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सिंदबाद ट्रैवल्स:- इंग्लैंड में पान मसाला और पाकिस्तानी दुकानदार Pan masala in England and Pakistani store owner

सिंदबाद ट्रैवल्स इंग्लैंड में पान मसाला और पाकिस्तानी दुकानदार Pan masala in England and Pakistani store owner मुझको उन दिनों पान पराग पान मसाला (सादा बिना तम्बाकू वाला) खाने का शौक था और वो मुझ पर था नहीं।मैंने वहाँ के बाज़ार में पान पराग खोजा तो कहीं मिला नहीं फिर किसी के बताने पर कि वो आगे चल कर एक स्टोर में मिल सकता है मैं उस स्टोर की तरफ पैदल ही चल दिया।वो स्टोर यद्यपि काफी दूर था किंतु बर्मिंघम की हरियाली और खूबसूरत मौसम में वो लगभग आधे घंटे पैदल की दूरी कुछ मालूम ही नहीं पड़ी।मैने उस स्टोर में पहुँच कर अपनी खोज शुरू कर दी लेकिन लगभग सारी रैकों में खोजने के बाद भी मुझको पान मसाला कहीं नहीं मिला।मेरे चेहरे पर निराशा के भाव देख कर स्टोर के मालिक जिनकी उम्र लगभग 35-40 वर्ष की रही होगी वो मेरे पास आये और उन्होंने मुझसे पूछा कि जनाब आप क्या खोज रहे हैं?मैंने उनसे कहा कि मैं कई दिनों से पान पराग की तलाश में हूँ किन्तु मिल नहीं रहा तो वो बोले कि आज तो पान पराग नहीं है।इस पर मैं थोड़ा निराश होकर चलने लगा तो वो मुझको अपने बैठने के स्थान के पास ले गए और उसके पीछे दीवाल में बनी एक छोटी सी अलमा...

सिंदबाद ट्रैवल्स अमेरिका:- एटलांटिक सिटी. किसी की राय का कोई बीमा नहीं होता

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सिंदबाद ट्रैवल्स अमेरिका:- एटलांटिक सिटी किसी की राय का कोई बीमा नहीं होता अमेरिका का कार्यक्रम बनाने में मैंने टीसीआई वाले लाल साहब की मदद और राय ली थी।मेरा अनुभव है कि राय का कोई बीमा नहीं होता अर्थात यदि राय देने वाले की राय गलत निकल गयी तो उसका तो कुछ नहीं बिगड़ता लेकिन जिसने राय ली है उसका बंटाधार हो सकता है।ये राय आपने कितने ही काबिल व्यक्ति से और कितने ही सोच समझ कर ली हो लेकिन उसके गलत निकलने पर आपकी क्षतिपूर्ति का कोई जरिया नहीं होता है।कुछ ऐसा ही मेरे साथ हुआ।मुझको अमेरिका की ज्यादा जानकारी नहीं थी तो मुझको जहाँ-जहाँ जाना था वहाँ के हिसाब से लाल साहब की राय से और उनके द्वारा ही मैंने VUSA यानी विजिट यू ऐस ऐ की स्कीम के हवाई जहाज के टिकट लिए।ये कुछ-कुछ यूरेल जैसा था लेकिन उससे बहुत भिन्न।ये टिकट गिनती के डेस्टिनेशन्स के थे जो अपरिवर्तनीय किस्म के थे और इससे कुछ ऐसा कार्यक्रम होता कि वाशिंगटन से न्यूयॉर्क-शिकागो-बोस्टन-डलास टेक्सास-कैलिफोर्निया-लॉस एंजेल्स और वापिस वाशिंगटन।अब जब मैं यात्रा की तिथि तय करने  हेतु वाशिंगटन में सम्बंधित एयरला...

सिंदबाद ट्रैवल्स:- दुबई में पारिवारिक पल

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सिंदबाद ट्रैवल्स दुबई में पारिवारिक पल दुबई में छुट्टी के समय का उपयोग मैंने और रचना ने दुबई,शारजाह आदि घूम कर किया।हम लोग गोल्ड सूक गए जहाँ मैं पहले भी कई बार आ चुका था किन्तु अपनी पत्नी के साथ गोल्ड सूक जाना एक अलग ही अनुभव रहा।दुबई में अल रास से बाहर समुद्र की तरफ आकर नौका भ्रमण भी होता है।दुबई की ढलती शाम में दरिया में नौका में बैठ कर घूमने का एक अलग ही आनन्द था।दुबई की ढलती शाम में शांत ठहरे समुद्र में नौका पर खेवैया के अतिरिक्त बस मैं और रचना।एक तरफ समुद्र में तीन तरफ से पड़ती दुबई की रौशनी का प्रतिबिंब और उसके बीच तैरती हमारी नाव,  मैं बयान नहीं कर सकता उस अद्भुत अनुभव को,मन हो रहा था कि समुद्र बस ठहरा रहे,ये पल बस ठहरा रहे, नाव इसके पानी पर ऐसे ही तैरती रहे, शांत-मंद रफ्तार से, हम लोगों को समुद्र की शीतल लहरों को छूकर आती हवा जैसे अपने आँचल से सहलाती रहे और  मैं और रचना इसी क्षण का आनन्द लेते रहें बस मौन-एक दूसरे के हाथ को अपने हाथ में थामे हुए, कभी दुबई की ख़ूबसूरती, कभी समुद्र का गाम्भीर्य और कभी एक दूसरे की आँखों में निहारते हुए। सतीश मामा ने एक गाड़ी मय ड्राइवर हम लोग...

सिंदबाद ट्रैवल्स:- दुबई की एक और यात्रा

सिंदबाद ट्रैवल्स दुबई की एक और यात्रा एक्सपोर्ट का काम शुरू करने के बाद मैं न जाने कितनी बार विदेश गया और न जाने कहाँ-कहाँ गया जिसमें दुबई की भी बहुत यात्राएं हुईं। सन 2005 की दुबई यात्रा इसलिए उल्लेखनीय है कि इस यात्रा में मेरी पत्नी रचना भी मेरे साथ थीं।हुआ कुछ यूँ कि हमारा कुछ माल दुबई गया था वो किन्हीं कारणोंवश व्यापारी की कम्पनी ने छुड़ाया नहीं और वो अंततः वहीं की पोर्ट ऑथोरिटी द्वारा वहीं बेच दिया गया।अपने कागजों की खानापूर्ति हेतु इस माल को बेच दिया गया है इस विषयक सर्टिफिकेट की हमको ज़रूरत थी जिसके लिए इस बार दुबई जाना पड़ा। दुबई में उस समय मेरे सतीश मामा (मम्मी के छोटे ताऊजी के पुत्र) और उनका बेटा समीर रहते थे।उनका कोचीन,आगरा, एर्नाकुलम और दुबई आदि में मसालों (Spice) का पुश्तैनी कारोबार है।मैं और रचना दुबई पहुँचे जहाँ ऐयरपोर्ट पर समीर हमको लेने आ गए थे और हम लोग सीधे उनके न्यू दुबई के दुबई इन्वेस्टमेंट पार्क की ग्रीन कम्युनिटी स्थित उनके घर पहुँच गए।वहाँ पर सतीश मामा का खाने आदि का पूरा घर जैसा चतुर्वेदी परिवारों जैसे खान पान की पूरी व्यवस्था दुबई में भी थी और इसके लिए उनके यहाँ ...