सिंदबाद ट्रैवल्सजर्मनी के मिस्टर हिलगर और स्पोर्ट्स शूज़ का किस्सा
सिंदबाद ट्रैवल्स
जर्मनी के मिस्टर हिलगर और स्पोर्ट्स शूज़ का किस्सा
हमारा एक्सपोर्ट का काम चल निकला था और हम लोग फ्रैंकफर्ट में साल में दो बार आयोजित होने वाले हैंडीक्राफ्ट्स फेयर (Ambiente) के अलावा म्यूनिख,पेरिस, हैम्बर्ग, इंग्लैंड आदि के ट्रेड शो में भी जाने लगे थे।फेयर में जाने के अतिरिक्त साल में एकाधिक बार हम लोगों के यूरोप के चक्कर व्यापारियों से मिलने को भी लगने लगे थे तथा इस सबसे अंतर्राष्ट्रीय व्यापारियों में हम लोगों की एक अच्छी छवि बन गयी थी और जान पहचान तो हो ही गयी थी और इसका लाभ जब वो व्यापारी दिल्ली के फेयर में हमारे बूथ पर आते तो हमको मिलता था।हमारी डिज़ाइन और क्वालिटी काफी अच्छी थी।हमारे विज़िटिंग कार्ड पर जो पीले/गहरे भूरे और ग्रे कलर का ग्लोब और क्राउन का लोगो था और हमारा कंपनी का नाम "राघव" ये यूरोप और अमेरिका के उस समय के अधिकांश बड़े व्यापारियों की जुबान पर रहता था।फ्रैंकफर्ट में फेयर के दौरान इतने सारे सैम्पल लाद कर सुबह से शाम दौड़ने से बहुत थकान हो जाती थी,पैर में छाले भी पड़ जाते थे और कई बार तो चूँकि कई दिन तक सुबह से शाम चलने के कारण (जबकि रोजमर्रा में ज्यादा पैदल चलना होता नहीं था) जाँघे भी छिल जाती थीं।चलने में थोड़ी सुविधा रहे तो बाद में चलकर अपने सूट के पहनावे के साथ में चमड़े के फॉर्मल शूज़ के स्थान पर स्पोर्ट्स शूज़ पहन लेता था।
जर्मनी के फेयर में मेरी मुलाकात एक बहुत बड़े व्यापारी तथा एजेंट से हुई।एजेंट का नाम मिस्टर हिलगर था।अपनी कम्पनियों के लिए वही थीं और डिज़ाइन्स फाइनल करने का काम कर रहे थे तथा खरीद भी कर रहे थे।मेरी उनसे काफी देर बातचीत हुई,मुझको लगा कि उनको मेरे प्रोडक्ट्स भी काफी अच्छे लगे किंतु न जाने क्या हुआ कि सारी बातचीत सकारात्मक होने के बावजूद भी उन्होंने मुझको कोई ऑर्डर नहीं दिया।अगली बार जब गुड्डू फ्रैंकफर्ट फेयर में उस से मिले तो उसने बहुत अच्छी तरह से काम की बात की और कहा कि पिछली बार तुम्हारे भाई से भी मैं मिला था किंतु मैंने उनको कोई ऑर्डर नहीं दिया।इस पर अभिनव ने उनसे पूछा कि क्या हमारे प्रोडक्ट्स में कोई कमी थी या रेट गलत थे तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि सब ठीक था किंतु तुम्हारे भाई अपने सूट ओर स्पोर्ट्स शूज़ पहने हुए थे।जब उनका ड्रेस सेंस ही सही नहीं था तो वो डिज़ाइन,कलर, थीम आदि को कैसे समझ पाएंगे।तब गुड्डू ने हंसते हुए उसको मेरे पैर की समस्या बताई।हिलगर साहब बाद में हमारे फिरोजाबाद के ऑफिस में भी आये थे।
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