इतिहास और संस्कृति के किस्से-16आज का किस्सा है मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनीं की लिखी किताब मुन्तख़ब-उत-तवारीख से अकबर की शादी
इतिहास और संस्कृति के किस्से-16 आज का किस्सा है मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनीं की लिखी किताब मुन्तख़ब-उत-तवारीख से। बदायूनीं लिखता है कि यह उस वक़्त की बात है जब बादशाह अकबर के दिमाग में खुद को शादी के रिश्ते में जोड़ने का ख्याल आया। कव्वालों (वे व्यक्ति जो लड़की के पिता को शादी के लिए राजी करते थे-पुराने नाइयों की तरह) तथा हिजड़ों को इस काम की जिम्मेदारी दी गयी। इन लोगों ने कुलीनों के हरमों में जानकारी करना शुरू कर दिया। उस समय का यही तरीका था और ऐसा करने से पूरे शहर में आतंक फैल जाता था जो हुआ भी। आगरा के मौतबीर शेख बदाह के एक पुत्र की मृत्यु हो चुकी थी और उनकी पुत्रवधु विधवा थी।इस विधवा पुत्रवधु के अपनी दर्जिन के माध्यम से पड़ोसी बुजुर्ग अधम ख़ाँ के भाई बाकी खाँ से अनैतिक सम्पर्क थे लेकिन बाद में इन सम्बन्धों की परिणित विवाह में हुई । यह विधवा महिला जब उत्सवों में जाती तो शेख बदाह की अन्य पुत्रवधु को भी लाती जिसका पति जीवित था और उसका नाम अब्द-उल-वासी था। इस अब्द-उल-वासी की पत्नी बेहद खूबसूरत थी। संयोग से या कह सकते हैं कि वासी के दुर्भाग्य से एक दिन शहंशाह अकबर की दृष्टि उस महिला पर पड़...