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अथ श्री बार्बर कथा

अभी हाल में ही मैं अपने घर पर अपने बाल कटवा रहा था तो मिस्टर बार्बर से हमेशा की भांति बातचीत भी हो रही थी और इस संवाद में मेरी ज्यादा भुइमिका श्रोता की ही रहती है। वह मुझे बता रहा था कि आजकल शहर के और देश के क्या हालात हैं, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक विषयों पर आजकल लोगों की क्या सोच है और क्या विचार हैं। उससे बात करते हुए मैं सोच रहा था कि ऐसे पेशों के लोग जिनका रोज ही समाज के विविध किस्म के लोगों से मिलना-जुलना होता दरअसल समाज के सच्चे आईने होते हैं जैसे चौराहे के चाय वाले, पान की दुकान वाले, हेयर कटिंग सैलून वाले आदि। यही विचार करते मुझको अपने बचपन से अब तक के न जाने कितने बार्बर याद आने लगे जिनसे जुड़ी घटनाओं की यादें आपके साथ यहाँ शेयर कर रहा हूँ क्योंकि आपके सभी के भी इस किस्म के बहुत से अनुभव होंगे। हम लोग अधिकांशतः  फिरोजाबाद में अपने घर पर ही बाल कटवाते रहे हैं न कि किसी दुकान पर जाकर।मुझको बचपन की याद आयी कि हमारे बाबा ने अपनी जायदाद में कुछ लोगों को रहने को स्थान दिया हुआ था उनमें एक बलबीर नाई भी हुआ करते थे। बाहर मेन रोड की तरफ एक ओर बलबीर की कुर्सी आदि के साथ दुकान चलती...

अस्तित्व भाग:- 10

मेरे आने वाले उपन्यास 'अस्तित्व' के कुछ अंश भाग 10 माचू-पीचू और मामा जेबो जब इवान और उसके साथी काहिरा घूमने की तैयारी कर रहे थे तो लगभग उसी समय काहिरा से बहुत दूर दुनिया के बिल्कुल पश्चिमी हिस्से में दक्षिण अमरीका के पेरू देश में उरुबाम्बा घाटी - उरुबाम्बा नदी के पास ही कहीं कुछ लोग इकट्ठे थे।इस स्थान का नाम माचू-पीचू था , यह एक पहाड़ी स्थल है और पुरानी इंका सभ्यता के इंका लोगों के खोए हुए शहर के रूप में भी विख्यात है।उन इकट्ठे हुए लोगों में दो तो वही दक्षिण अमेरिकी लोग थे जो युगांडा की लेक ऊरो वाली मीटिंग में मौजूद थे और उनमें एक जो स्त्री थी उसका नाम मामा जेबो था और दूसरा उसका साथी पुरुष था।इनके अतिरिक्त यहाँ तीन-चार लोग और थे। मामा जेबो ने अपने साथी पुरुष से कहा ),  “सुनो रिजोलू, जिस समय का हमको हजारों साल से इंतज़ार था वो समय आ गया है। ये माचू पीचू के पत्थर गवाह है कि आज हम लोग जिस कार्य के लिए इतने बेकरार हैं वो इस पूरी दुनिया या पूरे सौरमण्डल के ही भविष्य को बदल देगा। ”  इस पर रिजोलू ने कहा कि,  “ अब वो समय दूर नहीं जब देवता पिकिरू और मननमका देवी के आशीर्वाद से हम उन ...

अस्तित्व भाग 9

मेरे आने वाले उपन्यास "अस्तित्व" के कुछ अंश भाग 9 बोबो,अगाथा,मामा इब्बी और  लामा चैम्पो काफी समय बाद बोबो ने उठ कर तीन कॉफी बनायीं और एक इवान को दी, एक अगाथा को और एक खुद पीने लगा। कॉफी पीते हुए अगाथा ने कहा कि,  “ इवान हम सबको इस दुःख को भूल कर अब आगे के विषय में सोचना होगा क्योंकि जरा सी भी देरी घातक हो सकती है।”  इस पर बोबो ने कहा कि, “ पहले हम धैर्य से सारे सूत्र इकट्ठे करें जिससे आगे का रास्ता तय हो सके।”  इवान ने उनसे पूछा कि, “ तुम लोग रात को डिनर में क्या कर रहे थे और मिस्टर लोरेंजो का झगड़ा क्यों हुआ था?” इस पर अगाथा बोली कि,  “ हमको पता था कि तुमको मीटिंग की बातें सुननी हैं तो वो लोग तुम पर ध्यान न दें इसलिए हमने झगड़े का नाटक किया था और उन लोगों का ध्यान भटकाने को ही मिस्टर लोरेंजो उनकी टेबल पर कुछ पूछने का बहाना करते हुए गए थे।” इवान ने कहा कि, “ वो लोग इजिप्ट की  और फराओ अमेनहोटेप के किसी संदेश की बात कर रहे थे। उनके साथ के दो दक्षिणी अमेरिकी से दिखने वाले लोग किसी पिगरू और मनमन्का की चर्चा भी कर रहे थे।” बोबो, अगाथा कोई भी इस बात का अर्थ समझ नही...

अस्तित्व भाग 8

मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश भाग 8 अब इवान को भरोसा हो गया था कि वो लोग उसके शुभचिंतक ही थे पर उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ये माजरा क्या है? मिस्टर लोरेंजो उसके मन के प्रश्न को समझ रहे थे तो वो बोले, “ सुनो इवान हम सबका उद्देश्य एक ही है। ये किस्सा इतना आसान नहीं है और ना ही मामला इतना छोटा है। इस बार जो खतरा है उसमें कम से कम इस पृथ्वी के तो अस्तित्व के लिए ही समस्या हो सकती है। इसमें इस समय की स्थिति ये है कि जो शक्तियां हजारों साल से धीरे-धीरे अपनी नकारात्मक कोशिशों में लगी थीं उनके प्रयासों और गतिविधियों में अचानक एकदम से बहुत तेजी आ गयी है। हमको ये सब तो मालूम है और ये भी पता है कि वो लोग कुछ बहुत बड़ा जो हमारी कल्पना शक्ति से भी परे हो सकता है ऐसा कुछ करने की योजना बना रहे हैं लेकिन इससे ज्यादा कुछ पता नहीं चल पा रहा है और सूत्रों को जोड़ने से ही यह गुत्थी सुलझेगी। हम सबकी आशा तुमसे ही है क्योंकि  तुम्हीं वो व्यक्ति हो जिसको हजारों साल से तराश-तराश कर अब इस समय में इतनी सारी शक्तियों से सज्जित किया गया है।” इवान कुछ समझा लेकिन बहुत कुछ नहीं समझ पाया तो मिस्टर लोरेंजो...

अस्तित्व 7

मेरे आने वाले उपन्यास के कुछ अंश भाग 7 इधर इन लोगों की बातचीत चल रही थी कि उधर मिस्टर लोरेंजो की टेबल पर तमाशा हो गया।शायद मिस्टर लोरेंजो ने शराब अधिक पी ली थी और वो अपने साथ के ही उस अफ्रीकन मूल के व्यक्ति से लड़ पड़े थे। इस हंगामे की तरफ से जब तक इवान का ध्यान वापिस उस टेबल पर आया तब तक उस टेबल पर बैठे वो पाँचों लोग वहाँ से न जाने कहाँ चले गए थे। अब इवान ने मिस्टर लोरेंजो की टेबल की ओर देखा तो वहाँ भी कोई नहीं था। अब तक इवान को यह लगभग पक्का लगने लगा था कि मिस्टर लोरेंजो का उन पाँच लोगों से कोई न कोई सम्बन्ध तो है। इवान की समझ में नहीं आ रहा था कि वो अब आगे क्या करे तो उसने सोचा कि अब सोया जाए और कल आगे के कार्यक्रम पर विचार किया जाएगा। अपनी कॉटेज में आकर इवान आज के उस घटनाक्रम पर विचार करने लगा और न जाने कब उसकी आँख लग गयी। सुबह होने पर जब इवान की आँख खुली तो खिड़की के बाहर बहुत ही मनोरम दृश्य था। वहाँ न जाने कितने इम्पाला और उनके शावक दौड़ लगा रहे थे। इवान अपने हाथ में कॉफी का प्याला लिए बालकनी में कुर्सी पर बैठ कर उस मनभावन दृश्य को निहार रहा था कि अचानक उन इम्पाला समूहों में से उसने ...

अस्तित्व भाग 6

मेरे द्वारा लिखे गए आगामी उपन्यास के कुछ अंश भाग 5 लेक ऊरो-युगांडा एक दिन इवान सुबह उठकर अपने घर के  बगीचे में कुत्तों से खेल रहा था कि अचानक कहीं से एक आवाज आयी। किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था, “इवान।”  उसको वो आवाज़ कुछ जानी पहचानी लगी और उसने ऊपर की तरफ देखा तो वही 7 सिस्टर्स थीं, रोम वाली। इवान उत्सुकता और उत्साह में कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसको अपने पापा की बात याद आयी और उसने कहा, “सातके” और दूसरी ओर से तुरन्त जवाब मिला, “मातके- सातके-मातके।” अब इवान निश्चिंत हुआ। तभी उन चिड़ियों में से एक बोली, “ इवान, उन लोगों की एक मीटिंग अफ्रीका के युगांडा देश के लेक ऊरो (Mundo) इलाके में हो रही है। कुछ बड़ा करना चाहते हैं वो लोग। तुमको वहाँ जाकर न सिर्फ सारी जानकारी हासिल करने होगी बल्कि उनकी इस खतरनाक विध्वंसकारी योजना को  असफल भी करना होगा। मीटिंग आगामी बुधवार या बृहस्पतिवार को उसी इलाके में होनी तय है। आज बुधवार ही है तो तुम अपना कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाओ।”  इवान ने पूरी बात अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा,कि” वैसे तो व्यापार के सिलसिले में तुम्हारा अनेकों देश आ...

अस्तित्व भाग 5

मेरे द्वारा लिखे गए आगामी उपन्यास के कुछ अंश भाग 5 लेक ऊरो-युगांडा एक दिन इवान सुबह उठकर अपने घर के  बगीचे में कुत्तों से खेल रहा था कि अचानक कहीं से एक आवाज आयी। किसी ने उसका नाम लेकर पुकारा था, “इवान।”  उसको वो आवाज़ कुछ जानी पहचानी लगी और उसने ऊपर की तरफ देखा तो वही 7 सिस्टर्स थीं, रोम वाली। इवान उत्सुकता और उत्साह में कुछ बोलने ही वाला था कि अचानक उसको अपने पापा की बात याद आयी और उसने कहा, “सातके” और दूसरी ओर से तुरन्त जवाब मिला, “मातके- सातके-मातके।” अब इवान निश्चिंत हुआ। तभी उन चिड़ियों में से एक बोली, “ इवान, उन लोगों की एक मीटिंग अफ्रीका के युगांडा देश के लेक ऊरो (Mundo) इलाके में हो रही है। कुछ बड़ा करना चाहते हैं वो लोग। तुमको वहाँ जाकर न सिर्फ सारी जानकारी हासिल करने होगी बल्कि उनकी इस खतरनाक विध्वंसकारी योजना को  असफल भी करना होगा। मीटिंग आगामी बुधवार या बृहस्पतिवार को उसी इलाके में होनी तय है। आज बुधवार ही है तो तुम अपना कार्यक्रम उसी के अनुसार बनाओ।”  इवान ने पूरी बात अपने पापा को बताई तो पापा ने कहा,कि” वैसे तो व्यापार के सिलसिले में तुम्हारा अनेकों देश आ...