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Showing posts from September, 2025

इतिहास और संस्कृति के किस्से-34 हेमू

इतिहास और संस्कृति के किस्से-34 आज किस्सा है मुगलवंश की तकदीर पलटने के दिन का अर्थात पानीपत के द्वितीय युद्ध में हेमू की हार और अकबर की जीत का अकबरनामा में इस विषय में जिक्र करते हुए अबुल फजल लिखता है कि, “हे महान ईश्वर! भाग्य कितने विविध रूप दिखाता है और नियति कितनी जटिल है! कोई तिनका भी बिना उद्देश्य के अंकुरित नहीं होता और न कोई पत्ता बिना किसी कारण के हिलता है।” ऐसा ही एक अवसर था पानीपत का युद्ध, जिसे अबुल फ़ज़्ल ने “बज़्म-ए-रज़्मनामा”—यानी युद्ध-उत्सव—कहा है। मुग़ल पक्ष का मानना था कि तर्दी ख़ाँ की हार के बाद हेमचंद्र विक्रमादित्य—हेमू—का घमंड बढ़ गया था और उसने अपने पास पचास हज़ार घुड़सवार, एक हज़ार हाथी, इक्यावन तोपें और पाँच सौ फाल्कनें एकत्र कर लीं। हेमू ने अपने तोपखाने को अपने से आगे  पानीपत भेज दिया जो दिल्ली से तीस कोस दूर था। इस सेना का नेतृत्व मुबारक खान, और बहादुर खान कर रहे थे। इधर मुग़ल फौज के काबिल अफसर लाल खान बदक्शी, कुली उज़्बेक और समानजी खान को मुग़ल नेतृत्व ने आगे जाकर हमला करने को भेज दिया जिसमें अली कुली खाँ शैबानी के लोग भी शामिल हो गए और इन लोगों ने हमला करके...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-33 ऐबक

इतिहास और संस्कृति के किस्से-33 क्या आपको पता है कि मुहम्मद गौरी की विजय के बाद दिल्ली का पहला सुल्तान कौन बना? उस सुल्तान का नाम जो था वह क्यों पड़ा? क्या आपको मालूम है कि दिल्ली की कुतुब मीनार किसने बनवाई और उस जैसी या उससे मिलती जुलती दूसरी मीनार कहाँ है?कौन सी है? इब्नबतूता लिखता है कि प्रसिद्ध विद्वान एवं काज़ी-उल-कुज़्ज़ात (मुख्य क़ाजी) कमालुद्दीन मुहम्मद बिन (son of) बुरहानुद्दीन ‘सदरे जहाँ’ कहते थे कि दिल्ली पर मुसलमानों ने हिजरी सन 584 (सन 1188 ईस्वी) में विजय प्राप्त की।इब्नबतूता ने लिखा है कि यही तिथि स्वयं उसने जामे मस्जिद की मेहराब में लिखी देखी थी। हाँलाँकि कनिंघम के अनुसार यह तिथि 589 हिजरी है यानी कि 1193 ईस्वी। गज़नी और खुरासान के बादशाह शहाबुद्दीन मुहम्मद बिन (son of) साम, गोरी के गुलाम सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक ने यह नगर जीता था। बादशाह शहाबुद्दीन गोरी ने कुतुबुद्दीन को एक बड़ी सेना देकर भारत की ओर भेजा तब इसने सबसे पहले लाहौर जीता फिर दिल्ली। बदायूनीं ने लिखा है कि सुल्तान मलिक कुतुबुद्दीन ऐबक जो सुल्तान का सेवक और गोद लिया बेटा था उसने दिल्ली को अपनी राजधानी बनाया और उस दिन...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-32. रामायण:समुद्र पर सेतुबंध

इतिहास और संस्कृति के किस्से-32 रामायण:समुद्र पर सेतुबंध श्रीराम कथा में समुद्र पर सेतु बांधना एक बहुत रोचक और विस्मयकारी घटनाक्रम है। जैसा मैं पहले भी कह चुका हूँ कि रामायण विषयक इन लेखों में मेरा मूलसोर्स महाकवि वाल्मीकि रचित श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण है और अन्य ग्रन्थों के अलावा मैंने फादर कामिल बुल्के की ‘रामकथा’ की भी मदद ली है और हाँ आप इसको इतिहास मानें या मिथक यह विषय आप पाठकों का है लेकिन महाकवि वाल्मीकि की अद्भुत रचना का आनन्द भी अद्भुत ही है। तो आज वाल्मीकि रामायण के युद्धकाण्ड के सर्ग 11 और 12 से चर्चा सेतुबंध की:- अपने सारे साथियों और सेना के साथ श्री रामचन्द्र जी समुद्र किनारे पहुँच गए थे। रामचन्द्र जी ने समुद्र के तट पर कुशा बिछाई और महासागर के समक्ष हाथ जोड़ कर पूर्वाभिमुख होकर वहाँ लेट गए। वाल्मीकि जी ने वर्णन किया है कि अयोध्या में अनेकों किस्म के आभूषणों से सुसज्जित रहने वाले रामचन्द्र जी अपनी दाहिनी बाँह को तकिया बना कर उस कुशासन पर सो गए। भगवान राम ने तीन दिनों तक समुद्र की प्रार्थना की किंतु समुद्र उनके सामने उपस्थित नहीं हुए। इस पर रामचन्द्र जी ने समुद्र पर कुपित हो...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-31. मुग़ल दरबार के प्रोटोकॉल:- शाहजहाँ का दरबार;आसफखां

इतिहास और संस्कृति के किस्से-31 मुग़ल दरबार के प्रोटोकॉल:- शाहजहाँ का दरबार;आसफखां हर राज्य या समाज के अपने नियम और परम्परा होते हैं और ये उस व्यवस्था के अभिन्न अंग होते हैं। जब कोई समाज या राज्य मजबूत होते हैं तो ये प्रोटोकॉल भी उतने ही जबरदस्त होते हैं और कमजोर होने पर इनको भी क्षीण होते देर नहीं लगती। मुग़ल दरबार के भी कानून और कायदे बहुत व्यवस्थित और मजबूत थे,कड़े थे। उस समय के लेखकों ने ऐसी कई घटनाओं का वर्णन बहुत रोचक ढंग से किया है और कभी-कभी तो इन कायदों की परिणिति उन घटनाओं में हुयी जिन्होंने इतिहास बदल दिया या इतिहास रच दिया जैसे मुग़ल दरबार में छत्रपति शिवाजी महाराज का किस्सा, लेकिन उसकी चर्चा किसी और कड़ी में करेंगे, आज बात शाहजहाँ के दरबार की। आप सबको मालूम ही है कि जब शहजादा खुर्रम जहाँगीर के मरने के बाद आगरा पहुँचा तो कैसे शवयात्रा के रूप में पहुँचा था और वहाँ उसके ससुर आसफखां (मुमताजमहल का पिता और नूरजहाँ का भाई) ने कैसे उसको पहले से तैयार हाथी पर बैठा कर शहंशाह हिंदुस्तान शाहजहाँ बनने में कितना बड़ा,महत्वपूर्ण और मुख्य रोल निभाया था। यहाँ इस बात को लिखने का मकसद यह बताना है ...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-30. चचनामा : सिंध से उपजी एक अनकही दास्तान

इतिहास और संस्कृति के किस्से-30 चचनामा : सिंध से उपजी एक अनकही दास्तान क्या आपको पता है कि भारत में पहला मुस्लिम आक्रमण कहाँ हुआ था? भारतीय उपमहाद्वीप में हम दिल्ली या दक्षिण के राज्यों की और उनके इतिहास की बातें करते सुनते रहते हैं लेकिन हमको उन स्थानों के इतिहास की जानकारी भी करनी होगी जहाँ की घटनाओं ने हमारा इतिहास ही बदल दिया। उन किस्सों को बताने वाले ग्रन्थों को भी पढ़ना होगा जिनमें ऐसे वाक्यात दर्ज किए गए हैं। ऐसा ही एक ग्रंथ है चचनामा जिसके विषय में मुझको मेरे पुत्र अर्पित से पता चला। चचनामा केवल एक युद्ध और विजय की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताता है कि किस प्रकार सत्ता, राजनीति, धर्म और संस्कृति आपस में टकराते हैं। यह भारतीय उपमहाद्वीप में अरबों के आगमन का पहला बड़ा लिखित दस्तावेज़ है और पाकिस्तान व भारत के इतिहास को समझने का आधार भी। इस चचनामा में जिक्र है सिंध के रायवंश का और फिर उनके बाद चच और उसके पुत्र दाहर के शासन का जिसके समय में भारत पर पहला मुस्लिम आक्रमण मुहम्मद बिन कासिम ने किया। सदियों पहले, 8वीं शताब्दी में जब मुहम्मद बिन क़ासिम की सेनाएँ सिंध की धरती पर उतरीं, तो यह ...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-29. अकबर और आधम खाँ का किस्सा

इतिहास और संस्कृति के किस्से-29 अकबर और आधम खाँ का किस्सा एक बार मेरी हेरम्ब भाईसाहब Heramb Chaturvedi ji से चर्चा चल रही थी और मैंने उनसे पूछा कि आखिर मुग़ल बादशाह रोजमर्रा की बोलचाल में कौन सी भाषा या बोली का प्रयोग करते थे यह जानने की मुझको बहुत उत्सुकता है। भाईसाहब ने इसके लिए कुछ किताबें बतायीं और फिर मुझसे आदरणीय प्रोफेसर हरबंस मुखिया जी की पुस्तक ‘The Mughals of India भी पढ़ने को कहा जो मेरे पुत्र अर्पित दिल्ली से मेरे लिए लाए (2013 में) और इस पुस्तक को पढ़ने से बहुत सी नयी बातें मुझको ज्ञात हुयीं। इस किताब में अकबर और आधम खान वाले प्रकरण में अकबर द्वारा दी गयी गाली मेरे लिए नयी जानकारी थी। इसके बाद मैंने अकबरनामा, आइन-ए-अकबरी, मुन्तख़ब-उत-तवारीख आदि अनेक पुस्तकें पढ़ीं और जितना पढ़ा उतनी जानने की उत्कंठा बढ़ती चली गयी। आज की पोस्ट में आधम खाँ वाला किस्सा है। इस घटना का वृत्तांत यह है कि आधम ख़ाँ, जो माहम अनगा का छोटा पुत्र था, वह  न तो बुद्धिमान था और न ही अच्छे संस्कारों वाला। वह जवानी और समृद्धि के अहंकार में डूबा रहता था और हमेशा शम्सुद्दीन मुहम्मद अतगा ख़ाँ से ईर्ष्या करता रहत...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-28. किस्सा है रामायण का

इतिहास और संस्कृति के किस्से-28 आज किस्सा है रामायण का पुष्पक विमान का और लंका के महलों में रावण और राक्षसों के लिए बनने वाले भोजन का। मूल सोर्स श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण साथ में फादर कामिल बुल्के की 'रामकथा' बहुत समय से मेरा मन उपरोक्त विषय पर लिखने का था। रामायण को आप इतिहास मानें या मिथक यह मैं पाठकों पर छोड़ता हूँ । किसी मिथक या विश्वास के सम्बंध में जब तक हमको किसी किस्म के पक्के साक्ष्य नहीं मिल जाते जिनका तर्कसंगत विश्लेषण करके उस चीज या तथ्य को ऐतिहासिक सिद्ध किया जा सके तब तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले विद्वान उसको इतिहास न मान कर मिथक ही मानते हैं लेकिन अपने विश्वास और रामायण के विविध संस्करणों को पढ़कर, उसमें दिए रूट को देखकर मेरा मन इसको मिथक न मान कर ऐसा इतिहास मानता है जिसकी वो कड़ी अभी लुप्त है जिसके प्रमाण के आधार पर इसको ऐतिहासिक मानने के साथ ही साथ ऐतिहासिक साबित भी किया जा सके। शायद उसके लिए अभी काफी उत्खनन आदि होने की आवश्यकता है और बिना राजनीति के। खैर जो मैं आज लिखने जा रहा हूँ उस लेखन के सोर्स के रूप में मैंने गीता प्रेस गोरखपुर से प्रकाशित श्रीमद्वाल्मीकीय रामा...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-27. किस्सा चौथे मुग़ल बादशाह जहाँगीर और उसकी आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-जहांगीरी’ की।

इतिहास और संस्कृति के किस्से-27 आज किस्सा चौथे मुग़ल बादशाह जहाँगीर और उसकी आत्मकथा ‘तुज़ुक-ए-जहांगीरी’ की। क्या आपको पता है कि:- -जहाँगीर की आत्मकथा या memoirs किस भाषा में लिखे गए हैं और उनके अनुवादक कौन हैं? -जहाँगीर देखने में कैसा लगता था? -सलीम का नाम बादशाह बनने पर जहाँगीर किसने रखा था और क्यों? -साहिब किरानी, फिरदौस मकानी, जन्नत आशियानी, अर्श आशियानी, ये नाम किन बादशाहों के लिए प्रयुक्त हुए? -न्याय की जंज़ीर किस धातु से बनी थी? -जहाँगीर कितनी शराब रोज पीता था? पहली बात बेवरिज दम्पत्ति की मुग़ल सम्राटों की आत्मकथाएँ और उनके अनुवाद भारतीय इतिहास को जानने के लिए मुग़ल सम्राटों की आत्मकथाएँ और दरबारी लेख अत्यंत महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इनका मूल लेखन फ़ारसी और तुर्की भाषाओं में हुआ, और बाद में ब्रिटिश विद्वानों ने इन्हें अंग्रेज़ी में अनूदित कर दुनिया के सामने प्रस्तुत किया। बाबरनामा –यह बाबर द्वारा चगताई तुर्की भाषा में लिखा गया था। इसका पहला अंग्रेज़ी अनुवाद जॉन लेडन और विलियम एर्स्किन ने किया। बाद में एनेट सुज़ैनाह बेवरिज (Annette S. Beveridge) ने इसका अनुवाद किया, जो आज प्रोजेक्ट गुटेन...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-26आज आगरा की बात:- कुछ मिथक, कुछ इतिहास

इतिहास और संस्कृति के किस्से-26 आज आगरा की बात:- कुछ मिथक, कुछ इतिहास क्या आपको पता है कि आगरा को सबसे पहले किसने हिंदुस्तान की राजधानी बनाया? क्या आपको पता है कि आगरा का सम्बंध रेणुका आश्रम और भगवान परशुराम से भी बताया गया है? क्या आप जानते हैं कि महाकवि सूरदास का भी आगरा से सम्बन्ध था? क्या आपको पता है कि आगरा के चार प्रमुख शिव मंदिर शहर की सीमाओं या कोनों पर स्थित हैं – मनकामेश्वर मंदिर, बल्केश्वर मंदिर, कैलाश मंदिर और रावली मंदिर। इनमें से पहले दो मंदिर यमुना नदी के तट पर बने हैं? क्या आपको पता है महमूद गजनवी ने आगरा पर भी हमला किया था? क्या आपको पता है कि आगरा पर मराठों का भी अधिकार रहा? क्या आपको पता है कि 6 जुलाई सन 1505 ईस्वी को आगरा में एक विनाशकारी भूकम्प आया था जिसने बहुत तबाही की थी? आगरा के स्व0 सतीश चंद्र चतुर्वेदी जी ने अपनी किताब ‘आगरानामा’ में आगरा के विषय में काफी बातें बहुत शोध करके लिखी हैं। उन्होंने लिखा है कि ‘तारीखे दाउदी’ बताती है कि आगरा का सम्बंध महाभारत काल से था और आगरा मथुरा के राजा कंस के साम्राज्य के अंतर्गत आता था। आगरा के गजेटियर के अनुसार भी महाभारत का...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-25. आज का किस्सा बाबरनामा से

इतिहास और संस्कृति के किस्से-25 आज का किस्सा बाबरनामा से ✨ बाबरनामा : इतिहास भी  और साहित्य भी बाबरनामा इस्लामी दुनिया और भारतीय उपमहाद्वीप की पहली आत्मकथा भी कही जाती है। यह केवल इतिहास नहीं, बल्कि बाबर के जीवन, युद्धों, और उसके द्वारा लिखा समाज और प्रकृति का सजीव चित्रण है। साहित्यिक दृष्टि से भी इसे विश्व की श्रेष्ठ आत्मकथाओं में गिना जाता है — संवेदनशील, बारीक और गहन शैली इसे अद्वितीय बनाती है। ताज्जुब होता है कि बाबर जैसा क्रूर आक्रमणकारी कैसे इतना अच्छा साहित्यकार भी था लेकिन वो कहा है ना “हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी जिस को भी देखना हो कई बार देखना” हाँलाँकि बाबर को कितनी ही बार देखें उसकी छवि की नकारात्मकता तो दिखती ही है। खैर, बाबरनामा को मुग़ल इतिहास की नींव कहा जा सकता है और बाबर की आत्मा का आईना भी।   बाबर ने लिखा है कि,  “परेशान जमई व जमई परेशाँ, गिरफ्तार कौमे व कौमे अजायब।” यानी विकल व्यग्र दल, व्यग्र तल अंतरात्मा, सकल जाति बंदी, सकल जग अपरिचित। बाबर ने जब पानीपत पहुँच कर दिल्ली के बादशाह इब्राहिम लोधी से युद्ध हेतु अपना डेरा डाला तब का वर्णन करते हुए बा...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-24. “जब मुर्दा जीवित हुआ और हिन्दुस्तान का बादशाह बन गया – शाहजहाँ की अद्भुत कहानी”

इतिहास और संस्कृति के किस्से-24 “जब मुर्दा जीवित हुआ और हिन्दुस्तान का बादशाह बन गया – शाहजहाँ की अद्भुत कहानी” इटली के यात्री मनूची ने मुग़ल दरबार के किस्सों को इतना जीवंत लिखा कि वे किसी ऐतिहासिक नाटक जैसे लगते हैं। उन्हीं में से एक प्रसंग है शाहजहाँ के सत्ता-प्राप्ति का, जो किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं। ये किस्सा है दावर बख़्श का (जिसका अर्थ है ईश्वर प्रदत्त) जो जहाँगीर का पौत्र और खुसरू का पुत्र था और खुर्रम यानी शाहजहाँ का और ये किस्सा है सत्ता प्राप्ति के जबरदस्त षड्यंत्र का।  ये बात है जब 28 अक्टूबर 1627 को 58 वर्ष की अवस्था मे बादशाह जहाँगीर का कश्मीर से लौटते समय देहांत हो गया। अब स्थिति यह थी कि:- नूरजहाँ चाहती थीं कि उनका दामाद शहज़ादा शाहरयार बादशाह बने। आसफ़ ख़ान (शाहजहाँ का ससुर) शाहजहाँ को ही गद्दी पर देखना चाहता था। इस संघर्ष के बीच आसफ़ ख़ान ने तुरुप का पत्ता खेला—बंदीगृह से दावर बख़्श को निकालकर गद्दी पर बैठा दिया।  इक़बाल-नामा-ए-जहाँगीरी (लेखक: मुहम्मद ख़ान) में लिखा है: “आसफ़ ख़ान ने इरादत ख़ान के साथ मिलकर दावर बख़्श को क़ैद से निकाला और उसे अश्व पर बिठाकर...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-23. मनूची के संस्मरणों से एक और किस्सा अकबर का पान का बीड़ाअकबर की मृत्यु कैसे हुयी

इतिहास और संस्कृति के किस्से-23 मनूची के संस्मरणों से एक और किस्सा अकबर का पान का बीड़ा अकबर की मृत्यु कैसे हुयी सम्राट अकबर एक बहुत बड़ा बहादुर और काबिल योद्धा तो था ही साथ ही वह बहुत अच्छा और निर्भीक शिकारी भी था। एक बार अकबर पहाड़ी इलाके में शेर के शिकार के लिए गया। वहाँ शेर को मारने में सफलता नहीं मिली और अकबर अपनी सेना और साथियों से बिछुड़ कर घने जंगल में पहुँच गया। वहाँ वह आराम करने को एक स्थान पर बैठा ही था कि वहाँ पर उसकी तरफ एक बालों वाली कोई चीज रेंगती हुयी आती दिखाई दी। इसपर अकबर ने अपने तरकश से एक तीर निकाल कर उससे उस रेंगते सर्प को मारकर दूर फेंक दिया। अभी वह सांप मरा भी नहीं था कि तभी वहाँ एक हिरन दिखा जिस पर बादशाह ने निशाना उसी तीर से लगा दिया। तीर लगते ही हिरन तुरन्त मर गया जिससे अकबर को बड़ा ताज्जुब हुआ क्योंकि यह तीर उस हिरण के शरीर में किसी ऐसी जगह नहीं लगा था जिससे वह तुरंत मर जाता। तभी वहाँ कुछ शिकारी आ गए जो उसी हिरन का पीछा कर रहे थे। अकबर ने उनको उस हिरन को साथ ले चलने का आदेश दिया। जब वो लोग उस मरे हुए हिरन को लेकर चले तो वह टुकड़े-टुकड़े होकर अलग-अलग बिखरने सा लगा ज...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-22. फ्रांसीसी यात्री और लेखक बर्नियर की पुस्तक से एक किस्सा भारत की राजपूतानियों का

इतिहास और संस्कृति के किस्से-22 फ्रांसीसी यात्री और लेखक बर्नियर की पुस्तक से एक किस्सा भारत की राजपूतानियों का ये घटना है जब राजा जसवंत सिंह शाहजहाँ की फौज की ओर से औरंगज़ेब की सेनाओं के विरुद्ध वीरता से लड़े किन्तु उनके 8 हजार सैनिकों में से केवल 500 बचे तो अपनी ताकत पुनः जुटाने को एक रणनीतिवश वह युद्ध से लौट आये  लेकिन क्या एक राजपूतानी को पसंद आया कि उसका पति युद्ध क्षेत्र से ऐसे लौट आये? क्योंकि उनका मानना था…. या तो विजय या वीरगति……. ‘किले के फाटक बन्द कर दो… मैं ऐसे पति का मुख नहीं देखूँगी!’   ऐसी नारी थीं राजपूतानियाँ।  ये कहानी है उस राजपूतानी की… जिसके लिए मान–सम्मान, जीवन से बड़ा था। उस अवसर पर राजा जसवंत सिंह की पत्नी, जो राणा के कुल की थीं, का व्यवहार जानने योग्य है।   जब उसने सुना कि उसका पति आठ सहस्त्र की विशाल सेना में से केवल पाँच सौ योद्धाओं के साथ लौटा है—वह भी पराजित होकर नहीं, बल्कि रणभूमि में अदम्य वीरता दिखाकर—तो उसे गर्व होना चाहिए था।   लेकिन हुआ इसके विपरीत।   > “किले के सब फाटक बन्द कर दो! मैं ऐसे निन्दित पुरु...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-21. चर्चा पानीपत के तीसरे युद्ध से सम्बंधित कुछ ऐतिहासिक किस्सों की

इतिहास और संस्कृति के किस्से-21 आज चर्चा पानीपत के तीसरे युद्ध  से सम्बंधित कुछ ऐतिहासिक किस्सों की पानीपत की तीसरी लड़ाई 14 जनवरी 1761 ईस्वी को मराठों जिनका नेतृत्व सदाशिव राव भाऊ कर रहे थे और अफगान आक्रमणकारियों जिनका नेतृत्व अहमद शाह अब्दाली कर रहा था उनके बीच लड़ी गयी थी। अठारहवीं सदी के यह भारत ही नहीं विश्व के भयंकरतम और खूंरेजी युद्धों में गिनी जाती है। दिल्ली से लगभग 78 किलोमीटर उत्तर में यह युद्ध लड़ा गया था। इस युद्ध में मराठा सेना की हार हुयी थी और सदाशिव राव भाऊ वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस पूरे युद्ध और इसके पहले की घटनाओं का रोमांचक वर्णन राजमंदिर के रघुनाथ राव यादव चित्रगुप्त ने किया है और इस विवरण की शुरुआत में ही उन्होंने लिखा है कि उन्होंने इस युद्ध और उससे पहले की की घटनाओं को स्वयं सुना और देखा है मतलब कि वह खुद वहाँ मौजूद रहे थे। इस बात की स्वतंत्र तौर पर पुष्टि का कोई तरीका नहीं है परंतु उस समय वो छत्रपति संभाजी द्वितीय (कोल्हापुर) के यहाँ कार्यरत थे और छत्रपति संभाजी द्वितीय की इस युद्ध के एक माह पूर्व ही मृत्यु हो गयी थी। रघुनाथ राव ने इस युद्ध का बहुत ही जीवंत...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-20. किस्सा मुगल बादशाह अकबर के बेटे सलीम यानी बादशाह नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का

इतिहास और संस्कृति के किस्से-20 आज का किस्सा मुगल बादशाह अकबर के बेटे सलीम यानी बादशाह नूरुद्दीन मुहम्मद जहाँगीर का इटली से भारत आये यात्री, लेखक और जो बाद में चिकित्सक का भी काम करने लगा निकोलाओ मनूची ने अपने समय के बहुत रोचक वृतांत लिखे हैं जिनसे उस समय के इतिहास, संस्कृति, रहन-सहन, खान-पान, सोच-विचार आदि की अच्छी जानकारी मिलती है। मनूची ईस्वी सन 1656 में भारत 17 वर्ष की अवस्था में आया था और अपनी मृत्यु तक यानी सन 1717 तक वह यहीं रहा। मनूची जब भारत आया तब शाहजहाँ के राज्य का अंतिम दौर चल रहा था लेकिन बातें, जैसी सुनी और समझीं, उसने उस काल के पहले के शासकों के समय की भी लिखी हैं तो आज का यह किस्सा मनूची के लिखे वृतांत से है; जैसा उसने सुना और समझा वैसे का वैसा- जहाँगीर – हिंदुस्तान का चौथा बादशाह  क्या आपको पता है कि मुगल बादशाह जहाँगीर:- -रोज़ा नहीं रखता था  -शराब पीता था  -मनूची ने लिखा है कि जहाँगीर सुअर का माँस भी खाता था जिससे सम्बंधित एक घटना का विवरण भी उसने दिया है। मनूची लिखता है कि इतिहास इस बात की गवाही देता है अक्सर (नालायक) बेटों के हाथों महान बाप की मेहनत म...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-19प्रसिद्ध कवि और लेखक अमीर खुसरो की और उनकी प्रसिद्ध किताब‘खज़ाईन-उल-फुतूह’ या ‘तारीख ए अलाई’ से कुछ बातें

इतिहास और संस्कृति के किस्से-19 प्रसिद्ध कवि और लेखक अमीर खुसरो की और उनकी प्रसिद्ध किताब‘खज़ाईन-उल-फुतूह’  या ‘तारीख ए अलाई’ से कुछ बातें जिहाले मुस्की मकुन तगाफुल,  दुहाये नैना बनाये बतियां। कि ताबे हिज्रा न दाम ए जान, न लेहु काहे लगाए छतिया।।” खुसरो “ज़े-हाल-ए-मिस्की मकुन ब-रंजिश ब-हाल-ए-हिज्राँ बेचारा दिल है सुनाई देती है जिसकी धड़कन तुम्हारा दिल या हमारा दिल है सुनाई देती है जिसकी धड़कन तुम्हारा दिल या हमारा दिल है।।” खुसरो से प्रेरित गुलज़ार पहले खुसरो के बारे में कुछ बातें:- 1.अमीर खुसरो के बचपन का नाम था- अबुल हसन अमीनुद्दीन 2.खुसरो उनका उपनाम था 3.खुसरो के पिता अमीर सैफुद्दीन महमूद तुर्की के लाचीनी कबीले के सरदार थे जो चंगेज़ी अत्याचारों के कारण दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश या शमशुद्दीन अल्तमिश के समय में बल्ख से अपने कबीले के साथ आकर हिंदुस्तान में दिल्ली से कुछ दूर एटा जिले के पटियाली गांव में बस गए थे और बादशाह के दरबार में नौकरी करने लगे थे। 4. खुसरो की माँ ब्रज क्षेत्र के हिंदू परिवार से थीं। नाना ने इस्लाम कुबूल कर लिया था और इमादुल मुल्क नाम से सुल्तान बलबन के युद्...

इतिहास और संस्कृति के किस्से-18सुल्तान बलबन का शाही दरबार – रौब, वैभव और अनुशासन की मिसाल

इतिहास और संस्कृति के किस्से-18 सुल्तान बलबन का शाही दरबार – रौब, वैभव और अनुशासन की मिसाल  आज का किस्सा है दिल्ली के सुल्तान गियासुद्दीन बलबन के दरबार के नजारे का।  ‘मुन्तख़ब उत तवारीख’ में मुल्ला अब्दुल कादिर बदायूनीं लिखता है कि बलबन सुल्तान नसीरुद्दीन महमूद के बाद चूँकि उसका कोई वारिस नहीं था इसलिए अमीरों की रजामंदी से 1266 ईस्वी में दिल्ली का सुल्तान बना। वह गुलाम था और नसीरुद्दीन के पिता का दामाद था। सुल्तान बनने से पहले वह वजीर था और उसका खिताब ‘उलग खान’ था। बलबन शमसुद्दीन के चालीस गुलामों में से एक था जिन्हें अमीर का खिताब मिला था। उसका वास्तविक सत्ता काल दिल्ली के राजाओं में काफी लंबा रहा क्योंकि वह लगभग 20 साल वजीर रहा जब वास्तविक सत्ता उसके हाथ थी और लगभग इतनी ही अवधि के लिए वह दिल्ली का सुल्तान रहा (ईस्वी सन 1266 से 1287)। उसके बारे में बदायूनीं लिखता है कि “..हिजरी 664 में बलबन मलिकों और अमीरों की रज़ामन्दी से तख्त पर बैठा और ‘कस्त्र-ए-सफेद’ (श्वेत प्रासाद) में आया।”  मध्यकाल का ही इतिहास लेखक ज़ियाउद्दीन बरनी अपनी 'तारीखे फ़िरोज़शाही' में लिखता है कि उसने अपने ना...