सिंदबाद ट्रैवल्स इटली-वेनिस वेनिस की ख़ूबसूरती और वहाँ के होटल के मच्छर ग्रैंड कैनाल या हाइवे और गंडोला राइड
सिंदबाद ट्रैवल्स
इटली-वेनिस
वेनिस की ख़ूबसूरती और वहाँ के होटल के मच्छर
ग्रैंड कैनाल या हाइवे और गंडोला राइड
मैं अपनी यूरोप की यात्राओं में हमेशा यूरेल पास फर्स्ट क्लास वाला लेकर जाता था इसलिए वहाँ मेरा आवागमन आसपास के देशों में भी काफी सुगम रहता था।म्यूनिख से ही मैं इटली के वेनिस गया।यह रेल यात्रा मेरे जीवन की बेहतरीन यात्राओं में से एक थी इस अर्थ में कि या तो फ्रैंकफर्ट से डुसेलडॉर्फ की राइन नदी के सहारे की यात्रा के दृश्य थे या फिर म्यूनिख से वेनिस की रेल यात्रा के।विश्व में इतने मनभावन रेल रूट बहुत कम ही होंगे।म्यूनिख सेंट्रल स्टेशन से वेनीज़िया सैंटा लूसिया स्टेशन तक की यह यात्रा लगभग 7 घण्टे की थी पर थी बेहद आरामदायक।वेनिस शहर पहुँच कर मैं जिस होटल में रुका उसमें मौसम के कारण एयरकंडीशनर की ज़रूरत तो नहीं थी किंतु कमरे की खिड़की खुली रहने के कारण और बिल्कुल समुद्र के/कैनाल के किनारे होने के कारण रात भर मच्छरों ने बहुत परेशान किया।
वेनिस या वेनीज़िया उत्तर पूर्वी इटली का एक विश्व प्रसिद्ध शहर है।यह उत्तरी इटली के वेनेटो रीजन की राजधानी भी है।यह एड्रियाटिक सागर की खाड़ी में बने लगभग 100 छोटे टापुओं की बस्ती है जहाँ रास्ता के लिए कोई सड़क मार्ग न होकर नहरें हैं जिनमें गंडोला यानी कि नाव द्वारा आवागमन किया जाता है।ये टापू लगभग 400 छोटे पुलों से जुड़े हुए हैं वैसे इनके बीच में नहरें हैं और हाइवे की भांति एक बड़ा आम रास्ता ग्रैंड कैनाल के रूप में है।यहाँ वाकई बड़ा अजीब लगता है कि हो सकता है कि व्यक्ति को स्कूल जाना है या डॉक्टर के दिखाने पास के टापू पर जाना है तो वो मोटर साइकिल या कार के स्थान पर गंडोला यानी नाव से जाएगा।वहाँ टैक्सी भी वाटर टैक्सी या नाव/मोटर बोट के ही रूप में चलती है।हाइवे या सड़क की तरह आप कैनाल से जा रहे होते हैं और उस रास्ते के दोनों ओर आपको यूरोप के पुनर्जागरण काल की,गोथिक किस्म की बनी इमारतें दिखती हैं,चर्च दिखता है,सेंट्रल स्कवायर,पिआत्ज़ा सान मार्को जहाँ सेंट मार्क का बासिलिका है,कंपेनाइल टावर है ये सब मन भावन दृश्य दिखते हैं और ऊंचाई से कहीं से देखें तो विभिन्न टापुओं वाले वेनिस शहर के घरों की लाल छतें भी दिखती हैं।वेनिस के टापू पो और पिआवे नदी के छिछले मुहाने की खाड़ी से घिरे हुए हैं।
वेनिस मेरा हमेशा से जाने का मन था और इसकी दो बड़ी वजह थीं,एक तो मैं मुरानो जाकर काँच का काम देखना चाहता था और दूसरी तथा ज्यादा प्रमुख वजह थी कि मेरी माँ को हमेशा वेनिस आकर्षित करता था।उनका बहुत मन था वेनिस जाने का।मैंने जब वेनिस से लौट कर वहाँ के बारे में उनको तथा अपने पापा को बताया था तो दोनों बहुत खुश हुए थे।
मैं म्यूनिख से वेनिस लगभग दोपहर को पहुँच गया था और बहुत खुश हुआ क्योंकि 1991 में जब मैं रोम से ट्रेन से वेनिस को चला था तो फ्लोरेंस और पीसा होकर लौट गया था जिसका जिक्र मैं पहले कर चुका हूँ।वेनिस पहुँच कर वहाँ के स्टेशन से निकल कर सबसे पहले मैंने कैनाल के किनारे एक होटल तलाशा और उसमें अपना सामान रख दिया।होटल में मेरा कमरा पहली मंजिल पर था और उसकी खिड़की कैनाल की साइड पर खुलती थी।इसका व्यू तो बहुत अच्छा था किंतु इससे मच्छरों की बहुत समस्या थी।इसके बाद मैं होटल से बाहर आया और पैदल ही कैनाल के किनारे-किनारे घूमता रहा और वहाँ की प्रसिद्ध इमारतों को निहारता रहा।लोग एक स्थान से दूसरे स्थान बोट द्वारा ही आ जा रहे थे और यह एक बहुत ही विचित्र और आकर्षक दृश्य था।यह दृश्य देख कर मुझको अमिताभ बच्चन और ज़ीनत अमान का वेनिस ने गंडोला (नाव) पर फिल्माया द ग्रेट गैम्बलर फ़िल्म का गाना "दो लफ्जों की है" याद आ रहा था।वेनिस में एक मजेदार घटना यह हुयी कि एक दुकान पर जाकर मैंने कुछ खाने को लिया और फिर साथ में पीने के लिए दूध भी मांगा और उसके देने पर मैंने पूछा कि ये शुद्ध है क्या?मेरा ये पूछना गजब हो गया।वो दुकानदार सोच ही नहीं सकता था कि दूध या खाने पीने की कोई चीज अशुद्ध भी होती है और इसी बात पर उसने मेरी क्लास लगा दी।अपनी इस सोच और भय के कारण बाद में मुझको बहुत अफसोस भी हुआ।
वेनिस की ग्रैंड कैनाल लगभग 4 किलोमीटर लंबी नहर है जो कि अनेकों पैलेस और पुलों के बीच से होकर गुजरती है और किसी शहर की मुख्य सड़क की भांति ही यह कैनाल है।
कैनाल से गुजरते हुए दोनों ओर की भव्य इमारतें ऐसे लगती हैं मानो दोनों ओर संपन्नता बिखरी हुई है साथ ही साथ यह भी अहसास होता है कि वो लोग कितने मेहनती रहे होंगे जिन्होंने ऐसे पानी की नहरों के बीच में अपने लिए इतना भव्य शहर बना लिया।उनकी सोच में कुछ बात तो रही होगी क्योंकि ऐसे ही तो हमारी पवित्र गंगा नदी अनेकों धाराओं के साथ बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
मैं जब पिआत्ज़ा सेन मार्को या सेंट मार्क स्क्वायर से गुजरा तो वहाँ की चहल पहल और रौनक के क्या कहने थे।ऐसा लगता था कि विश्व के हर कोने से पर्यटक यहीं आया हुआ है।वहाँ न जाने कितने कबूतर घूम रहे थे जिस से दृश्य और मनमोहक दिख रहा था।वहीं प्रसिद्ध बासिलिका दी सेन मार्को का चर्च अपनी भव्यता बिखेरता हुआ खड़ा है।वहीं प्रसिद्ध लाल ईंटों जैसी चीज से बना कंपानीले का टावर है जो सेन बासिलिका का बैल टॉवर है।ये सब ऐसा दृश्य था कि देखते जाओ और मन न भरे।इसी टॉवर को गैलीलियो गैलिली ने 16वीं सदी में अपनी वेधशाला के रूप में भी प्रयोग किया था और नक्षत्रों-तारों को इस पर चढ़ कर देखा था।इससे थोड़ा आगे ही बढ़ कर ही घण्टाघर दिखता है जिस पर एक बड़ी घड़ी और वेनिस के गणतंत्र की शक्ति का प्रतीक सेन मार्क का सिंह बना हुआ है।इसके कुछ आगे ही चलकर वेनिस के शासक रहे डॉज का शानदार महल जिसके भव्य मेहराबदार खम्भे-बरामदा उसकी भव्यता को और बढ़ाते प्रतीत होते हैं।वेनिस की भव्यता ऐसी है कि देखे बिना समझना मुश्किल है।यदि वेनिस जाएं तो गंडोला या वापुरितो (Public Transport water taxi) से एक चक्कर अवश्य लगाएं।वेनिस घूमते में वहाँ की इमारतों की भव्यता के साथ ही मन में यह प्रश्न भी उठ रहा था कि यहाँ चूँकि हर घर पानी के बीच ही बना है तो सीलन और मच्छरों की समस्या तो रहती ही होगी और घरों में पानी की मछलियों की एक अलग तरह की महक भी रहती ही होगी लेकिन जल्द ही वहाँ की अद्भुत मनमोहक सौंदर्य की झलक फिर से मन को अपनी ओर खींच लेती है।
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