पहली यात्रा के बाद-1जर्मनी-फ्रैंकफर्टGermany-Frankfurt
पहली यात्रा के बाद-1
जर्मनी-फ्रैंकफर्ट
Germany-Frankfurt
मैं पहले लिख ही चुका हूँ कि कैसे मैंने एक्सपोर्ट का व्यापार करने का सपना संजोया और किस प्रकार से कई देश घूम-घूम कर यह व्यापार शुरू किया।अब आगे यह भी बताना चाहता हूँ कि इन सभी बातों को लिखने का उद्देश्य मात्र एक यात्रा वृतांत लिखना नहीं है अपितु मैं यह बताना चाहता हूँ कि एक छोटे से शहर का नौजवान कैसे एक सपना देखता है और उसको साकार करने के प्रयास करता है।एक बिल्कुल नया व्यापार कैसे शुरू किया जाता है,उसकी समस्याएं क्या होती हैं और उनसे कैसे पार पाई जाती है।कई बार आपके जरा से प्रयास रंग ले आते हैं और बहुत बार ऐसा भी होता है कि समस्या जमीन में गड़े कंक्रीट के पिलर की भांति होती है जिसको पर करने और तोड़ने में आपकी बहुत शक्ति लगती है लेकिन सारी बातों का सार एक ही है कि हिम्मत करने वालों की कभी हार नहीं होती है और जब हार होती भी है तो उद्यमी लोगों के लिए प्रत्येक हार के आगे भी एक जीत होती है।सच्चाई,ईमानदारी,मेहनत और सजगता से अपना काम करते चलिए आगे बढ़ने का इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है।जब समस्या ज्यादा परेशान करे तो ध्यान रखिये समस्या को हराने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होता है।अब आगे मैं अपने उन कुछ अनुभवों की चर्चा करना चाहूँगा जो तब के हैं जब काम कुछ चलने लगा था और उन यात्राओं के हैं जो 1991 की पहली यात्रा के बाद होती रहीं।
जैसा मैं पहले बता चुका हूँ कि 1994 से भारत में दिल्ली के प्रगति मैदान में एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फ़ॉर हैंडीक्राफ्ट्स द्वारा एक ट्रेड फेयर का आयोजन शुरू कर दिया गया था जो बहुत सफल हुआ।आगे चल कर यह एक बहुत बड़े आयोजन में बदलने वाला था जिसका स्थान अगली शताब्दी (सन 2000 के बाद वाली शताब्दी ) में ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में होना था।इस फेयर के आयोजन ने न जाने कितने लोगों की किस्मत तो चमकाई ही साथ ही भारत के हस्तशिल्प के व्यापार को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर एक नई ऊंचाई और पहचान भी दी।इस सबके लिए EPCH के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर रहे श्री राकेश कुमार,उनके साथी श्री आर0के0वर्मा, एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के तत्कालीन नेता और एक्सपोर्टर श्री नवरत्न समदरिया और इन सभी की साथियों की टीम का जितना शुक्रिया अदा किया जाए वो कम ही होगा।
दिल्ली के फेयर की सफलता से प्रेरित होकर और ये जानकर कि हस्तशिल्प का विश्व का सबसे बड़ा फेयर फ्रैंकफर्ट जर्मनी में साल में दो बार आयोजित होता मेरा दिल भी फ्रैंकफर्ट जाकर उस फेयर को देखने का होने लगा।अब तक हम लोग एक्सपोर्ट करने लगे थे और साथ ही साथ हमने मुरादाबाद के निर्यातको को भी माल देना शुरू कर दिया था।अब हमने अगस्त 1994 में फ्रैंकफर्ट,जर्मनी के फेयर में जाने का इरादा बनाया और उसके लिए तैयारी शुरू कर दी।अब स्थिति ऐसी हो गयी थी कि क्या चीज बिकती है इसकी भी हमको जानकारी होना शुरू हो ही गया था।फ्रैंकफर्ट फेयर की इस यात्रा का कार्यक्रम कुछ ऐसा बना कि मैंने अपना फ्लाइट रिज़र्वेशन लुफ्थांसा एयरलाइंस से कराया और छोटे भाई अभिनव का अगले दिन का के ऐल ऐम की फ्लाइट से एम्स्टर्डम-हॉलैंड होते हुए आने का कार्यक्रम बना।हम भाइयों ने ऐसा एक नियम बना रखा था कि हम लोग एक साथ एक ही फ्लाइट से कभी साथ नहीं चलते थे चाहे हमारे गंतव्य एक ही हों।
मैं दिल्ली से सीधे फ्रैंकफर्ट की फ्लाइट पकड़ कर पहुँच गया और फ्रैंकफर्ट मेरे लिए अंजान स्थान तो अब था ही नहीं।मुरादाबाद के राजकमल कम्पनी के मालिक श्री कमल अग्रवाल से मेरा परिचय था,वो फ्रैंकफर्ट में स्टैंड लगाते थे और उनके कहने पर मैंने भी वहाँ के ऐक्सल्सियर होटल में ठहरने का फैसला किया।कमल भाईसाहब से मुझको फ्रैंकफर्ट में बहुत मदद मिली।कहाँ ठहरना है,कैसे आना-जाना है,फेयर में थक जाने पर अपने स्टैंड में बैठा कर चाय-पानी पिलाना,अगर जरूरत हो तो अपने सैम्पल की अटैची उनके स्टैंड में एक तरफ रख देना,पान मसाला और मिठाई खिलाना ये सब वो बातें थीं जो उस समय हमारे जैसे नए व्यक्ति के लिए बहुत मायने रखती थीं और इसके लिए मैं उनका जितना शुक्रिया अदा करूँ वो कम होगा।उनका यह सद्भाव और मदद मुझको आजीवन याद रहेगी।
ऐक्सल्सियर होटल फ्रैंकफर्ट मेन हौफ्टबाह्नहॉफ के बिल्कुल सामने था और आज के भारतीय होटलों के हिसाब से थ्री स्टार या उस से कुछ बेहतर था।इसके ठहरने में सुबह का ब्रेकफास्ट शामिल था और रात के खाने के लिए थोड़ा आगे चल कर कैज़र स्ट्रासे के आगे से अंदर जा कर एक भारतीय रेस्तरां था जहाँ 20 जर्मन मार्क (एक मार्क उस समय लगभग 20 भारतीय रुपये के आसपास की कीमत का होता था)की एक वेजिटेरियन थाली मिलती थी (थाली में हमारे यहाँ की थालियों की तरह ही खन बने हुए होते थे) जिसमें दाल, एक रसे की सब्जी,सलाद, एक सूखी सब्जी, 2 रोटी और मिठाई के रूप में एक गुलाब जामुन होता था।अगर बहुत डिटेल में न जाया जाए तो कमोबेश ये अच्छा खाना होता था।कमल भाईसाहब ने ही यह खाने की जगह बताई और ये भी बताया कि वहाँ समोसा भी मिलता था और वो समोसा स्वाद में भी अच्छा होता था।किसी ने मुझको ये भी बताया कि जर्मनी में उस समय पूर्वी यूरोप और तुर्की के बहुत लोग आ रहे थे और उनसे थोड़ा बचके और सावधानी से रहना चाहिए।
अगले दिन मैं अपने छोटे भाई गुड्डू (अभिनव) को एयरपोर्ट लेने गया।गुड्डू दुबई तो हो आये थे लेकिन यूरोप की उनकी यह पहली यात्रा थी और जब वो वहाँ आये तो उनके चेहरे पर काफी खुशी थी और मुझको याद है कि उनकी सामान की ट्रॉली पकड़ते हुए मैंने हँसते हुए कहा था कि भाई ये मिडल ईस्ट नहीं यूरोप है।
जब हम लोग होटल पहुँचे और अपने कमरे में पहुँच गए तो देखा कि अभिनव का सारा सामान तो होटल वालों ने कमरे पहुँचा दिया था किंतु हमारा ब्रीफकेस नहीं था।हमने नीचे रिसेप्शन पर जाकर पूछ-ताछ की तो उन सभी होटल कर्मचारियों ने इससे अपनी कतई अनभिज्ञता जाहिर की।अब तो हम लोग बहुत परेशान हो गए क्योंकि उस ब्रीफकेस में पासपोर्ट,कागजात और सबसे महत्वपूर्ण विदेशी मुद्रा के ट्रैवलर्स चैक थे।यह बहुत बड़ी समस्या इसलिए भी थी कि उस जमाने में न तो इंटरनेट बैंकिंग थी,न क्रेडिट-डेबिट कार्ड थे और न वहाँ हमारा ऐसा कोई परिचित ही था जिससे हम पैसे मांग सकते।हमने बहुत दिमाग दौड़ाया तो हम पक्के थे कि ब्रीफकेस न तो एयरपोर्ट पर छूटा और जितना ध्यान आ रहा था उससे लगता था कि हमारा ब्रीफकेस टैक्सी में भी नहीं छूटा था।अब हमारे तो होश फाख्ता थे,हम क्या करते….तो मैंने होटल के रिसेप्शन पर बहुत कहा सुनी की,ऊधम मचाया और कहा कि मैं अभी पुलिस को बुलाता हूँ वही खोजेंगे हमारा ब्रीफकेस।सभी रिसेप्शन वाले बिल्कुल साफ मना कर ही रहे थे तो हम यह कहते हुए अपने कमरे की ओर चले कि हम अभी आकर फिर पुलिस के पास जाते हैं।हम लिफ्ट की ओर जा रहे थे कि अचानक रिसेप्शन के एक आदमी ने कहा कि मैं लगेज रूम में देखता हूँ और तुरंत ही वहाँ से वो वापिस निकला तो उसके हाथ में हमारा ब्रीफकेस था और उसने पूछा कि क्या ये आपका ब्रीफकेस है जिसको आप खोज रहे थे?हमारी प्रसन्नता का पारावार नहीं था क्योंकि वो हमारा ही ब्रीफकेस था।वो छोटे कद का व्यक्ति तुर्की का था।
Dashing and impressive personality sir 🙏
ReplyDeleteExcellent efforts. I have passed out from IIFT. Been to 95 countries of the world. It’s an exciting world. I appreciate your efforts.
ReplyDelete🙏🙏😊
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