शिक्षक दिवस 2024

आज शिक्षक दिवस है और आज मैं आदर पूर्वक याद कर रहा हूँ अपने गुरु परमपूज्य दत्तात्रेय आनन्दनाथ जी और उन सभी लोगों को जिनसे मुझको अपनी अभी तक की जीवन यात्रा में किसी न किसी रूप में शिक्षित होने का सौभाग्य मिला।
सबसे पहली शिक्षक मेरी माँ स्व0 श्रीमती रजनी चतुर्वेदी और मेरे पिता स्व0 श्री अशोक चंद्र चतुर्वेदी जिनसे मुझको ये जीवन और उसके मायने मिले। मैं अपने को सौभाग्यशाली मानता हूँ क्योंकि मुझको अपने जीवन में अपने बाबा स्व0 पंडित सुशील चंद्र चतुर्वेदी जी और अपने नाना स्व0 श्री तेजपाल जी चतुर्वेदी से भी बहुत कुछ सीखने को मिला। इसके अतिरिक्त मैंने अपने मौसाजी स्व0 प्रो0 रामस्वरूप चतुर्वेदी की छत्रछाया में भी जीवन के कई महत्वपूर्ण अध्याय सीखे।हमारे कुलगुरु रहे डॉक्टर वासुदेव कृष्ण जी चतुर्वेदी(स्व0) को भी सादर नमन करता हूँ।
मेरे मामा जी श्री सुभाष चंद्र चतुर्वेदी, जिनका आज जन्मदिन भी होता है ने भी व्यवहारिक जीवन में मार्गदर्शन किया।
जहाँ तक पढ़ाई का सवाल है तो मैं पाँचवी कक्षा तक किड्स कॉर्नर स्कूल,फिरोजाबाद में पढ़ा और मुझको एक शिक्षक के रूप में सबसे पहला नाम वहाँ से याद आता है स्व0 श्रीमती सुखरानी भटनागर जी का जिनको हम बड़ी आंटी कहते थे।1960 के दशक में फिरोजाबाद जैसे छोटे शहर में एक महिला द्वारा स्कूल खोलने का बहुत ही जीवट का काम उन्होंने किया और मेरा मानना है कि उन जैसी महिला को कम से कम पद्मश्री सम्मान मिलना चाहिए था। मुझको किड्स कॉर्नर की ही मेहता आंटी,बूढ़ी आंटी, जैन सर, शर्मा सर भी आज याद आ रहे हैं।
1971 में छठवीं कक्षा से मैं इलाहाबाद के भारत भारती विद्यालय में पढा जहाँ मुझको एक हॉस्टल में रहने के साथ ही बहुत सी नयी चीजें सीखने का मौका मिला जैसे पढ़ाई के अतिरिक्त विभिन्न किस्म के खेल और extra-curricular activities. भारत भारती के दिनों के शिक्षकों में मुझको वहाँ की वार्डन सुश्री कांता भार्गव बहन जी, प्रिंसिपल परमानन्द मिश्रा जी, श्रीवास्तव आचार्य जी, टी के दास आचार्य जी आदि शिक्षक याद आते हैं।
1974 में 9वीं क्लास से मैं कॉल्विन ताल्लुकेदार्स कॉलेज, लखनऊ में पढ़ा जहाँ उस समय प्रिंसिपल थे महान H L Dutt sir (अब स्वर्गीय)। उनके अतिरिक्त मुझको सर्वश्री S P Singh sir, R P Singh sir, SBB Singh sir, SK Dayal sir, S N Tandon sir, Rakeshwar Singh sir, Amanatullah sir,P Ghosh sir, KK Srivastava sir, KK Saxena sir, M B Singh sir, S Mishra sir, Samiullah sir, Yadav sir, Y Pathak sir, Arun Chandra sir, Siddiqui sir,वैसली सर, आदि के नाम याद आ रहे हैं और कुछ महत्वपूर्ण नाम छूट भी रहे होंगे।
1978 में जब मैंने इलाहाबाद विद्यालय में दाखिला लिया तो शैक्षिक जगत की अनेकों महान हस्तियों के संपर्क में आने का और उनसे कुछ सीखने का अवसर मुझको मिला और इसको मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ। मुझको याद आते हैं इतिहास (Med./Mod.History) विभाग के अपने शिक्षक सर्व श्री V C Pande sir, CP Jha sir, Prof.CB Tripathi, Prof.Radhey Shyam, Prof. Rekha Joshi, Prof.Rita Bahuguna Joshi, Prof.Chandra Pant, G P Tripathi sir, Yogeshwar Tiwari sir, Rohit Nandan sir, Jayant Mishra sir, Madhav Chandra sir और मेरे बड़े भाई समान Prof.Heramb Chaturvedi. आज मुझको Dr. Ishwari Prasad (मेरे बाबा के साथी) Prof. O P Bhatnagar sir (मेरे पापा को पढ़ाया और मुझ पर भी उनकी कृपा थी) , Prof. AD Pant ji और Prof. GR Sharma जी भी
( ये दोनों मेरे ताऊजी स्व0 सुबोध चंद्र जी के साथी थे और मुझ पर इनका आशीर्वाद रहा) याद आ रहे हैं।
Economics department के सर्व श्री Amrendra Singh sir (अब स्वर्गीय), AK Jain sir, Manmohan sir से भी मुझको पढ़ने का अवसर मिला।
Philosophy department के शिक्षकों में मुझको आज याद आ रहे हैं Prof.Sangam Lal Pande sir, D N Dwivedi sir, S K Seth sir, SSD Sharma sir.
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने के कारण मुझको किसी न किसी रूप में शिक्षा जगत की और भी बहुत सी महान हस्तियों का सान्निध्य और आशीर्वाद मिला जैसे डॉक्टर बाबूराम सक्सेना,Prof.J K Mehta,Dr. Murli Manohar Joshi, Prof. J S Mathur, Prof. B N Asthana, Pritilata Adaval ji, Dr.Raghuvansh,Prof. V N Kapoor, Prof.Adaval, Dr.Sri Ram Sinha,  Dr.Amar Singh, Prof.Manas Mukul Das,AD Sharma sir, Prof.G S Pande sir और Dr.Suresh Chandra sir,Dr.Alok Pant sir आदि।
इनके अतिरिक्त इलाहाबाद विश्वविद्यालय के कारण ही मेरा संपर्क फिराक गोरखपुरी साहब से हुआ तो जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रो0 विपिन चंद्रा और महान साहित्यकार अज्ञेय जी का आशीर्वाद भी मुझको मिला।
ये सब वो महान हस्तियाँ थीं जिनसे मिलना, उनका आशीर्वाद लेना और उनसे कुछ सीखने का अवसर मिलना मैं अपने लिए बहुत बड़ा सौभाग्य मानता हूँ।
बैंक ऑफ बड़ौदा,आगरा के अधिकारी रहे श्री प्रदीप श्रीवास्तव जी का भी आज आभार जिन्होंने मुझको निर्यात व्यापार की कई बारीकियां और documentation सिखाया।
इन सबके अतिरिक्त मैं एक व्यक्ति के प्रति कृतज्ञ हूँ जिनका नाम स्व0 पंचम सिंह जाटव या पंचा था और हम लोग उनको पंचू कहते थे। पंचू मेरे बाबा के साथ और बाद में पापा के साथ रहे।उनकी खासियत थी किसी भी किस्म का काँच बना देना यानी उसके chemical composition को समझने और उसका उपयोग करने में पंचू को महारथ हासिल थी।जब मैंने काँच का काम करना शुरू किया तो पंचू ने मुझको काँच की बहुत सी बारीकियां सिखायीं और काँच बनाने विषयक व्यवहारिक शिक्षा दी।
 आज जब मैं इस लेख के माध्यम से शिक्षक दिवस पर उन लोगों के प्रति अपनी कृतज्ञता ज्ञापित कर रहा हूँ जिनसे अभी तक की अपनी जीवन यात्रा में कुछ न कुछ सीखा तो निश्चित ही ऐसे बहुत से नाम छूट भी गए होंगे जिनसे मैंने बहुत कुछ सीखा तो उनको भी मेरा सादर प्रणाम है।
आज का यह लेख थोड़ा लम्बा जरूर है लेकिन जिन लोगों से जीवन में आशीर्वाद प्राप्त किया, शिक्षा प्राप्त की उनके प्रति जाने अनजाने में की गई अपनी त्रुटियों के प्रति क्षमा याचना और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापन करने के लिए तो दरअसल न जाने कितने ग्रंथ लिखे जाएं तो वो भी कम ही होगा।
आप सभी को शिक्षक दिवस की बधाई और शुभकामनाएं।
सभी गुरुजन को साथ में धन्यवाद भी कि आपकी निष्ठा और समर्पण भरी शिक्षा से ही नई पीढ़ियों के निर्माण की परंपरा अनवरत चलती है।
अंत में आज शिक्षक दिवस पर सभी महान शिक्षकों को मेरा सादर प्रणाम और नमन!
🙏🙏😊

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