इस्राएल के व्यापारी का किस्सा
इस्राइल के व्यापारी का किस्सा
यह वाकया इन संस्मरणों में इसलिए लिख रहा हूँ कि जो लोग एक्सपोर्ट का व्यापार करें वो इस किस्से से सम्बंधित बातों की सावधानी भी बरतें।किस्सा ये है कि हमारे एक व्यापारी इस्राइल से थे मिस्टर बेंजामिन और उनकी साथी मिस गलातीस।इन्होंने हमको 1995 में दिल्ली के फेयर में अच्छा ऑर्डर दिया जो DP पर था जिसका हमने माल बनाया और भेज दिया जिसका पेमेंट भी आ गया।ये लोग हमारे बहुत घनिष्ट हो गए और फिरोजाबाद भी आये थे।जब ये फिरोजाबाद आये तो हमारे सारे परिवार के लिए इस्राइल के प्रसिद्ध लाल सागर के नमक/फेन आदि से बने सौंदर्य-प्रसाधन उत्पाद भी उपहारस्वरूप लाये थे।इनसे एक और ऑर्डर का भी काम ठीक-ठाक हो गया था।फिर इन्होंने अपनी अगली भारत यात्रा पर एक और नया ऑर्डर दिया जो काफी बड़ा था और साथ ही कुछ वैक्स के कैंडल आदि गिफ्ट किस्म के उत्पाद भी लेने चाहे जिसके लिए मैंने अपने एक परिचित जो यह काम करते थे और अब एक्सपोर्ट का काम भी शुरू करना चाहते थे उनसे परिचय करवाया दिया।दिल्ली की साकेत कॉलोनी में रहने वाले अपने एक परिचित का कैंडल प्रोडक्ट्स का अच्छा काम था और उन्होंने बड़ी खुशी यह ट्रायल ऑर्डर ले लिया।कुछ दिनों में ही इस्राएल वाली पार्टी ने आगे का एक ऑर्डर और भेज दिया जो पिछले ऑर्डर से भी काफी बड़ा था और उसका लोहे का काफी सामान सहारनपुर-मुरादाबाद बनना शुरू हो गया।मिस्टर बेंजामिन ने कहा कि उस ऑर्डर की वो जल्द एल सी खोल देंगे मैं माल बनाना शुरू करदूँ। उनसे काफी समय से काम हो रहा था तो मैंने इस ऑर्डर पर भी काम शुरू कर दिया।इसी बीच पिछले ऑर्डर को जब भेजने का समय आया तो कैंडल वाले बोले कि उनका तो एक्सपोर्ट का IEC Code का नम्बर अभी तक आया ही नहीं है तो मिस्टर बेंजामिन ने कहा कि आप राघव वालों को माल दे दीजिए वही एक्सपोर्ट कर देंगे।कैंडल के सामान वालों ने कहा कि चूंकि अब वो खुद माल एक्सपोर्ट नहीं कर रहे तो उनको तो पेमेंट चाहिए वो तभी माल दे पाएंगे।इस पर मिस्टर बेंजामिन और मिस गलातीस ने मुझसे कहा कि मैं उनको पेमेंट कर दूँ और इस्राएल से पूरा पेमेंट वो लोग मय कैंडल वाले के मुझको भेज देंगे।अब एक तो व्यापार में ऐसा होता है,दूसरे वो मेरे पुराने व्यापारी हो गए थे और तीसरे मुझको कोई शक भी नहीं था तो मैने उनको पेमेंट करके और सारा माल लेकर और अपने ऑर्डर के साथ पूरा माल शिप कर दिया।ये ऑर्डर भी DP पर ही गया था और अगले ऑर्डर जिसका काम शुरू था उसकी LC का इंतज़ार था।जब ये माल इस्राएल पहुँच गया तो मिस्टर बेंजामिन का संदेश आया कि इस माल को D.A. यानी कि 90 दिन के उधार में बदल दो,उनको कोई पैसे की दिक्कत आ गयी है,अन्यथा माल लेना मुमकिन नहीं होगा।व्यापार में ऐसा भी हो जाता है और दूसरी बात यह थी कि मेरे पास कोई और चारा नहीं था क्योंकि अन्यथा माल वापिस मंगवाना पड़ता जिसमें बहुत घाटा हो जाता।इसके अलावा दूसरी बात यह है कि जब आप किसी ग्राहक विशेष की पसंद तथा डिज़ाइन का माल बनाते हैं तो वो और किसी के काम का नहीं होता है तथा अगले सीज़न में भी बेकार हो जाता है;यह फैशन और गिफ्ट इंडस्ट्री की त्रासदियों में से एक है।खैर माल DP से DA के पेमेंट की शर्तों में तब्दील कर दिया और माल उन्होंने छुड़ा कर ले लिया।एक दिन मेरे पास इस्राएल की शिपिंग लाइन से फोन आया कि आपने अपना माल डी ए पर कर दिया है तो मिस्टर बेंजामिन को दे दें तो मैंने कहा कि दे दीजिए।मेरे दिमाग में एक बार यह बात जरूर आयी कि जब मैंने सारे कागज पहके ही पूरे कर दिए थे तो यह फोन फिर क्यों आया।कुछ दिनों बाद जब पेमेंट का नम्बर आया तो पहले तो बेंजामिन-गलातीस लोग समय मांगते रहे और फिर अचानक उनसे संपर्क टूट गया।न फैक्स का जवाब,न फोन का और न टेलेक्स का;ईमेल तब शुरू नहीं हुए थे।मैंने जितने कानूनी तरीके सम्भव थे वो सब अपनाए किंतु पैसा मारा गया और कोई जतन चला नहीं।हॉं बस गनीमत ये रही कि जो अगला ऑर्डर बनवाया और तैयार हो गया था वो शिप नहीं हुआ था लेकिन वो लाखों का माल किसी और के काम का तो था नहीं तो उसका उपयोग घर में सजावट में और लोगों को गिफ्ट देने में ही कई वर्षों तक होता रहा और कुछ लोकल मार्केट में गया हाँलाँकि तब भारत में लोकल मार्केट में इस तरह के उत्पादों की डिमांड लगभग न के बराबर सी ही थी।इस मामले का आखिरी ट्विस्ट ये रहा कि कुछ वर्षों बाद मैं अपने कुछ साथी निर्यातक मित्रों के साथ फ्रैंकफर्ट में बैठा था।बातों-बातों में बाहर के पेमेंट की गड़बड़ की बात चली तो मैंने अपना अनुभव बताया तो उन एक्सपोर्टर में से एक जिनका लकड़ी के उत्पादों का कारोबार था वो बोले कि मेरे साथ भी ऐसा ही इसी पार्टी ने किया लेकिन मैंने तो डीपी से डीए में बदलने से मना कर दिया था फिर कुछ समय कोई जवाब नहीं आया।जब मैंने खोजबीन करते हुए शिपिंग लाइन के लोगों से सम्पर्क किया तो उन्होंने कहा कि वो माल तो उन्होंने डिलीवरी में दे दिया था।इन एक्सपोर्टर ने कहा कि मुझसे पूछे बिना तो वो लोग बोले कि आपको फोन किया तो आपने फोन पर शिपमेंट को DA पर रिलीज करने को कह तो दिया था।तब मेरी समझ में आया कि वो फोन मुझको आखिर आया क्यों था।मेरा अनुभव रहा है कि एक्सपोर्ट के काम में अधिकांश व्यापारी अच्छे ही होते हैं लेकिन कई बार न जाने किन वजहों से ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटनाएं भी हो जाती हैं और ऐसी घटनाओं में थोड़ी सावधानी बरत कर नुकसान से बचा जा सकता है।
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