अस्तित्व भाग 9

मेरे आने वाले उपन्यास "अस्तित्व" के कुछ अंश
भाग 9

बोबो,अगाथा,मामा इब्बी और 
लामा चैम्पो

काफी समय बाद बोबो ने उठ कर तीन कॉफी बनायीं और एक इवान को दी, एक अगाथा को और एक खुद पीने लगा। कॉफी पीते हुए अगाथा ने कहा कि, 
“ इवान हम सबको इस दुःख को भूल कर अब आगे के विषय में सोचना होगा क्योंकि जरा सी भी देरी घातक हो सकती है।”  इस पर बोबो ने कहा कि, “ पहले हम धैर्य से सारे सूत्र इकट्ठे करें जिससे आगे का रास्ता तय हो सके।”  इवान ने उनसे पूछा कि, “ तुम लोग रात को डिनर में क्या कर रहे थे और मिस्टर लोरेंजो का झगड़ा क्यों हुआ था?” इस पर अगाथा बोली कि, 
“ हमको पता था कि तुमको मीटिंग की बातें सुननी हैं तो वो लोग तुम पर ध्यान न दें इसलिए हमने झगड़े का नाटक किया था और उन लोगों का ध्यान भटकाने को ही मिस्टर लोरेंजो उनकी टेबल पर कुछ पूछने का बहाना करते हुए गए थे।”
इवान ने कहा कि, “ वो लोग इजिप्ट की  और फराओ अमेनहोटेप के किसी संदेश की बात कर रहे थे। उनके साथ के दो दक्षिणी अमेरिकी से दिखने वाले लोग किसी पिगरू और मनमन्का की चर्चा भी कर रहे थे।” बोबो, अगाथा कोई भी इस बात का अर्थ समझ नहीं पाए कि तभी उनकी कॉटेज का दरवाजा किसी ने खटखटाया। इवान दरवाजा खोलने को उठा तो बोबो ने उसको रोक दिया और खुद वो दरवाजा खोलने उठा। दरवाजे पर दो लोग थे एक पुरुष और एक नौजवान लड़की। पुरुष की उम्र लगभग 35-36 साल की लग रही थी, उसके नाक-नक्श भारत के हिमालयी इलाके या यों कहें तिब्बत के इलाके जैसे थे। उसकी लम्बाई लगभग 5 फिट की थी, दुबला लेकिन गठीला शरीर, चमड़ी का रंग कुछ-कुछ लालामी और पीलापन लिए हुए, आँखें बहुत छोटी थीं, उसकी आँखों के ऊपर भवें लगभग न के बराबर थीं, ना मूछें थीं और ना ही दाढ़ी के बाल थे और सर भी गंजा था। उसके साथ जो नौजवान लड़की थी उसकी लम्बाई सामान्य, रंग लालामी लिए गेहुआं, दो चोटी, कुछ दबी सी नाक, वो शक्ल से किसी दक्षिण अमेरिकी देश की लग रही थी।उस तिब्बती से लगते आदमी ने कहा कि, “ इवान मेरा नाम लामा चैम्पो है और मैं तिब्बत से हूँ। ये नौजवान लड़की दक्षिण अमेरिका के पेरू देश से है और इसका नाम मामा इब्बी है। हम लोग आगे के लिए तुम्हारी मदद करने आये हैं।” 
इस पर अगाथा और बोबो उनकी तरफ शक भरी नजरों से देखने लगे और संदेह तो इवान को भी हो ही रहा था।उन तीनों ने एक दूसरे की तरफ देखा कि अचानक इवान के मुँह से निकला, “सातके” और चैम्पो और इब्बी तुरंत समवेत स्वर में बोल उठे, “मातके, सातके-मातके।” 
अब इवान निश्चिंत हुआ और उन लोगों ने फिर से एक बार सारी बातों को दोहराया। इवान ने जैसे ही पिगरु और मनमन्का का नाम लिया मामा इब्बी का चेहरा एकदम से सफेद पड़ गया जैसे वो बहुत डर गई हो। इवान के पूछने पर उसने बताया कि, “ पिकिरू या पिगुएराओ रात और बुराई का संरक्षक देवता है और मननमका एक द्वेष रखने वाली दुष्ट देवी है, इन दोनों की पेरू की इन्का सभ्यता में चर्चा आयी है और अगर इनका जाग्रत आशीर्वाद उन लोगों के साथ है तो मामला काफी गम्भीर है” और जब मामा इब्बी ये बात बता रही थी तो उसका चेहरा बता रहा था कि वो बहुत डरी हुई है। इस पर बोबो ने हँसते हुए कहा कि, “ मामा इब्बी डरो मत हम हैं ना” और यह कहते हुए उसने अपनी आँखें बंद कर लीं और फिर खिलखिला कर हँस पड़ा।बोबो जब हँसता था तो उसके चेहरे के सफेद दांत चमकने लगते थे। तभी अगाथा ने कहा कि, “ मैं कल के सबके काहिरा, इजिप्ट की फ्लाइट के टिकिट करा देती हूँ क्योंकि अब हमारा अगला पड़ाव इजिप्ट ही है।”
युगांडा के एन्टेबे से काहिरा, इजिप्ट की यात्रा इजिप्ट एयर से 5 घण्टे 10 मिनट की थी और ये सीधी फ्लाइट थी।इवान को इजिप्ट एयर का खाना बहुत पसंद आया और वो लोग लगभग 11 बजे सुबह काहिरा पहुँच गए। काहिरा के हवाई अड्डे पर उन लोगों के स्वागत  नीली स्कर्ट और गुलाबी शर्ट पहने बहुत सुंदर लड़कियों ने एक-एक गुलाब भेंट करके किया।उन्होंने इवान और उसके साथियों की इमिग्रेशन आदि में मदद की और होटल की व्यवस्था के विषय में पूछा। इन लोगों से यह पता चलने पर कि होटल तो बुक है वो लड़की दूसरी ओर चली गयी।
काहिरा में मौसम खुशगवार था। उन लोगों के होटल की बुकिंग काहिरा से बाहर निकल कर गीज़ा इलाके में होटल गीज़ा पिरैमिड में थी। यह एक पाँच सितारा होटल था और इसके कम्पाउंड में बिल्डिंग के आसपास का इलाका बहुत हरा भरा और खूबसूरत था।
इवान अपना कार्यक्रम घर पर बताता रहता था और काहिरा पहुँच कर भी सबसे पहला काम उसने यही किया। इवान की जब अपने पापा से बात हुयी तो उन्होंने कहा कि, “ बहुत थके साउंड कर रहे हो?”  तो इवान बोला, “ हाँ शायद अजीब से रूटीन के कारण है।” उसके पापा ने कहा, ”कोई बात नहीं मैं आज रात की फ्लाइट से रामाशीष को तुम्हारे पास भेज रहा हूँ जिससे तुमको थकान हो तो वो तुम्हारा ध्यान रखेगा और हम लोगों को भी तसल्ली रहेगी।”
 होटल के कमरे में पहुँच कर इवान ने सबसे पहले बाथरूम में शावर के नीचे खड़े होकर गुनगुने पानी से लगभग 15 मिनट स्नान करके अपनी यात्रा की थकान मिटाई और फिर कमरे में बैठ कर एक कॉफी का ऑर्डर किया। दोपहर के लगभग 2 बज रहे थे और इवान और उसके साथी लंच के लिए होटल के रेस्त्रां में बैठे थे। मामा इब्बी ने कहा कि,  “हम लोग काहिरा तो आ गए हैं लेकिन इसके आगे क्या करना है उसके विषय में हमको कुछ भी पता नहीं है।”  इस पर अगाथा ने कहा कि, “ हम खाली तो बैठे नहीं रह सकते” तो अपने खास अंदाज में बोबो ने कहा, “ खाली बैठने से अच्छा तो हम लोग कहीं घूम-फिर लें वैसे भी इजिप्ट तो बहुत ही शानदार पर्यटन स्थल है।”  लामा चैम्पो का कहना था कि आज उसका ध्यान लगाने का कार्यक्रम नहीं हुआ है पर वो घूमने के बाद कर लेगा।

लेखक:- अतुल चतुर्वेदी

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