्पाला से दूरी लगभग 240 किलोमीटर है। इवान को सुबह पार्क ले जाने को सफारी लैंडक्रूजर गाड़ी तैयार थी और इवान के साथ उसके गाइड थे वहीं के एक अफ्रीका के मूल निवासी मिस्टर ब्राइट। मिस्टर ब्राइट एक लंबे लगभग 35 वर्षीय नौजवान थे जो अच्छी अंग्रेज़ी बोलते थे तथा उनकी भाषा और व्यवहार बहुत ही सौम्य था।इवान ने मिस्टर ब्राइट से कहा कि मैं बस अभी ब्रेकफास्ट करके आता हूँ।इवान नाश्ता करने के लिए अपने रिज़ॉर्ट के रेस्त्रां में गया तो वहाँ शानदार नाश्ता सजा हुआ था। कई किस्म के फल, ब्रेड, बटर, जैम, शहद के पाउच, कई किस्म के चीज़, कॉर्नफ्लैक्स, गरम और ठंडा दूध, 2 प्रकार के फ्रूट जूस इसके अतिरिक्त चाय, कॉफी और सैंडविच ये शाकाहारी लोगों के लिए था।
इवान जब अपना नाश्ता ले रहा था तो उसकी निगाह उस हॉल से जल्दी में निकलते एक व्यक्ति पर पड़ी। इवान को वो चेहरा कुछ पहचाना हुआ सा लगा, लगभग 5 फिट 10 इंच कद का लालामी लिए गोरे रंग वाला व्यक्ति जिसकी खाल जैसे जबड़ों की ओर खिंची हुयी सी हो और दाहिनी आँख के ऊपर एक मस्सा। अरे…अरे ये तो मिस्टर लोरेंजो थे, भला इनका यहाँ क्या काम? इवान को उनके यहाँ होने पर बहुत आश्चर्य हो रहा था। जब इवान नाश्ता कर के बाहर निकला तो उसने देखा कि मिस्टर लोरेंजो एक कार में बैठ कर कहीं निकल रहे थे। इवान ने उनको हाथ हिलाकर रोका यद्यपि पहले तो उन्होंने  निकलने का प्रयास किया पर आखिरकार वो रुक ही गए।इवान ने उनके हाल चाल लिए और पूछा कि आप यहाँ कैसे तो मिस्टर लोरेंजो कुछ कन्नी काटते हुए  बोले कि मैं युगांडा से भी कुछ माल लेता हूँ इसलिए यहाँ आया हूँ और यह कह कर वो अपनी गाड़ी में निकल लिए। इवान को उनका व्यवहार कुछ अजीब सा लगा पर फिर वो भी मिस्टर ब्राइट के साथ उनकी लैंड क्रूज़र में बैठ कर निकल लिया अपनी जंगल सफारी की यात्रा को।

लेखक:- अतुल चतुर्वेदी

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