इतिहास और संस्कृति के किस्से-23. मनूची के संस्मरणों से एक और किस्सा अकबर का पान का बीड़ाअकबर की मृत्यु कैसे हुयी

इतिहास और संस्कृति के किस्से-23

मनूची के संस्मरणों से एक और किस्सा अकबर का पान का बीड़ा
अकबर की मृत्यु कैसे हुयी

सम्राट अकबर एक बहुत बड़ा बहादुर और काबिल योद्धा तो था ही साथ ही वह बहुत अच्छा और निर्भीक शिकारी भी था। एक बार अकबर पहाड़ी इलाके में शेर के शिकार के लिए गया। वहाँ शेर को मारने में सफलता नहीं मिली और अकबर अपनी सेना और साथियों से बिछुड़ कर घने जंगल में पहुँच गया। वहाँ वह आराम करने को एक स्थान पर बैठा ही था कि वहाँ पर उसकी तरफ एक बालों वाली कोई चीज रेंगती हुयी आती दिखाई दी। इसपर अकबर ने अपने तरकश से एक तीर निकाल कर उससे उस रेंगते सर्प को मारकर दूर फेंक दिया। अभी वह सांप मरा भी नहीं था कि तभी वहाँ एक हिरन दिखा जिस पर बादशाह ने निशाना उसी तीर से लगा दिया। तीर लगते ही हिरन तुरन्त मर गया जिससे अकबर को बड़ा ताज्जुब हुआ क्योंकि यह तीर उस हिरण के शरीर में किसी ऐसी जगह नहीं लगा था जिससे वह तुरंत मर जाता। तभी वहाँ कुछ शिकारी आ गए जो उसी हिरन का पीछा कर रहे थे। अकबर ने उनको उस हिरन को साथ ले चलने का आदेश दिया। जब वो लोग उस मरे हुए हिरन को लेकर चले तो वह टुकड़े-टुकड़े होकर अलग-अलग बिखरने सा लगा जिसको देख कर अकबर दंग रह गया। 
अकबर ने उन शिकारियों से इसका कारण पूछा तो वो बोले कि यह किसी तीव्र विष के कारण है। अब अकबर और सोच में पड़ गया, उसको लगा कि किसी ने षड्यन्त्र करके उसके तीरों में विष लगा दिया है।
अकबर ने शिकारियों को उस सर्प के विषय में बताया तो उन लोगों ने उस सर्प को देखा  जो मरा डला था और बोले कि यह तो बहुत ही भयंकर विष वाला सर्प है, इसकी तो सांस से  हवा में तीव्र विष फैल जाता है और उस हवा में सांस लेने वाले की भी मौत हो जाती है। अकबर इसलिए बच गया क्योंकि हवा उसकी तरफ से सर्प की दिशा में जा रही थी।

राजधानी लौट कर अकबर ने आदेश दिया कि काँच के बर्तनों में सांपों को रखा जाए और उनके विष को रखने के लिए एक अधिकारी की नियुक्ति भी की जिससे जब बादशाह चाहे तब उसको विष उपलब्ध हो सके। इस प्रथा का पालन बाद के सभी मुगल बादशाहों द्वारा किया जाता था।

मनूची लिखता है कि अकबर को जब किसी विशिष्ट व्यक्ति को इस दुनिया से विदा करना होता तो इस तीव्र विष से युक्त एक आलीशान पोशाक (सरोपा) उसको दी जाती जिसको वह पहनकर घर जाता या घर जाकर पहनता और फिर…..

इसका एक दूसरा तरीका भी अकबर अपनाता था और मनूची के लिखे अनुसार उस तरीके से सम्बंधित दुर्घटना से ही अकबर की भी मृत्यु हुयी??

किस्सा यह है कि मुगल बादशाह द्वारा किसी व्यक्ति को दिए जाने वाले सबसे बड़े सम्मानों में से एक था बादशाह द्वारा अपने हाथ से उसको पान का बीड़ा भेंट करना। अकबर ने यह सम्मान बहुत लोगों को दिया और उनमें से कुछ लोग थोड़े समय बाद मृत्यु के हवाले भी हो गए। बात दरअसल यह थी कि बादशाह के पास एक पानदान हुआ करता था जिसमें तीन खन होते थे। एक में पान के पत्ते, दूसरे में शक्तिवर्धक गोलियां (शायद अफीम की) जिनका वह खुद प्रयोग करता था और तीसरे हिस्से में जहर मिली गोलियां जो देखने में शक्तिवर्धक गोलियों जैसी ही लगती थीं। जब किसी का सम्मान करना हो तो अकबर उसको अपने उसी पानदान से पान का बीड़ा और फिर शक्तिवर्धक गोली देता था और जब किसी को परलोक पहुँचाना हो तो पान के बाद दूसरी गोली देता था जो कि देखने में पहली जैसी ही लगती थी।

मनूची का कहना है कि एक दिन अकबर ने गलती से वही दूसरी वाली गोली पान के साथ खा ली और जब तक उसको अपनी गलती का अहसास हुआ तब तक बहुत देर हो चुकी थी और कोई तरीका बचा नहीं था और इस प्रकार इस दुर्घटना से ही अकबर का इन गोलियों के इस किस्म के प्रयोग का राज भी उजागर हुआ। हाँलाँकि यह भी कहा जाता है कि अकबर की मृत्यु अतिसार से हुई और जो लोग अफीम का सेवन करते हैं यदि उनको दस्त की शिकायत हो जाये तो जानलेवा ही साबित होती है। पता नहीं मनूची के इस किस्से में कितनी सच्चाई है पर सत्ता के किस्सों में यह कोई विचित्र बात भी नहीं लगती।

आज के किस्सों में बस इतना ही।
अगली कड़ी में मुलाकात होगी किसी नए किस्से/घटना/मिथक आदि के साथ

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