सिंदबाद ट्रैवल्स-45वापिसी रोम से दिल्ली Sindbad Travels-45Return from Rome to Delhi
सिंदबाद ट्रैवल्स-45
वापिसी
Sindbad Travels-45
Return
दिनांक 24 अक्टूबर 1991
आज के दिन मेरी इस लंबी यात्रा का समापन था।रोम से दिल्ली की यात्रा थी,अपने घर की वापिसी की यात्रा थी।मैंने सुबह ही सुबह सबसे विदा ली,उनको धन्यवाद दिया और टैक्सी में बैठ गया एयरपोर्ट के लिए।ये उन्हीं श्रीकृष्ण भक्त जी की टैक्सी थी और इस्कॉन में रुकने वालों को एयरपोर्ट छोड़ने की यह सेवा वो मुफ्त प्रदान करते थे।
एयरपोर्ट पर पहुँच कर जब मैं चैक इन काउंटर पर पहुँचा तो काउंटर पर बैठे व्यक्ति ने कहा कि आपके सामान का वजन तो 62 किलो से अधिक है और आप अपने इस टिकट पर केवल 30 किलो ले जा सकते हैं।मैंने उसको समझाने का प्रयास किया कि मैं इतनी लंबी यात्रा करके लौट रहा हूँ तो मेरे साथ दुनिया भर की गिफ्ट्स,सोवेनियर्स आदि है तो प्लीज़ मुझको जाने दीजिए।वो बिल्कुल पसीजा नहीं और उसने कहा कि आप बिलकुल जा सकते हैं लेकिन या तो सामान छोड़ दीजिए या इसके लिए वजन के हिसाब से अतिरिक्त भाड़ा दीजिए।वो पैसे उसने न जाने किस हिसाब से जोड़े कि मुझको लगा कि इसमें तो एक बारवका टिकट और आ जायेगा तो फिर इतने पैसे भरना तो बेवकूफी थी और ये सारा सामान ऐसा था कि मेरे लिए उसमें से कुछ भी छोड़ना भी मुमकिन नहीं लग रहा था।मैं वहाँ से हट गया और थोड़ी देर में दूसरे काउंटर की लाइन में लग गया किंतु यहाँ जब मैं काउंटर पर पहुँचा तो उसी व्यक्ति ने मुझको देख लिया और गड़बड़ हो गयी।अब तो मैं बहुत परेशान हो गया,मैंने उससे कहा कि मुझको बिजिनेस क्लास में कर दो तो वो भी कुछ जिद्दी किस्म का व्यक्ति था बोला इतना वजन उसमें भी नहीं ले सकते बिना अतिरिक्त चार्ज दिए।मैं वाकई बहुत चिंतित हो गया फिर मैं घूम कर दूसरी ओर फर्स्ट क्लास के काउंटर पर गया और मैंने बिना कोई बात किये उनसे कहा कि मुझको फर्स्ट क्लास में चार्ज ले कर अपग्रेड कर दीजिए जो उन्होंने सहर्ष कर दिया और फिर आने फर्स्ट क्लास के पैसेंजर का सामान भी पूरे सम्मान से उन्होंने ले लिया बिना उसके वजन के विषय में कोई भी किसी भी प्रकार की बात किये तब मेरी जान में जान आदि क्योंकि वजन तो मेरे सामान का फर्स्ट क्लास के मापदंडों से भी अधिक ही था।अब मैं रोम के शानदार लियोनार्डो दा विंची एयरपोर्ट पर घूमता रहा और घरवालों के लिए ड्यूटी फ्री दुकानों से सामान लेता रहा।हम लोग कोई यद्यपि शराब, सिगरेट नहीं पीते थे लेकिन अपने इष्ट मित्रों,परिचितों के लिए गुड्डू ने कहा हुआ था तो मैंने दो बोतलें ब्ल्यू लेवल की लीं और कुछ डनहिल और रॉथमैन्स के पैकिट।हमारी बुआ के लड़के भय्यो दा (अब इस दुनिया में नहीं हैं) पैन के बहुत शौकीन थे और हम लोगों को सदैव अच्छे-अच्छे पैन गिफ्ट करते थे।उन्होंने मुझसे कहा था कि हमारे लिए एक अच्छा पैन ले आना तो मैंने उनके लिए एक काफी अच्छा और महंगा पैन भी खरीदा।
अब तक मैं थक गया था और इसलिए थक कर मैं एयरपोर्ट पर एक स्थान पर जाकर बैठ गया।थोड़ी देर को शायद मेरी आँख लग गयी और तभी किसी ने मुझसे पूछा कि आप मिस्टर चतुर्वेदी हैं जो दिल्ली जा रहे हैं तो मैंने हड़बड़ा कर हॉं कहा तो वो बोला हम लोग न जाने कितनी देर से आपके नाम का अनाउंसमेंट कर रहे हैं,सारी फ्लाइट आपके कारण रुकी हुई है और आप यहाँ सो रहे हैं।इस पर मैं बिल्कुल झेंप गया और उसके साथ भागता हुआ जहाज के पास पहुँचा।जब मैं जहाज में घुसा तो सब मुझको घूर रहे थे।जहाज में फर्स्ट क्लास होने के कारण मेरी सीट सबसे आगे की थी।मेरे बगल की सीट पर इटली का ही कोई बहुत बड़ा संगीतकार था जिनका नाम मुझको अब याद नहीं है पर उनसे मेरी काफी देर बातचीत होती रही।हमारा जहाज इटली के ज्वालामुखी वाले इलाके के ऊपर से भी उड़ा जो मुझको उस संगीतकार ने दिखाया।
जहाज में बैठा हुआ मैं सोच रहा था कि कैसे एक काम करने का सपना देखा जिसको मैं पूरा कर सकूं उसके लिए मेरे माँ, पापा, पत्नी,भाई बहन, बहनोई सब मेरे साथ मजबूती से खड़े थे और ईश्वर की कृपा से वो सपना अब साकार हो चला था।मेरा जहाज तो अपनी गति से दिल्ली की ओर बढ़ रहा था किंतु मेरा मन कर रहा था कि अब तो बहुत दिन हो गए हैं और कैसे भी पलक झपकते ही मैं अपने घरवालों के पास पहुँच जाऊँ।मैं सोच रहा था कि मेरा बेटा अर्पित जो अभी जून में ही एक साल का हुआ था कहीं इन पाँच हफ्तों में मुझको भूल तो नहीं गया होगा।जब मैं दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुँचा तो मेरे पापा मुझको लेने को वहाँ आये हुए थे।
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