Posts

इतिहास और संस्कृति के किस्से-34 हेमू

इतिहास और संस्कृति के किस्से-34 आज किस्सा है मुगलवंश की तकदीर पलटने के दिन का अर्थात पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू की हार और अकबर की जीत का अकबरनामा में इस विषय में जिक्र करते हुए अबुल फजल लिखता है कि, “हे महान ईश्वर! भाग्य कितने विविध रूप दिखाता है और नियति कितनी जटिल है! कोई तिनका भी बिना उद्देश्य के अंकुरित नहीं होता और न कोई पत्ता बिना किसी कारण के हिलता है।” ऐसा ही एक अवसर था पानीपत का युद्ध, जिसे अबुल फ़ज़्ल ने “बज़्म-ए-रज़्मनामा”—यानी युद्ध-उत्सव—कहा है। मुग़ल पक्ष का मानना था कि तर्दी ख़ाँ की हार के बाद हेमचंद्र विक्रमादित्य—हेमू—का घमंड बढ़ गया था और उसने अपने पास पचास हज़ार घुड़सवार, एक हज़ार हाथी, इक्यावन तोपें और पाँच सौ फाल्कनें एकत्र कर लीं। हेमू ने अपने तोपखाने को अपने से आगे  पानीपत भेज दिया जो दिल्ली से तीस कोस दूर था। इस सेना का नेतृत्व मुबारक खान, और बहादुर खान कर रहे थे। इधर मुग़ल फौज के काबिल अफसर लाल खान बदक्शी, कुली उज़्बेक और समानजी खान को मुग़ल नेतृत्व ने आगे जाकर हमला करने को भेज दिया जिसमें अली कुली खाँ शैबानी के लोग भी शामिल हो गए और इन लोगों ने हमला करके...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-33 ऐबक

इतिहास और संस्कृति के किस्से-33 क्या आपको पता है कि मुहम्मद गौरी की विजय के बाद दिल्ली का पहला सुल्तान कौन बना? उस सुल्तान का नाम जो था वह क्यों पड़ा? क्या आपको मालूम है कि दिल्ली की कुतुब मीनार किसने बनवाई और उस जैसी या उससे मिलती जुलती दूसरी मीनार कहाँ है?कौन सी है? इब्नबतूता लिखता है कि प्रसिद्ध विद्वान एवं काज़ी-उल-कुज़्ज़ात (मुख्य क़ाजी) कमालुद्दीन मुहम्मद बिन (son of) बुरहानुद्दीन ‘सदरे जहाँ’ कहते थे कि दिल्ली पर मुसलमानों ने हिजरी सन 584 (सन 1188 ईस्वी) में विजय प्राप्त की।इब्नबतूता ने लिखा है कि यही तिथि स्वयं उसने जामे मस्जिद की मेहराब में लिखी देखी थी। हाँलाँकि कनिंघम के अनुसार यह तिथि 589 हिजरी है यानी कि 1193 ईस्वी। गज़नी और खुरासान के बादशाह शहाबुद्दीन मुहम्मद बिन (son of) साम, गोरी के गुलाम सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने यह नगर जीता था। बादशाह शहाबुद्दीन गोरी ने कुतुबुद्दीन को एक बड़ी सेना देकर भारत की ओर भेजा तब इसने सबसे पहले लाहौर जीता फिर दिल्ली। बदायूनीं ने लिखा है कि सुल्तान मलिक कुतुबुद्दीन ऐबक जो सुल्तान का सेवक और गोद लिया बेटा था उसने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और उस दिन...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-32. रामायण:समुद्र पर सेतुबंध

इतिहास और संस्कृति के किस्से-32 रामायण:समुद्र पर सेतुबंध श्रीराम कथा में समुद्र पर सेतु बांधना एक बहुत रोचक और विस्मयकारी घटनाक्रम है। जैसा मैं पहले भी कह चुका हूँ कि रामायण विषयक इन लेखों में मेरा मूलसोर्स महाकवि वाल्मीकि रचित श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण है और अन्य ग्रन्थों के अलावा मैंने फादर कामिल बुल्के की ‘रामकथा’ की भी मदद ली है और हाँ आप इसको इतिहास मानें या मिथक यह विषय आप पाठकों का है लेकिन महाकवि वाल्मीकि की अद्भुत रचना का आनन्द भी अद्भुत ही है। तो आज वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड के सर्ग 11 और 12 से चर्चा सेतुबंध की:- अपने सारे साथियों और सेना के साथ श्री रामचन्द्र जी समुद्र किनारे पहुँच गए थे। रामचन्द्र जी ने समुद्र के तट पर कुशा बिछाई और महासागर के समक्ष हाथ जोड़ कर पूर्वाभिमुख होकर वहाँ लेट गए। वाल्मीकि जी ने वर्णन किया है कि अयोध्या में अनेकों किस्म के आभूषणों से सुसज्जित रहने वाले रामचन्द्र जी अपनी दाहिनी बाँह को तकिया बना कर उस कुशासन पर सो गए। भगवान राम ने तीन दिनों तक समुद्र की प्रार्थना की किंतु समुद्र उनके सामने उपस्थित नहीं हुए। इस पर रामचन्द्र जी ने समुद्र पर कुपित हो...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-31. मुग़ल दरबार के प्रोटोकॉल:- शाहजहाँ का दरबार;आसफखां

इतिहास और संस्कृति के किस्से-31 मुग़ल दरबार के प्रोटोकॉल:- शाहजहाँ का दरबार;आसफखां हर राज्य या समाज के अपने नियम और परम्परा होते हैं और ये उस व्यवस्था के अभिन्न अंग होते हैं। जब कोई समाज या राज्य मजबूत होते हैं तो ये प्रोटोकॉल भी उतने ही जबरदस्त होते हैं और कमजोर होने पर इनको भी क्षीण होते देर नहीं लगती। मुग़ल दरबार के भी कानून और कायदे बहुत व्यवस्थित और मजबूत थे,कड़े थे। उस समय के लेखकों ने ऐसी कई घटनाओं का वर्णन बहुत रोचक ढंग से किया है और कभी-कभी तो इन कायदों की परिणिति उन घटनाओं में हुयी जिन्होंने इतिहास बदल दिया या इतिहास रच दिया जैसे मुग़ल दरबार में छत्रपति शिवाजी महाराज का किस्सा, लेकिन उसकी चर्चा किसी और कड़ी में करेंगे, आज बात शाहजहाँ के दरबार की। आप सबको मालूम ही है कि जब शहजादा खुर्रम जहाँगीर के मरने के बाद आगरा पहुँचा तो कैसे शवयात्रा के रूप में पहुँचा था और वहाँ उसके ससुर आसफखां (मुमताजमहल का पिता और नूरजहाँ का भाई) ने कैसे उसको पहले से तैयार हाथी पर बैठा कर शहंशाह हिंदुस्तान शाहजहाँ बनने में कितना बड़ा,महत्वपूर्ण और मुख्य रोल निभाया था। यहाँ इस बात को लिखने का मकसद यह बताना है ...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-30. चचनामा : सिंध से उपजी एक अनकही दास्तान

इतिहास और संस्कृति के किस्से-30 चचनामा : सिंध से उपजी एक अनकही दास्तान क्या आपको पता है कि भारत में पहला मुस्लिम आक्रमण कहाँ हुआ था? भारतीय उपमहाद्वीप में हम दिल्ली या दक्षिण के राज्यों की और उनके इतिहास की बातें करते सुनते रहते हैं लेकिन हमको उन स्थानों के इतिहास की जानकारी भी करनी होगी जहाँ की घटनाओं ने हमारा इतिहास ही बदल दिया। उन किस्सों को बताने वाले ग्रन्थों को भी पढ़ना होगा जिनमें ऐसे वाक्यात दर्ज किए गए हैं। ऐसा ही एक ग्रंथ है चचनामा जिसके विषय में मुझको मेरे पुत्र अर्पित से पता चला। चचनामा केवल एक युद्ध और विजय की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि किस प्रकार सत्ता, राजनीति, धर्म और संस्कृति आपस में टकराते हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप में अरबों के आगमन का पहला बड़ा लिखित दस्तावेज़ है और पाकिस्तान व भारत के इतिहास को समझने का आधार भी। इस चचनामा में जिक्र है सिंध के रायवंश का और फिर उनके बाद चच और उसके पुत्र दाहर के शासन का जिसके समय में भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण मुहम्मद बिन कासिम ने किया। सदियों पहले, 8वीं शताब्दी में जब मुहम्मद बिन क़ासिम की सेनाएँ सिंध की धरती पर उतरीं, तो यह ...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-29. अकबर और आधम खाँ का किस्सा

इतिहास और संस्कृति के किस्से-29 अकबर और आधम खाँ का किस्सा एक बार मेरी हेरम्ब भाईसाहब Heramb Chaturvedi ji से चर्चा चल रही थी और मैंने उनसे पूछा कि आखिर मुग़ल बादशाह रोजमर्रा की बोलचाल में कौन सी भाषा या बोली का प्रयोग करते थे यह जानने की मुझको बहुत उत्सुकता है। भाईसाहब ने इसके लिए कुछ किताबें बतायीं और फिर मुझसे आदरणीय प्रोफेसर हरबंस मुखिया जी की पुस्तक ‘The Mughals of India भी पढ़ने को कहा जो मेरे पुत्र अर्पित दिल्ली से मेरे लिए लाए (2013 में) और इस पुस्तक को पढ़ने से बहुत सी नयी बातें मुझको ज्ञात हुयीं। इस किताब में अकबर और आधम खान वाले प्रकरण में अकबर द्वारा दी गयी गाली मेरे लिए नयी जानकारी थी। इसके बाद मैंने अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी, मुन्तख़ब-उत-तवारीख आदि अनेक पुस्तकें पढ़ीं और जितना पढ़ा उतनी जानने की उत्कंठा बढ़ती चली गयी। आज की पोस्ट में आधम खाँ वाला किस्सा है। इस घटना का वृत्तांत यह है कि आधम ख़ाँ, जो माहम अनगा का छोटा पुत्र था, वह  न तो बुद्धिमान था और न ही अच्छे संस्कारों वाला। वह जवानी और समृद्धि के अहंकार में डूबा रहता था और हमेशा शम्सुद्दीन मुहम्मद अतगा ख़ाँ से ईर्ष्या करता रहत...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-28. किस्सा है रामायण का

इतिहास और संस्कृति के किस्से-28 आज किस्सा है रामायण का पुष्पक विमान का और लंका के महलों में रावण और राक्षसों के लिए बनने वाले भोजन का। मूल सोर्स श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण साथ में फादर कामिल बुल्के की 'रामकथा' बहुत समय से मेरा मन उपरोक्त विषय पर लिखने का था। रामायण को आप इतिहास मानें या मिथक यह मैं पाठकों पर छोड़ता हूँ । किसी मिथक या विश्वास के सम्बंध में जब तक हमको किसी किस्म के पक्के साक्ष्य नहीं मिल जाते जिनका तर्कसंगत विश्लेषण करके उस चीज या तथ्य को ऐतिहासिक सिद्ध किया जा सके तब तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले विद्वान उसको इतिहास न मान कर मिथक ही मानते हैं लेकिन अपने विश्वास और रामायण के विविध संस्करणों को पढ़कर, उसमें दिए रूट को देखकर मेरा मन इसको मिथक न मान कर ऐसा इतिहास मानता है जिसकी वो कड़ी अभी लुप्त है जिसके प्रमाण के आधार पर इसको ऐतिहासिक मानने के साथ ही साथ ऐतिहासिक साबित भी किया जा सके। शायद उसके लिए अभी काफी उत्खनन आदि होने की आवश्यकता है और बिना राजनीति के। खैर जो मैं आज लिखने जा रहा हूँ उस लेखन के सोर्स के रूप में मैंने गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद्वाल्मीकीय रामा...