फिरोज़ाबाद — काँच का शहर, विरासत की आग
फिरोज़ाबाद — काँच का शहर, विरासत की आग सदियों से फिरोज़ाबाद की भट्टियों की लौ ने न जाने कितने लोगों के घरों को रोशनी दी है। मुग़ल दरबारों से लेकर आधुनिक शो-रूम्स तक — यहाँ के शिल्पियों ने आग को सौंदर्य में और कौशल को विरासत में बदला है। पर इस जबरदस्त चमक के पीछे एक संघर्ष भी है। आज भी अधिकांश कारीगर “देखकर सीखते” हैं — न कि किसी औपचारिक प्रशिक्षण या आधुनिक डिज़ाइन शिक्षा से और असलियत यह है कि यदि उनको उचित प्रशिक्षण मिले तो ये लोग कमाल ही कर देंगे। हुनर पुराना है, और व्यवस्था शायद उससे भी पुरानी पड़ चुकी है। दुनिया जब वेनिस के Murano Glass की तारीफ़ करती है, तब यह समझना भी जरूरी हो जाता है कि फिरोज़ाबाद के शिल्पकार सीमित साधनों, कच्चे माल की कमी और आधुनिक डिज़ाइन एक्सपोज़र के बिना भी अपनी कला को जीवित रखते हैं। आधुनिक ऑटोमैटिक भट्टियाँ आईं, उत्पादन बढ़ा, लेकिन हाथ की वह नज़ाकत — वह आत्मा — जिसने इस शहर को पहचान और प्रसिद्धि दी, धीरे-धीरे खोने लगी। आज छोटे उद्योग लालफीताशाही, अनुमति, प्रक्रियाओं और भारी अनुपालनों में उलझे हैं। ऊर्जा के रूप में गैस का उ...