सिंदबाद ट्रैवल्स. इटली से जर्मनी ट्रेन का रास्ता. ऑस्ट्रिया में अभिनव को बदमाशों ने लूट लिया उसका किस्सा

सिंदबाद ट्रैवल्स
इटली से जर्मनी ट्रेन का रास्ता
ऑस्ट्रिया में अभिनव को बदमाशों ने लूट लिया उसका किस्सा

जब आप इटली से जर्मनी ट्रेन से आते हैं तो पहाड़िया,ऊँचे बहुत ही ऊँचे खम्भों पर बने पुल,रेल ट्रैक से दिखते मकान,हरियाली, बर्फीले पहाड़ों की चोटियों,ग्लेशियर के पिघले पानी से कल-कल करती बहती नदियां, आल्प्स के पाहाडों की वादियां,हरीभरी घाटियां;  ये सारे दृश्य एक क्षण को भी आपका ध्यान खिड़की से हटने नही देते।वेरोना,ट्रेंतो, इंन्सब्रुक से होते हुए जब ट्रेन निकलती है आप खिड़की के बाहर के दृश्यों से नजर नहीं हटा पाते।खासतौर से वेरोना से फॉरेतज़ा के बीच का रास्ता जब रेल इसार्को नदी की ओर बढ़ती सी दिखती दृश्य वास्तव में अद्भुत हो जाता है।
इसी रास्ते में इटली-ऑस्ट्रिया का सड़क का बॉर्डर भी दिखा जहाँ बैरियर पर कारों की लंबी कतार थी।
ट्रेन जब ऑस्ट्रिया से गुजरते हुए इंन्सब्रुक स्टेशन पर रुकी तो मैं वहाँ उतर कर टहला और मुझको लगा कि मैंने जिस ऑस्ट्रिया के विषय में इतिहास की पुस्तकों में पढ़ा था उस खूबसूरत देश की धरती पर भी मुझको चहलकदमी का अवसर मिल गया चाहे कुछ पलों का ही सही।ऑस्ट्रिया में जब मेरे छोटे भाई अभिनव ऑर्डरों के लिए और व्यापारी से मीटिंग हेतु विएना गए थे तो बैंक से करेंसी एक्सचेंज करा कर होटल लौटते में बीच चौराहे पर उनको दिन दहाड़े कुछ लोगों ने पिस्तौल की नोंक पर लूट लिया था।किस्सा कुछ ऐसा था कि गुड्डू से मैंने कहा था कि होटल में करेंसी एक्सचेंज महंगा पड़ता है तो बैंक में कराना बेहतर रहता है।जब विएना में उनको करेंसी एक्सचेंज करानी थी तो वो होटल के पास थोड़ा चलकर बैंक था वहाँ चले गए।जब वो बैंक से होटल लौट रहे थे तो चौराहे की क्रॉसिंग पर लाइट के सिग्नल पर वो रुके तो तीन-चार नौजवान लड़के लड़की उनके पास आ गए और इनसे मनी-मनी कहने लगे।इन्होंने देखा कि कम से कम उनमें से एक के हाथ में हथियार भी था तो इन्होंने अपने कोट की बाहर की जेब में जो पैसे थे वो उनको दे दिए।गनीमत थी कि कोट के अंदर की जेब के पैसे बच गए।गुड्डू जब विएना की पुलिस के पास गए तो पुलिस वालों ने कहा कि हम आपकी कम्प्लेंट तो लिख लेंगे लेकिन फिर आप देश तभी छोड़ सकेंगे जब मुकदमा समाप्त हो जाएगा।अब इसके बाद उन्होंने शिकायत दर्ज न कराना ही बेहतर समझा। हम लोग सिर्फ अपनी पुलिस से ही शिकायतें रखते हैं पर जब दुनिया में निकलिए तो हकीकत बहुत कुछ मालूम पड़ती है। जब आप अपने घर से बाहर की दुनिया में निकलते हैं तो न जाने कितने अनुभव होते हैं जो आपकी समझ को विकसित करने में अपना रोल निभाते हैं।बहरहाल इस सुंदर यात्रा को पूरा करके मैं वापिस म्यूनिख आ गया और सिंह साहब रात के डिनर पर मेरा इंतज़ार करते मिले।

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